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एक विशाल जंगल 'नंदनवन' में पक्षियों का एक अनोखा स्कूल चलता था, जहां ज्ञान गुरु नामक बुजुर्ग उल्लू सभी पक्षियों को शिक्षा देते थे।
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मिट्ठू नामक तोता अपनी आदत के अनुसार चीजों को समझने के बजाय रट लेता था, जिससे उसे 'रट्टू तोता' कहा जाता था।
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ज्ञान गुरु ने पक्षियों को शिकारी के जाल से बचने के लिए एक मंत्र सिखाया, लेकिन मिट्ठू ने उसका अर्थ समझने के बजाय सिर्फ रट लिया।
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अगले दिन, मिट्ठू ने भूख के कारण दानों के पास जाकर जाल में फंस गया, क्योंकि वह मंत्र का अर्थ नहीं समझ सका था।
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जब शिकारी आया, तो मिट्ठू को असली डर का अहसास हुआ और उसे समझ आया कि बिना समझे रटना व्यर्थ है।
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उसके दोस्तों ने उसे बचाने के लिए बहेलिए पर हमला किया और एक चूहे ने जाल काटकर मिट्ठू को आजाद किया।
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मिट्ठू ने ज्ञान गुरु से माफी मांगी और समझा कि असली ज्ञान वही है जो सही समय पर काम आए।
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इस घटना के बाद, मिट्ठू ने रटना छोड़कर हर बात को गहराई से समझना शुरू किया और उसे 'समझदार मिट्ठू' कहा जाने लगा।
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कहानी से शिक्षा मिलती है कि किसी भी बात को सिर्फ याद करने के बजाय उसका अर्थ और उपयोग समझना जरूरी है।
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सच्चे दोस्त मुसीबत में हमेशा साथ देते हैं और ज्ञान का सही प्रयोग जीवन में महत्वपूर्ण होता है।
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