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गोरिल्ला और सियार :- बहुत समय पहले की बात है, भारत के एक बहुत ही विशाल और हरे-भरे जंगल में, जिसका नाम 'चंदनवन' था, बहुत सारे जानवर मिल-जुलकर रहते थे। इसी जंगल में 'भीम' नाम का एक विशालकाय गोरिल्ला (Gorilla) - विकिपीडिया रहता था। भीम शरीर से तो किसी पहाड़ जैसा मजबूत और ताकतवर था, लेकिन उसका दिल एक छोटे बच्चे की तरह बहुत ही साफ और भोला था। वह हमेशा दूसरे जानवरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।
उसी चंदनवन में एक 'रंगा' नाम का सियार (Jackal) भी रहता था। रंगा बहुत ही दुबला-पतला था, लेकिन उसका दिमाग बहुत ही चालाक और खुराफाती था। वह हमेशा कोई न कोई ऐसी तरकीब सोचता रहता था जिससे बिना मेहनत किए उसे अच्छा खाना मिल जाए। जंगल के सभी जानवर रंगा की चालाकी से वाकिफ थे, इसलिए कोई भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था। गोरिल्ला और सियार का स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल उल्टा था।
रंगा सियार का लालच और एक योजना
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एक दिन दोपहर के समय, रंगा सियार जंगल में घूम रहा था। तभी उसकी नज़र एक बहुत ही ऊंचे पहाड़ की चोटी पर लटक रहे एक विशाल मधुमक्खी के छत्ते (Beehive) पर पड़ी। उस छत्ते से सुनहरे रंग का मीठा-मीठा शहद टपक रहा था। शहद देखकर रंगा के मुंह में पानी आ गया।
उसने मन ही मन सोचा, "वाह! कितना स्वादिष्ट शहद है। अगर यह मुझे मिल जाए तो कई दिनों तक मजे से खाऊंगा।" लेकिन वह पहाड़ बहुत ऊंचा था और रंगा को मधुमक्खियों के डंक से बहुत डर लगता था। उसने सोचा कि यह काम तो कोई ऐसा जानवर ही कर सकता है जो बहुत ताकतवर हो और जिसे मधुमक्खियों के डंक का असर न हो। तभी उसे दूर से पेड़ की शाखाएं तोड़कर फल खाता हुआ 'भीम' गोरिल्ला दिखाई दिया।
रंगा की आंखों में एक चमक आ गई। उसने तुरंत एक चालाक योजना बनाई और भीम की ओर चल पड़ा।
झूठी तारीफ का जाल
रंगा सियार धीरे-धीरे भीम गोरिल्ला के पास पहुंचा और बहुत ही मीठी आवाज़ में बोला, "प्रणाम भीम भैया! अरे वाह! आपकी यह विशाल भुजाएं और यह ताकत! सच में, पूरे जंगल में आप जैसा कोई बलवान नहीं है। शेर और हाथी भी आपके सामने कुछ नहीं हैं।"
भोला भीम अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने अपनी छाती ठोकते हुए कहा, "धन्यवाद रंगा भाई! कहो, आज यहाँ कैसे आना हुआ?"
रंगा ने दुखी होने का नाटक करते हुए कहा, "भैया, क्या बताऊं। आज सुबह जंगल के कुछ जानवर कह रहे थे कि भीम के पास सिर्फ शरीर है, हिम्मत नहीं। वो कह रहे थे कि आप डरपोक हैं!"
यह सुनते ही भीम को बहुत गुस्सा आ गया। "क्या? किसने कहा ऐसा? मैं किसी से नहीं डरता!"
रंगा ने तुरंत कहा, "वही तो मैंने उन्हें समझाया! लेकिन वो बोले कि अगर भीम सच में इतना बहादुर है, तो वह 'खूनी पहाड़' की चोटी से वह जादुई छत्ता तोड़कर लाए, जिसे आज तक कोई नहीं छू पाया। मैंने सोचा कि मैं आपको बता दूं।"
भीम की नादानी और मधुमक्खियों का हमला
भीम ने बिना कुछ सोचे-समझे अपनी ताकत साबित करने की ठान ली। वह तुरंत उस ऊंचे पहाड़ की तरफ दौड़ पड़ा। रंगा सियार एक सुरक्षित झाड़ी के पीछे छिपकर मुस्कुराते हुए तमाशा देखने लगा।
भीम बड़ी ही आसानी से उस ऊंचे पहाड़ पर चढ़ गया। जैसे ही उसने उस विशाल छत्ते पर हाथ डाला, हजारों गुस्सैल मधुमक्खियों ने उस पर हमला कर दिया। भीम बहुत ताकतवर था, लेकिन छोटी-छोटी मधुमक्खियों के डंक से उसे भी बहुत दर्द होने लगा। फिर भी, अपनी बात साबित करने के लिए उसने छत्ता तोड़ा और पहाड़ से नीचे कूद गया।
नीचे आते ही भीम दर्द से कराहते हुए नदी की तरफ भागा ताकि मधुमक्खियों से बच सके। उसने वह शहद का छत्ता वहीं जमीन पर रख दिया था। मौका देखकर चालाक रंगा सियार झाड़ियों से बाहर निकला, छत्ता उठाया और दूर एक गुफा में जाकर मजे से सारा शहद खा गया।
सच्चाई का ज्ञान और भीम की सीख
जब भीम नदी से नहाकर वापस आया, तो उसने देखा कि न वहां शहद का छत्ता है और न ही रंगा सियार। आस-पास के जानवरों ने भीम को बताया कि उन्होंने रंगा को शहद लेकर भागते हुए देखा था।
भीम को अपनी बेवकूफी पर बहुत पछतावा हुआ। उसे समझ आ गया कि रंगा ने उसकी झूठी तारीफ करके अपना स्वार्थ पूरा किया। भीम ने कसम खाई कि वह इस धोखेबाज़ सियार को ऐसा सबक सिखाएगा कि वह जिंदगी भर याद रखेगा। शारीरिक ताकत तो भीम के पास थी ही, अब उसने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने की भी ठान ली।
भीम का पलटवार
कुछ दिनों बाद, भीम ने रंगा को एक पेड़ के नीचे सोते हुए देखा। भीम ने अपनी एक नई योजना बनाई। वह धीरे से रंगा के पास गया और जोर से बोला, "अरे वाह! मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि इतना बड़ा खजाना मुझे मिल गया!"
रंगा की नींद टूट गई। 'खजाना' शब्द सुनकर उसके कान खड़े हो गए। उसने पूछा, "क्या हुआ भीम भैया? कौन सा खजाना?"
भीम ने रहस्यमयी तरीके से कहा, "अरे रंगा! तुम्हें पता है, उस पुरानी सूखी गुफा के अंदर बहुत सारा ताजा और स्वादिष्ट मांस रखा है। किसी शिकारी ने शायद वहां छुपाया है। लेकिन मैं तो शाकाहारी हूँ, मेरे किस काम का? मैं जा रहा हूँ।"
रंगा सियार का लालच फिर जाग उठा। वह बिना कुछ सोचे उस पुरानी गुफा की ओर भाग खड़ा हुआ।
चालाकी का अंत
जैसे ही रंगा ने उस अंधेरी गुफा में छलांग लगाई, वह एक गहरे गड्ढे में गिर पड़ा। वह कोई खजाने की गुफा नहीं थी, बल्कि शिकारियों द्वारा जंगली सूअरों को पकड़ने के लिए खोदा गया एक गहरा जाल (गड्ढा) था।
रंगा बाहर निकलने के लिए बहुत उछला, लेकिन गड्ढा बहुत गहरा था। वह रोने लगा और मदद के लिए चिल्लाने लगा, "बचाओ! बचाओ! मुझे यहाँ से निकालो!"
तभी ऊपर से भीम गोरिल्ला की आवाज़ आई। भीम ने गड्ढे में झांकते हुए कहा, "क्यों रंगा? खजाना मिल गया? दूसरों को मूर्ख बनाकर अपना काम निकालने का यही नतीजा होता है। तुम्हारी झूठी तारीफों ने मुझे मधुमक्खियों से डसवाया था, अब तुम्हारा लालच तुम्हें इस गड्ढे में ले आया।"\
रंगा सियार हाथ जोड़कर रोने लगा, "मुझे माफ कर दो भीम भैया! मैं कसम खाता हूँ कि अब कभी किसी को धोखा नहीं दूंगा। कभी किसी की झूठी तारीफ करके अपना मतलब नहीं निकालूंगा। बस मुझे एक बार बाहर निकाल लो।"
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भीम दयालु था। उसने एक लंबी और मजबूत पेड़ की डाल तोड़ी और गड्ढे में लटका दी। रंगा उस डाल को पकड़कर बाहर निकल आया। बाहर आते ही उसने भीम के पैर पकड़े और माफी मांगी। उस दिन के बाद से रंगा सियार ने अपनी चालाकी छोड़ दी और जंगल में मेहनत करके अपना पेट भरने लगा।
(इस जंगल की कहानी से सीख - Moral of the story):
झूठी तारीफ से बचें: जो लोग हमारी बहुत ज्यादा और झूठी तारीफ करते हैं, अक्सर उनका कोई न कोई स्वार्थ छिपा होता है।
बुद्धि और बल का सही उपयोग: सिर्फ शरीर से ताकतवर होना काफी नहीं है, दिमाग का सही इस्तेमाल करना भी बहुत जरूरी है।
लालच बुरी बला है: रंगा सियार के लालच ने ही उसे मुश्किल में डाला। लालच का अंत हमेशा बुरा होता है।
क्षमा करना महानता है: भीम ने बदला लेने के बजाय रंगा को सबक सिखाया और अंत में उसकी मदद करके अपनी महानता दिखाई।
