शेलू मगरमच्छ का पछतावा: नील-सरोवर की एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी

Jan 20, 2026, 12:25 PM

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

"शेलू मगरमच्छ का पछतावा" एक प्रेरणादायक कहानी है जो विनम्रता और मित्रता के महत्व को उजागर करती है। इस कहानी में शेलू नामक एक अहंकारी मगरमच्छ की यात्रा का वर्णन है, जो अपनी ताकत के कारण दूसरों को परेशान करता था।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

शेलू 'नील-सरोवर' झील का सबसे ताकतवर मगरमच्छ था, जो अपनी ताकत के घमंड में छोटे जानवरों को डराता और उनका मजाक उड़ाता था। उसे विश्वास था कि ताकतवर को किसी दोस्त की जरूरत नहीं होती।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

एक दिन, शेलू के जबड़े में एक मछली की हड्डी फंस जाती है, जिससे उसे असहनीय दर्द होता है। खुद को असहाय पाकर, वह मदद के लिए अपने पुराने दुश्मनों के पास जाता है, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए तैयार नहीं होता।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

शेलू को अहसास होता है कि उसने अपने चारों ओर सिर्फ दुश्मन बनाए हैं। उसकी मदद करने के लिए कोई नहीं आया, और वह पछतावे में डूब जाता है।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

तभी, मीतू नामक एक नन्ही चिड़िया उसकी मदद के लिए आती है। मीतू बिना डरे शेलू के मुँह में जाकर हड्डी निकाल देती है, जिससे शेलू को राहत मिलती है।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

मीतू की मदद और समझदारी से शेलू का हृदय परिवर्तन होता है। वह अपने पुराने व्यवहार पर पछताता है और दूसरों की मदद करने का संकल्प लेता है।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

शेलू अब अपने ताकत का सही उपयोग करता है, कछुओं को सैर कराता है, हिरणों को सुरक्षित पानी पीने का रास्ता देता है, और मीतू को अपना सबसे अच्छा दोस्त बनाता है।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

कहानी की सीख है कि घमंड और बदतमीजी इंसान को अकेला कर देते हैं, जबकि विनम्रता और दयालुता सच्चे दोस्त दिलाती हैं। पछतावा हमें अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर देता है।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

शेलू की कहानी ने पूरे जंगल को सिखाया कि सच्ची ताकत क्षमा और सेवा में होती है। अब वह 'नील-सरोवर का रक्षक' बन चुका है, जिससे बच्चे खेलने में भी डरते नहीं हैं।

शेलू मगरमच्छ का पछतावा

यह कहानी मगरमच्छ और चिड़ियों के अनोखे रिश्ते को भी उजागर करती है, जिससे यह संदेश मिलता है कि छोटी सी चिड़िया भी वह काम कर सकती है जो एक विशाल मगरमच्छ नहीं कर सकता।