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'विद्या का उचित उपयोग' की कहानी में एक छोटी गिलहरी चिंकू ने अपनी बुद्धि और ज्ञान से ताकतवर भेड़िया रॉकी को शिकारी के जाल से बचाया, जो जंगल में फंस गया था।
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चंदनवन के जंगल में ज्ञानचंद नामक एक समझदार उल्लू की कक्षा लगती थी, जहाँ जानवर शिक्षा प्राप्त करते थे। रॉकी और चिंकू उनके प्रमुख छात्र थे।
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कहानी में ताकत और बुद्धि का मुकाबला दिखाया गया है। रॉकी अपने बल पर घमंड करता था, जबकि चिंकू विद्या के महत्व को समझता था।
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एक दिन रॉकी शिकारी के लोहे के पिंजरे में फंस गया, जो ताज़ा मांस के लालच में गया था। उसकी ताकत लोहे की सलाखों के सामने बेकार साबित हुई।
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चिंकू ने अपनी बुद्धिमानी से पिंजरे के तंत्र को समझा और उत्तोलक का उपयोग करके रॉकी को जाल से बाहर निकाला।
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रॉकी ने इस घटना से सीखा कि शारीरिक ताकत की सीमाएं होती हैं, लेकिन बुद्धि की कोई सीमा नहीं होती।
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कहानी का मुख्य संदेश है कि ज्ञान ही असली शक्ति है, और छोटी गिलहरी ने इस बात को साबित किया कि अकलमंदी किसी के आकार या उम्र पर निर्भर नहीं करती।
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इस घटना के बाद, रॉकी ने विद्या का महत्व समझा और गुरु ज्ञानचंद की कक्षा में ध्यान से पढ़ाई करने लगा।
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कहानी मित्रता और सीख का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हर सीख कभी ना कभी काम आती है।
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यह कहानी बच्चों को प्रेरित करती है कि वे शिक्षा और बुद्धिमानी का सही उपयोग करें और जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करें।
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