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मोंटी बंदर और जग्गू मगरमच्छ की कहानी सुंदरवन के नीली झील के पास घटित होती है, जहाँ दोनों की दोस्ती जामुन के फल से शुरू होती है।
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जग्गू की पत्नी कलि के लालच के कारण वह मोंटी का कलेजा खाने की योजना बनाता है, क्योंकि कलि सोचती है कि जो बंदर इतने मीठे फल खाता है, उसका कलेजा भी मीठा होगा।
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जग्गू मोंटी को अपने घर खाने पर आमंत्रित करने के बहाने झील के बीच ले जाता है,
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लेकिन वहाँ जाकर मोंटी को अपने असली इरादे बताता है।
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मोंटी अपनी सूझबूझ से स्थिति को संभालता है और झूठ बोलता है कि वह अपना कलेजा पेड़ पर छोड़ आया है।
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जग्गू मोंटी की बातों में आकर वापस किनारे की ओर तैरता है।
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मोंटी जग्गू को मूर्ख बनाकर उसे सबक सिखाता है कि दोस्ती में धोखा देना गलत है
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और उसे कभी वापस न आने के लिए कहता है।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि बुद्धि और सूझबूझ का सही इस्तेमाल करके मुसीबतों से बाहर निकला जा सकता है।
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कहानी यह भी सिखाती है कि धोखेबाजों से दूर रहना चाहिए और उन पर दोबारा भरोसा नहीं करना चाहिए।
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