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'राजकुमारी और राक्षस' एक जादुई और भावनात्मक कहानी है जो सच्चे प्यार और बलिदान पर आधारित है, जिसमें राजकुमारी नंदिनी और एक डरावने राक्षस के बीच की अद्भुत प्रेम कहानी को दर्शाया गया है।
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कहानी स्वर्णपुर राज्य में शुरू होती है, जहाँ राजा वीरेंद्र सिंह की तीन बेटियाँ थीं। सबसे छोटी बेटी नंदिनी अपने दयालु और समझदार स्वभाव के लिए जानी जाती थी।
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तूफान के दौरान, तीनों बहनें एक रहस्यमयी महल में पहुँचती हैं, जहाँ नंदिनी एक जादुई नीला कमल तोड़ लेती है, जिससे राक्षस बहुत नाराज हो जाता है।
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नंदिनी अपनी बहनों को बचाने के लिए खुद को राक्षस की कैद में रहने के लिए तैयार कर लेती है, और धीरे-धीरे राक्षस के साथ उसकी दोस्ती हो जाती है।
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राक्षस नंदिनी को जादुई आईना देता है, जिससे वह अपने बीमार पिता को देखती है और उन्हें मिलने जाती है, लेकिन समय का ध्यान ना रख पाने के कारण वह देर से लौटती है।
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नंदिनी को एक सपना आता है जो उसे एहसास कराता है कि राक्षस उसकी गैर-मौजूदगी में पीड़ित हो रहा है। वह तुरंत लौटकर राक्षस के पास जाती है और अपने प्रेम का इज़हार करती है।
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नंदिनी के प्रेम और आँसू से राक्षस का श्राप टूट जाता है और वह एक सुंदर राजकुमार सिद्धार्थ में बदल जाता है,
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जो एक जादूगरनी के श्राप के कारण राक्षस बना था।
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कहानी के अंत में नंदिनी और राजकुमार सिद्धार्थ की शादी हो जाती है और वे खुशी-खुशी रहने लगते हैं।
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यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची सुंदरता अंदर होती है और दयालुता से बड़ी से बड़ी दुश्मनी को प्यार में बदला जा सकता है।
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