तेनाली रमन और अंगूठी चोर: जादुई संदूक का कमाल

Jan 21, 2026, 11:35 AM

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

तेनाली रमन की कहानी विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय की खोई हुई अंगूठी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे तेनाली ने अपनी चतुराई से खोज निकाला।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

राजा कृष्णदेवराय ने एक बेशकीमती हीरे की अंगूठी पहनी थी, जो अचानक गायब हो गई, जिससे राजा ने अपने 12 अंगरक्षकों को चोर होने का शक किया।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

तेनाली रमन को इस समस्या को सुलझाने के लिए बुलाया गया, जिसने अपनी बुद्धिमत्ता से बिना हिंसा के चोर को पकड़ने का वादा किया।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

तेनाली ने एक 'जादुई संदूक' का प्रयोग किया, जिसमें कालिख और इत्र लगाया गया था, ताकि चोर को पकड़ा जा सके।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

सभी अंगरक्षकों को संदूक छूने के लिए कहा गया, जिससे निर्दोषों के हाथ काले हो गए, लेकिन चोर ने डर के कारण संदूक नहीं छुआ, जिससे उसके साफ हाथों से उसकी पहचान हो गई।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

तेनाली की योजना ने चोर को पकड़ने में सफलता दिलाई,

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

जिसने अपनी चोरी कबूल कर ली और अंगूठी अस्तबल में छुपाई थी।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

राजा ने चोर को जेल भेज दिया और तेनाली रमन को उनकी चतुराई के लिए इनाम में अपनी हीरे की अंगूठी दे दी।

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो,

तेनाली रमन और अंगूठी चोर

उसकी गलती उसे पकड़वा देती है और बुद्धि का सही उपयोग समस्याओं को सुलझा सकता है।