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यह कहानी "संगति का प्रभाव" विषय पर आधारित है, जिसमें दो तोतों की कहानी बताई गई है जो अलग-अलग वातावरण में पलकर बिल्कुल अलग स्वभाव के बन गए।
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सुंदरवन के जंगल में एक तूफान के कारण दो तोते भाई एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं। बड़ा भाई डाकुओं के इलाके में और छोटा भाई एक ऋषि के आश्रम में पहुंचता है।
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समय के साथ, बड़ा तोता डाकुओं की भाषा और व्यवहार सीख जाता है, जबकि छोटा तोता आश्रम के शांतिपूर्ण और विनम्र वातावरण में ढल जाता है।
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कहानी में राजा प्रताप सिंह का आगमन होता है, जो शिकार करते समय अपने सैनिकों से बिछड़ जाते हैं और पहले डाकुओं के इलाके में पहुंचते हैं।
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डाकुओं के इलाके में पहुंचकर राजा को बड़े तोते की कर्कश आवाज सुनाई देती है, जो डाकुओं की तरह बात करता है, जिससे वे वहां से भाग जाते हैं।
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इसके बाद, राजा ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं, जहां छोटे तोते की मधुर आवाज सुनकर वे आश्चर्यचकित हो जाते हैं।
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ऋषि राजा को समझाते हैं कि यह सब संगति का प्रभाव है,
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जहां एक तोता डाकुओं के बीच रहकर उनकी भाषा सीख गया और दूसरा आश्रम में रहकर विनम्र बन गया।
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कहानी यह सिखाती है कि संगति का प्रभाव हमारे व्यवहार और सोच पर गहरा असर डालता है,
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इसलिए हमें अच्छे दोस्तों और सकारात्मक वातावरण में रहना चाहिए।
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