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यह कहानी हवा और सूर्य की है, जो अपनी-अपनी शक्तियों की तुलना करते हैं और इस बात पर बहस करते हैं कि उनमें से कौन अधिक बलवान है।
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हवा अपनी तेज़ गति और तूफान लाने की क्षमता पर गर्व करती है, जबकि सूर्य अपने तेज और गर्मी देने वाले प्रकाश पर।
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दोनों एक यात्री को देखते हैं और शर्त लगाते हैं कि जो यात्री की शाल उतरवा सकेगा, वही सबसे बलवान माना जाएगा।
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हवा पहले प्रयास करती है और ज़ोरदार झोंके मारती है, लेकिन यात्री अपनी शाल को और कसकर पकड़ लेता है।
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हवा की पूरी कोशिश के बावजूद, यात्री अपनी शाल नहीं छोड़ता और हवा थककर रुक जाती है।
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इसके बाद सूर्य धीरे-धीरे अपनी कोमल किरणें बिखेरता है, जिससे यात्री को गर्मी लगने लगती है।
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अंततः यात्री खुद ही शाल उतार देता है, जिससे सूर्य की कोमलता और धैर्य की विजय होती है।
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इस कहानी का संदेश है कि जबरदस्ती और आक्रमण से अधिक प्रभावी दयालुता और धैर्य होते हैं।
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यह कहानी ईसप की दंतकथाओं में से एक है, जो नैतिक शिक्षा देती है कि संयम और कोमलता ही वास्तविक शक्ति होती है।
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जीवन में सफलता पाने के लिए प्रेम और धैर्य का मार्ग अपनाना चाहिए, न कि उग्रता और जल्दबाजी का।
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