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आरव, एक 13 साल का लड़का, अपने दोस्तों के प्रभाव में आकर आई-फोन की जिद करता है, जिससे उसके माता-पिता चिंतित हो जाते हैं।
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आरव के पिता, जो एक साधारण क्लर्क हैं, उसे फोन दिलाने के लिए एक शर्त रखते हैं कि आरव को फोन की कीमत का 10% अपनी मेहनत से कमाना होगा।
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आरव को लगता है कि यह आसान होगा, लेकिन जब वह काम की तलाश में निकलता है, तो उसे महसूस होता है कि पैसे कमाना कितना मुश्किल है।
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काम की तलाश में आरव को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कार धोने का काम जिसमें उसे बहुत कम पैसे मिलते हैं।
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अपनी कला के हुनर को याद करते हुए, आरव ने पेंटिंग्स और ग्रीटिंग कार्ड्स बनाने और बेचने का फैसला किया, जिससे वह पैसे कमाने में सफल होता है।
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दो महीने की मेहनत के बाद, आरव 9,500 रुपये कमा लेता है, लेकिन उसे समझ आता है कि इस पैसे को आई-फोन पर खर्च करना समझदारी नहीं होगी।
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आरव ने फैसला किया कि वह अपने पैसों से एक आर्ट-किट और टैबलेट खरीदेगा, जो उसके पेंटिंग के करियर में मददगार साबित होगा।
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कहानी का निष्कर्ष यह है कि समझदारी से पैसे का उपयोग करना और अपने हुनर को पहचानना महत्वपूर्ण है, न कि महंगे गैजेट्स पर निर्भर रहना।
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आरव ने सीखा कि असली स्मार्टनेस महंगे फोन में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग और हुनर में होती है।
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यह कहानी बच्चों को पैसे के महत्व और मेहनत की सच्ची कीमत को समझाने के लिए प्रेरित करती है।
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