सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा - बच्चों की नैतिक कहानी

Feb 10, 2026, 05:35 PM

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

कहानी "सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा" में चंदनपुर के जमींदार प्रताप सिंह की बेटी अवनि की शादी की कहानी है, जो अपनी सुंदरता पर गर्व करती है और एक सुंदर वर चाहती है।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

प्रताप सिंह दो दावेदारों में से एक को चुनने के लिए महर्षि वेदव्यास जी से सलाह लेते हैं। एक दावेदार रजत, अमीर व्यापारी का बेटा है और दूसरा मोहन, एक साधारण किसान।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

महर्षि ने दोनों युवकों को पानी लाने के लिए भेजा, रजत को सोने का कलश और मोहन को मिट्टी का घड़ा दिया।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

रजत का सोने का कलश गर्मी में पानी को उबाल देता है जबकि मोहन का मिट्टी का घड़ा पानी को ठंडा और पीने योग्य रखता है।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

महर्षि ने अवनि को सिखाया कि बाहरी सुंदरता अस्थायी होती है और गुण ही असली मूल्य रखते हैं।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

अवनि को अपनी गलती का एहसास होता है और वह समझती है

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

कि जीवनसाथी के लिए गुण और स्वभाव अधिक महत्वपूर्ण हैं।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

अंत में, अवनि मोहन को अपना जीवनसाथी चुनती है, जो गुणवान और विनम्र है।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

कहानी का नैतिक यह है कि बाहरी दिखावा छलावा हो सकता है और कठिन परिस्थितियों में गुण ही काम आते हैं।

सोने का कलश और मिट्टी का घड़ा

यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि सुंदरता की बजाय व्यक्ति के गुणों को प्राथमिकता देनी चाहिए।