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कहानी में रोहन नाम का एक दस साल का लड़का है जो हरिपुर गाँव में रहता है और एक शानदार महल बनाने का सपना देखता है, लेकिन मेहनत करने से कतराता है।
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रोहन के दादाजी उसकी इस आदत से चिंतित होते हैं और उसे मेहनत की अहमियत सिखाने के लिए एक योजना बनाते हैं।
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दादाजी रोहन से लकड़ियों से एक छोटा महल बनाने को कहते हैं, लेकिन रोहन बिना मेहनत और ध्यान के जल्दी में काम पूरा करता है, जिसका परिणाम होता है कि उसका महल टूट जाता है।
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टूटे महल को देखकर दादाजी रोहन को समझाते हैं कि सपने देखना अच्छा है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, लगन और शिक्षा की जरूरत होती है।
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दादाजी की बातों से प्रेरित होकर रोहन ने अपनी गलती को समझा और मेहनत करने की ठानी।
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रोहन ने अपनी पढ़ाई और कामकाज पर ध्यान देना शुरू किया और दादाजी की मदद से एक मजबूत और सुंदर बर्डहाउस बनाया।
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गाँव वाले रोहन के इस बदलाव से खुश हुए और उसे यह एहसास हुआ कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
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कहानी सिखाती है कि केवल सपने देखना काफी नहीं है; उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और शिक्षा की मजबूत नीव जरूरी होती है।
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मेहनत और अनुशासन के बिना सपने केवल कोरी कल्पना बनकर रह जाते हैं।
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यह कहानी बच्चों को प्रेरित करती है कि कर्म और मेहनत से ही असली सफलता प्राप्त होती है।
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