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यह कहानी राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम की चतुराई की है, जिसमें दरबारी मंगलदास ने राजा को लाल रंग का मोर दिखाकर धोखा दिया और पच्चीस हजार रुपये ऐंठे।
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मंगलदास ने एक साधारण मोर को लाल रंग से रंगवाकर उसे दुर्लभ बताकर राजदरबार में प्रस्तुत किया, जिससे राजा प्रभावित हो गए और उसे पुरस्कृत किया।
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तेनाली राम ने मामले की सच्चाई जानने के लिए जासूसी की और रंग विशेषज्ञ का पता लगाया, जिसने मोर को रंगा था।
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तेनाली ने चार बेहतर लाल मोर बनवाकर दरबार में प्रस्तुत किए, जिससे राजा को मंगलदास की चाल का पता चला।
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राजा ने मंगलदास को धोखाधड़ी के लिए दंडित किया, उससे पच्चीस हजार रुपये वापस लिए और उसे जुर्माना भी लगाया।
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चित्रकार को उसकी कला के लिए उचित सम्मान और पुरस्कार दिया गया।
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इस घटना ने दरबारियों को सबक सिखाया कि चालाकी से मिली सफलता अस्थायी होती है,
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जबकि सच्चाई और मेहनत दीर्घकालिक सम्मान दिलाती हैं।
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कहानी का मुख्य संदेश यह है कि ईमानदारी और बुद्धिमानी ही असली संपदा है और सच्चाई की हमेशा जीत होती है।
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