Read Full Story
तेनालीराम का घोड़ा एक मजेदार और तर्कपूर्ण बाल कहानी है जो बच्चों को धैर्य, समझदारी और समस्या सुलझाने की सीख देती है।
Read Full Story
कहानी विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय और उनके अस्तबल के एक सुंदर लेकिन उग्र घोड़े की है, जिसे कोई भी काबू नहीं कर पा रहा था।
Read Full Story
तेनालीराम ने बिना किसी बल या सख्ती के घोड़े की समस्या को समझकर उसे शांत करने का तरीका अपनाया।
Read Full Story
उन्होंने घोड़े के डर को समझकर धैर्य और समझदारी से उसका विश्वास जीता, जिससे घोड़े का व्यवहार बदल गया।
Read Full Story
तेनालीराम ने घोड़े के सामने चारा रखा और धीरे-धीरे उसके पास जाकर घोड़े को यह भरोसा दिलाया कि वह सुरक्षित है।
Read Full Story
कहानी यह सिखाती है कि हर गुस्से के पीछे डर होता है और ज़ोर-ज़बरदस्ती से समस्या बढ़ सकती है।
Read Full Story
तेनालीराम की इस समझदारी ने राजा को भी प्रभावित किया और उन्हें इंसानों को समझने का तरीका सिखाया।
Read Full Story
यह कहानी बच्चों को डर को समझने, धैर्य रखने, और बिना हिंसा के समाधान खोजने की प्रेरणा देती है।
Read Full Story
तेनालीराम, जिनका असली नाम तेनाली रामकृष्ण था, विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध कवि और बुद्धिजीवी थे, जिनकी कहानियां आज भी जीवन की गहरी सीख देती हैं।
Read Full Story
कहानी का संदेश है कि किसी को बदलने के लिए उसे डराना नहीं, बल्कि समझना ज़रूरी होता है।
Read Full Story