नीलू खरगोश और चालाकी की सजा: सुनहरी घाटी की एक मजेदार दास्तान

Jan 09, 2026, 03:33 PM

चालाकी की सजा

कहानी "नीलू खरगोश और चालाकी की सजा" सुनहरी घाटी के एक नन्हे खरगोश नीलू की है, जो खुद को बहुत चालाक समझता था और दूसरों की मेहनत का फायदा उठाने की सोचता था।

चालाकी की सजा

सर्दियों की तैयारी के लिए जब सभी खरगोश मेहनत कर रहे थे, नीलू ने अपने दोस्त भोलू को धोखे में डालकर अपनी चालाकी का जाल बिछाया, ताकि उसका काम आसान हो सके।

चालाकी की सजा

नीलू ने गाजरें चुराने के लिए एक गड्ढा खोदा, लेकिन उसकी चालाकी का शिकार खुद वह ही बन गया, जब वह अपने ही गड्ढे में गिर गया।

चालाकी की सजा

गोनू हाथी ने नीलू की चालाकी को भांप लिया था और उसे उसकी गलती का अहसास कराया, जिससे नीलू को अपनी गलती का एहसास हुआ।

चालाकी की सजा

भोलू खरगोश ने नीलू की मदद की, लेकिन नीलू अपनी शर्मिंदगी के कारण भोलू की गाजरों को स्वीकार नहीं कर पाया।

चालाकी की सजा

इस घटना के बाद नीलू का हृदय परिवर्तन हुआ और उसने चालाकियों को त्यागकर मेहनत को अपनाया,

चालाकी की सजा

जिससे वह 'सुनहरी घाटी' का सबसे मेहनती खरगोश बन गया।

चालाकी की सजा

नीलू ने अपनी कहानी सुनाकर अन्य खरगोशों को समझाया कि चालाकी और धोखेबाजी से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है, लेकिन अंत में उसका नुकसान ही होता है।

चालाकी की सजा

कहानी की सीख यह है कि "जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद उसमें गिरता है।"

चालाकी की सजा

ईमानदारी और कड़ी मेहनत ही सफलता का सही रास्ता है।