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मंकू नामक बंदर की कहानी 'कोई नहीं है अपना' पंचतंत्र की एक शिक्षाप्रद कथा है, जो यह सिखाती है कि मुसीबत में किए गए अच्छे कार्य कभी-कभी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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कहानी विशालाक्षी वन में रहने वाले दयालु मंकू बंदर की है, जो एक दिन एक पत्थर के नीचे दबे कालिया नामक काले नाग की मदद करता है।
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मंकू की माँ ने उसे हमेशा समझाया था कि दया करना अच्छी बात है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि मदद पाने वाला व्यक्ति इसके लायक है या नहीं।
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नाग कालिया ने मंकू से वादा किया कि वह उसे कभी नहीं डसेगा,
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लेकिन मंकू की मदद के बाद उसने अपनी फितरत दिखाते हुए मंकू पर हमला करने की कोशिश की।
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मंकू ने चालाक लोमड़ी की मदद से नाग को फिर से पत्थर के नीचे दबा दिया, जिससे मंकू की जान बच गई।
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कहानी का मुख्य संदेश यह है कि दुष्ट व्यक्ति का स्वभाव कभी नहीं बदलता, चाहे उसके साथ कितना भी अच्छा व्यवहार क्यों न किया जाए।
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इस कहानी से यह भी सीख मिलती है कि शारीरिक ताकत से अधिक महत्वपूर्ण बुद्धि होती है, जो बड़ी से बड़ी मुसीबत से निकाल सकती है।
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अंत में, मंकू ने इस अनुभव से सीखा कि आँख मूंदकर भरोसा करना मूर्खता है और अपनी सुरक्षा अपने हाथ में ही होती है।
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कहानी पंचतंत्र की अन्य कहानियों की तरह नैतिकता और बुद्धिमानी का पाठ पढ़ाती है, जो बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।
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