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यह कहानी एक ईमानदार लकड़हारे रामू की है, जो अपनी सच्चाई और ईमानदारी के कारण तीन कुल्हाड़ियों का मालिक बनता है।
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रामू एक गरीब लकड़हारा था जो अपनी पुरानी लोहे की कुल्हाड़ी से लकड़ियां काटकर अपना जीवनयापन करता था।
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एक दिन उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर जाती है, और उसकी सच्ची पुकार सुनकर नदी की देवी प्रकट होती हैं।
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देवी रामू की ईमानदारी की परीक्षा लेती हैं और उसे सोने और चांदी की कुल्हाड़ियां दिखाती हैं, जिन्हें वह ठुकरा देता है।
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रामू की सच्चाई देखकर देवी प्रसन्न होती हैं और उसे उसकी पुरानी कुल्हाड़ी के साथ सोने और चांदी की कुल्हाड़ियां भी उपहार में देती हैं।
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रामू का लालची पड़ोसी भी सोने की कुल्हाड़ी पाने के लिए नाटक करता है, लेकिन उसकी झूठी चाल पकड़ी जाती है और वह अपनी कुल्हाड़ी भी खो बैठता है।
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कहानी से यह सीख मिलती है कि सच्चाई और ईमानदारी का हमेशा इनाम मिलता है, जबकि लालच और झूठ का फल बुरा होता है।
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बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के लिए यह कहानी एक उत्कृष्ट माध्यम है।
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माता-पिता बच्चों से यह सवाल पूछ सकते हैं कि वे रामू की जगह होते तो क्या करते,
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जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता का विकास होगा।
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