Read Full Story
उछलू बंदर, आनंदवन जंगल का एक शरारती बंदर, प्रकृति की सुंदरता से प्रभावित होकर चित्रकला में रुचि रखता था और उसने इंसानों से रंग और कागज़ लेकर चित्रकारी शुरू की।
Read Full Story
उछलू की कला ने पूरे जंगल में ख्याति प्राप्त की और उसने जानवरों के चित्र बनाकर पैसे कमाने का व्यवसाय शुरू किया, जिससे उसके पास खूब पैसा जमा हो गया।
Read Full Story
धन की लालच में, उछलू अपनी आजादी और खुशी खो बैठा, क्योंकि वह अपने पैसे की सुरक्षा के लिए चिंतित रहने लगा और पेड़ों पर उछल-कूद करना बंद कर दिया।
Read Full Story
उछलू ने जंगल की सबसे समझदार बंदरिया चुलबुली से शादी का प्रस्ताव रखा,
Read Full Story
लेकिन उसने उछलू को समझाया कि असली खुशी पैसे में नहीं, बल्कि आजादी और प्रकृति में है।
Read Full Story
चुलबुली की बातों से प्रभावित होकर, उछलू ने अपने सारे पैसे जंगल से बाहर फेंक दिए और अपनी खोई हुई खुशी और आजादी को पुनः प्राप्त किया।
Read Full Story
अंततः, उछलू ने अपनी कला को पैसे के लालच से मुक्त किया और खुशी के लिए मुफ्त में चित्र बनाना शुरू किया।
Read Full Story
कहानी का नैतिक संदेश यह है कि लालच इंसान की खुशी और स्वतंत्रता छीन लेता है,
Read Full Story
जबकि असली खुशी प्रकृति और सरल जीवन में है।
Read Full Story
कला का उद्देश्य खुशी बांटना होना चाहिए, न कि केवल पैसे कमाना।
Read Full Story