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यह कहानी एक नन्ही गिलहरी चिंकी की है, जिसने एक भयानक तूफान में अपना घर खो दिया, लेकिन हार न मानते हुए उसने अपनी मेहनत और हिम्मत से एक नया और मजबूत घर बनाया।
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चिंकी का पुराना घर एक विशाल आम के पेड़ के खोखले तने में था, जिसे उसने बहुत प्यार से सजाया था। लेकिन एक रात आई आंधी ने उस पेड़ की डाल को तोड़ दिया, जिससे उसका घर बर्बाद हो गया।
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चिंकी और उसके बच्चे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन उनका घर और जमा किया हुआ खाना मलबे में दब गया। इस दुखद स्थिति में भी, चिंकी ने रोने के बजाय नया घर बनाने का निर्णय किया।
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चिंकी ने नदी के किनारे एक मजबूत बरगद के पेड़ को चुना और वहां अपना नया घर बनाने का संकल्प लिया। उसने इस बार घर बनाने के लिए मजबूत टहनियों और लताओं का इस्तेमाल किया।
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जंगल के कुछ जानवर उस पर हंसते थे, लेकिन चिंकी ने कहा, "तूफान का काम है आना और मेरा काम है बसना।" उसकी अटूट मेहनत और सकारात्मक सोच ने उसे एक हफ्ते में नया घर बनाने में मदद की।
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चिंकी का नया घर पहले वाले से कहीं ज्यादा बड़ा और सुरक्षित था। उसने इसे सुंदर पत्थरों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया, जिससे यह किसी महल जैसा दिखने लगा।
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जब जंगल के जानवर चिंकी का नया घर देखने आए, तो वे उसकी हिम्मत की तारीफ करते नहीं थके। चिंकी ने कहा,
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"मुसीबत ने मेरा घर ज़रूर तोड़ा, लेकिन उसने मुझे यह भी सिखाया कि मेरे अंदर उससे बेहतर बनाने की ताकत है।"
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यह कहानी हमें सिखाती है कि बुरा वक्त एक पड़ाव है, अंत नहीं। जब पुराना छूटता है,
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तभी कुछ नया और बेहतर बनने की जगह बनती है। ज़रूरत है तो बस सकारात्मक सोच और अटूट हौसले की।
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