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जैविक घड़ी क्या है? बच्चों के लिए आसान समझ : हमारा शरीर किसी जादुई मशीन से कम नहीं है। इसके अंदर एक अदृश्य घड़ी लगातार चलती रहती है। इस घड़ी को वैज्ञानिक भाषा में जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) कहा जाता है। यह लगभग 24 घंटे का प्राकृतिक चक्र है, जो तय करता है कि हमें कब नींद आएगी, कब भूख लगेगी और कब हम सबसे ज्यादा ऊर्जावान महसूस करेंगे।
सुबह रोशनी क्यों जरूरी है?
जब सुबह सूरज की रोशनी हमारी आँखों पर पड़ती है, तो आँखें मस्तिष्क को संदेश भेजती हैं — “उठो, दिन शुरू हो गया!” इसके बाद शरीर कोर्टिसोल नाम का हार्मोन छोड़ता है, जो हमें जगाता है और सक्रिय बनाता है। इसलिए सुबह की धूप में खेलना और टहलना बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
रात को नींद क्यों आती है?
जैसे-जैसे शाम होती है और अंधेरा बढ़ता है, मस्तिष्क मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है। यही हार्मोन हमें नींद दिलाता है। अगर बच्चे देर रात तक मोबाइल या टीवी देखते हैं, तो दिमाग भ्रमित हो जाता है और नींद देर से आती है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहना जरूरी है।
जैविक घड़ी और सेहत
जैविक घड़ी सिर्फ नींद ही नहीं संभालती। यह पाचन, शरीर का तापमान, ध्यान लगाने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। जो बच्चे समय पर सोते-जागते हैं, वे पढ़ाई में ज्यादा ध्यान लगा पाते हैं और कम बीमार पड़ते हैं।
अच्छी जैविक घड़ी कैसे बनाएं?
रोज़ एक ही समय पर सोना और उठना
सुबह धूप लेना
सोने से पहले मोबाइल बंद करना
समय पर खाना खाना
दिन में खेलना और सक्रिय रहना
ये छोटी आदतें शरीर की घड़ी को मजबूत बनाती हैं।
निष्कर्ष
हमारी जैविक घड़ी प्रकृति का एक शानदार उपहार है। अगर हम उसके अनुसार चलें, तो शरीर स्वस्थ और दिमाग तेज रहता है। सही नींद, सही समय पर खाना और नियमित दिनचर्या बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
