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नीलगिरी जंगल में चिकी नाम की शरारती गिलहरी रहती थी, जो अपनी माँ कोमल की बात नहीं मानती थी और अक्सर शरारतें करती थी।
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चिकी की शरारतों के कारण जंगल के राजा केसरी सिंह ने उसे चेतावनी दी कि अगर उसने अपनी हरकतें नहीं रोकीं, तो उसे जंगल से निकाल दिया जाएगा।
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जब माँ कोमल जंगल के दूसरे छोर पर गईं, तो उन्होंने चिकी को घर के आस-पास रहने की हिदायत दी, लेकिन चिकी ने बात नहीं मानी और जंगल की सीमा पार कर गई।
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खुले मैदान में चिकी पर आसमान से गरुड़ शिकारी ने हमला किया और उसे अपने पंजों में दबोच लिया, जिससे चिकी बहुत डर गई।
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कालू कौवा और मिट्ठू तोते ने गरुड़ का पीछा किया और उस पर हमला करके चिकी को बचाने की कोशिश की।
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जम्बो बंदर और अन्य जानवरों ने सूखी पत्तियों और नरम घास का जाल तैयार किया ताकि चिकी सुरक्षित नीचे गिर सके।
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चिकी की जान बच गई और वह इस घटना से बहुत घबरा गई, उसकी आँखों में आँसू थे।
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कहानी से हमें सीख मिलती है कि बड़ों की आज्ञा माननी चाहिए, सच्ची दोस्ती की अहमियत समझनी चाहिए और एकता में शक्ति होती है।
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लेख में गिलहरियों की याददाश्त और उनके खाने को छिपाने की आदत के बारे में भी रोचक जानकारी दी गई है।
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लेख के अंत में बच्चों को सलाह दी गई है कि शरारतें करें लेकिन किसी को नुकसान न पहुँचाएँ और हमेशा बड़ों की बात सुनें।
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