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नीलगीरी के जंगल में मोंटी नाम का एक नन्हा हाथी रहता था, जो हमेशा सवाल पूछता रहता था और उसकी इसी जिज्ञासा ने 'मोंटी का स्कूल' की शुरुआत की।
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मोंटी ने जंगल के बीच बरगद के पेड़ के नीचे एक स्कूल शुरू किया, जहाँ जानवरों को प्रकृति के रहस्यों और विज्ञान की सरल बातें सिखाई जाती थीं।
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शुरुआत में मोंटी का मजाक उड़ाया गया, लेकिन उसने नीले पत्थरों का रास्ता बनाकर जानवरों को आकर्षित किया। धीरे-धीरे जानवर मोंटी के स्कूल में आने लगे।
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मोंटी ने जानवरों को घनत्व का सरल नियम समझाया, जिससे उन्हें समझ में आया कि हर भारी चीज नहीं डूबती और हर हल्की चीज नहीं तैरती।
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मोंटी के स्कूल में हर कोई शिक्षक और हर कोई छात्र था। चीकू बंदर ने जहरीले और रसीले फलों के बारे में बताया, जबकि विज्जी उल्लू ने तारों की स्थिति से दिशा पहचानना सिखाया।
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चींटियों ने टीम वर्क और भोजन संचय का अनुशासन सिखाया। इस तरह, स्कूल में अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ।
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एक दिन जंगल में आग लग गई, लेकिन मोंटी की तार्किक सोच और शांत व्यवहार ने जानवरों को सुरक्षित दिशा में ले जाकर उनकी जान बचाई।
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इस घटना ने साबित कर दिया कि ज्ञान न केवल जानकारी देता है, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने का साहस भी प्रदान करता है।
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मोंटी का स्कूल आज भी ज्ञान का प्रतीक है, जहाँ जानवर एक साथ बैठकर प्रकृति के रहस्यों को सुलझाते हैं और सीखते हैं।
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इस कहानी से यह सीख मिलती है कि ज्ञान की कोई उम्र या सीमा नहीं होती और हमेशा सवाल पूछते रहने से नई सीख मिलती है।
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