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सुंदरपुर गाँव के राजू को उसकी खराब लिखावट के कारण स्कूल में अक्सर डांट पड़ती थी, जिससे वह निराश था और सोचता था कि अच्छी लिखावट केवल किस्मत वालों को मिलती है।
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एक दिन राजू ने एक बुजुर्ग साधु बाबा की प्यास बुझाई, जिसके बदले में बाबा ने उसे एक सोने की कलम दी और कहा कि यह कलम जादुई है, लेकिन इसका जादू तभी काम करेगा जब वह रोज़ 5 पन्ने लिखेगा।
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राजू ने उत्साह के साथ रोज़ 5 पन्ने लिखने की आदत डाल ली, जिससे उसकी लिखावट में सुधार होने लगा और स्कूल में उसकी तारीफ होने लगी।
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वार्षिक परीक्षा के दिन राजू अपनी सोने की कलम भूल गया, लेकिन साधारण पेन से भी उसकी लिखावट उतनी ही सुंदर बनी रही, जिससे वह हैरान हुआ।
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राजू ने बुजुर्ग से जाकर पूछा कि बिना सोने की कलम के भी उसकी लिखावट कैसे सुंदर बनी रही। तब बुजुर्ग ने बताया कि असली जादू उसकी मेहनत और निरंतर अभ्यास में था, न कि कलम में।
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इस अनुभव से राजू को समझ आया कि सफलता का रहस्य किसी जादुई वस्तु में नहीं,
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बल्कि लगातार मेहनत और अभ्यास में है।
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कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि आत्मविश्वास बाहरी वस्तुओं पर नहीं,
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बल्कि अपनी मेहनत पर होना चाहिए और असली जादू हमारी लगन और परिश्रम में होता है।
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यह प्रेरणादायक कहानी बच्चों को यह सीख देती है कि हम खुद अपने जीवन के जादूगर हैं और अभ्यास में ही असली शक्ति होती है।
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