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यह कहानी राजा विक्रम और एक साधारण किसान भोला की है, जो रत्नपुर राज्य में घटित होती है। राजा विक्रम अपनी प्रजा की आलसी प्रवृत्ति को देखकर चिंतित थे और उन्हें एक सबक सिखाने के लिए एक अनोखी परीक्षा का आयोजन किया।
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राजा ने मुख्य मार्ग के बीच में एक विशाल पत्थर रखवाया और छुपकर देखा कि कौन उस पत्थर को हटाता है। कई लोग आए और शिकायत करके चले गए, लेकिन किसी ने पत्थर हटाने की कोशिश नहीं की।
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भोला नामक एक गरीब किसान, जिसने अपनी सब्जियों की टोकरी नीचे रखकर पत्थर को हटाने की कोशिश की, अंततः सफल हुआ। पत्थर के नीचे एक मखमली थैली और एक पत्र मिला।
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थैली में सोने के सिक्के थे, जो उस व्यक्ति के लिए थे जिसने पत्थर को हटाने की हिम्मत दिखाई। राजा विक्रम ने भोला को इनाम दिया और उसकी प्रशंसा की।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि समस्याओं का समाधान ढूंढना आवश्यक है, क्योंकि हर मुश्किल के पीछे एक बड़ा अवसर छिपा होता है।
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भोला की मेहनत और परोपकारिता ने उसे न केवल धनवान बनाया बल्कि पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी।
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राजा विक्रम ने यह साबित किया कि मुसीबतों का सामना करने वाले लोग ही असली खजाने प्राप्त करते हैं।
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इस कहानी का नैतिक संदेश है कि अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते और हर समस्या में एक अवसर छिपा होता है।
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इस प्रेरक कहानी से बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने में ही सफलता का रहस्य छिपा है।
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