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माउंटेन गोरिल्ला पूर्वी गोरिल्ला की एक उप-प्रजाति हैं, जो अपने भारी और मजबूत शरीर के लिए जाने जाते हैं। उनकी पीठ पर चांदी जैसे सफेद बाल उग आते हैं, जिससे उन्हें 'सिल्वरबैक' कहा जाता है।
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ये गोरिल्ला मुख्य रूप से 'विरुंगा पर्वत' और 'बिंदी इम्पेंट्रेबल नेशनल पार्क' में पाए जाते हैं। ये ऊंचाई वाले ठंडे और दलदली जंगलों में रहते हैं।
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माउंटेन गोरिल्ला आमतौर पर समूहों में रहते हैं जिन्हें 'ट्रूप' कहा जाता है, जिसमें एक लीडर सिल्वरबैक होता है। वे अपने समय का अधिकांश हिस्सा खाने और आराम करने में बिताते हैं।
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ये पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं, और पत्तियां, टहनियां, बांस के अंकुर और फल इनके मुख्य आहार होते हैं। वे बहुत कम पानी पीते हैं क्योंकि उन्हें पत्तों और फलों से पर्याप्त नमी मिल जाती है।
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माउंटेन गोरिल्ला बेहद बुद्धिमान होते हैं और लगभग 25 अलग-अलग प्रकार की आवाज़ें निकाल सकते हैं। वे चेहरे के हाव-भाव और हाथों के इशारों से भी संवाद करते हैं।
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इनकी संख्या में एक समय भारी गिरावट आई थी, लेकिन वैश्विक संरक्षण प्रयासों से अब इनकी संख्या में सुधार हुआ है, और वर्तमान में लगभग 1,000 से अधिक माउंटेन गोरिल्ला बचे हैं।
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गोरिल्ला का शिकार, निवास स्थान की कमी और बीमारियां उनके अस्तित्व के लिए खतरा बनी हुई हैं,
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लेकिन संरक्षण प्रयासों ने उनकी स्थिति में सुधार लाया है।
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माउंटेन गोरिल्ला परिवार के प्रति समर्पण और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाते हैं। ये दिखाते हैं कि ताकत का मतलब हमेशा लड़ाई नहीं होता,
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बल्कि दूसरों की रक्षा करना भी है। हमें इन जीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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