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जानिए माउंटेन गोरिल्ला: जंगल का शक्तिशाली और मासूम रक्षक - एक विस्तृत गाइड

जानिए माउंटेन गोरिल्ला के बारे में सब कुछ। उनका निवास, खान-पान, और उन्हें बचाने के प्रयास। बच्चों के लिए एक दिलचस्प और प्रेरणादायक जानकारीपूर्ण लेख।

By Lotpot
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प्रकृति का एक अनमोल उपहार

प्रकृति ने इस धरती पर कई तरह के जीव-जंतु बनाए हैं, लेकिन "माउंटेन गोरिल्ला" उन सब में से सबसे अनोखा और प्रभावशाली है। जब हम गोरिल्ला के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में एक गुस्से वाला जानवर आता है, लेकिन हकीकत में ये बहुत ही शांत, समझदार और पारिवारिक जीव होते हैं। माउंटेन गोरिल्ला न सिर्फ जंगल की शान हैं, बल्कि वे हमारे पर्यावरण (environment) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। इस लेख में हम उनकी जिंदगी, उनके संघर्ष और उनकी खूबियों को विस्तार से जानेंगे।

माउंटेन गोरिल्ला कौन हैं? एक पहचान

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माउंटेन गोरिल्ला (Gorilla beringei beringei) पूर्वी गोरिल्ला की एक उप-प्रजाति है। ये गोरिल्ला की दो सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक हैं। इनका शरीर बहुत ही भारी-भरकम और मजबूत होता है। इनके बाल बाकी गोरिल्ला के मुकाबले ज्यादा लंबे और घने होते हैं, जो उन्हें पहाड़ों की ठंड से बचाने में मदद करते हैं।

एक वयस्क (adult) नर माउंटेन गोरिल्ला का वजन लगभग 150 से 200 किलो तक हो सकता है। जब ये नर बड़े हो जाते हैं, तो इनकी पीठ पर चांदी (silver) जैसे सफेद बाल उग आते हैं, इसीलिए उन्हें 'सिल्वरबैक' कहा जाता है। सिल्वरबैक अपने परिवार का नेता (leader) होता है और सबकी हिफाजत करता है।

इनका निवास स्थान: जहाँ ये रहते हैं

माउंटेन गोरिल्ला दुनिया में सिर्फ दो जगहों पर पाए जाते हैं। पहली जगह है 'विरुंगा पर्वत' (Virunga Mountains) की पहाड़ियाँ, जो तीन देशों—रवांडा, युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सीमा पर हैं। दूसरी जगह है युगांडा का 'बिंदी इम्पेंट्रेबल नेशनल पार्क' (Bwindi Impenetrable National Park)।

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ये लोग बहुत ऊंचाई पर रहते हैं, लगभग 8,000 से 13,000 फीट की ऊंचाई पर, जहाँ बादल उनके पैरों के नीचे दिखते हैं। इनका घर घने और ठंडे दलदली जंगलों में होता है।

माउंटेन गोरिल्ला की रोज़ाना ज़िंदगी और परिवार

माउंटेन गोरिल्ला बहुत ही मिलनसार होते हैं। ये हमेशा समूह (groups) में रहते हैं, जिसे 'ट्रूप' या 'बैंड' कहा जाता है। एक ट्रूप में आम तौर पर 5 से 30 गोरिल्ला होते हैं। इस परिवार का मुखिया वही सिल्वरबैक होता है, जो यह तय करता है कि कब खाना है, कब सोना है और कहाँ जाना है।

गोरिल्ला अपना ज्यादा तर वक्त खाने और आराम करने में बिताते हैं। इनका स्वभाव बहुत ही प्रेम-पूर्ण होता है। माँएं अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखती हैं और उन्हें अपने कंधे पर बिठाकर घुमाती हैं।

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खान-पान: ये क्या खाते हैं?

बड़े शरीर के बावजूद, माउंटेन गोरिल्ला पूरी तरह से शाकाहारी (vegetarian) होते हैं। इनका मुख्य खाना पत्तियां, टहनियां, बांस के नए अंकुर (bamboo shoots) और फल होते हैं।

  • पत्तियां और टहनियां: इनके खाने का 80% हिस्सा यही होता है।

  • फल: कभी-कभी स्वाद बदलने के लिए ये जंगल के खट्टे-मीठे फल भी खाते हैं।

  • कीड़े-मकौड़े: बहुत कम मात्रा में ये चींटियां या कनखजूरे भी खा लेते हैं।

ये दिन भर में लगभग 20 से 30 किलो तक हरा-भरा खाना खा सकते हैं। मजेदार बात यह है कि ये पानी बहुत कम पीते हैं क्योंकि उन्हें पत्तों और फल से ही पर्याप्त नमी (moisture) मिल जाती है।

इनकी बुद्धिमानी और संवाद (Communication)

माउंटेन गोरिल्ला बहुत ही बुद्धिमान होते हैं। ये इंसानी भावनाओं को समझ सकते हैं। इनके बात करने के तरीके बहुत दिलचस्प हैं:

  1. आवाज़ें: ये लगभग 25 तरह की अलग-अलग आवाज़ें निकाल सकते हैं—खुशी, डर या गुस्से को दिखाने के लिए।

  2. इशारा: ये चेहरे के हाव-भाव और हाथों के इशारों से भी बात करते हैं।

  3. चेस्ट बीटिंग (Chest Beating): अक्सर हम देखते हैं कि गोरिल्ला अपनी छाती पीटते हैं। ये वे तब करते हैं जब उन्हें अपनी ताकत दिखानी हो या अपने परिवार को खतरे से सावधान करना हो।

इनकी आंखें बहुत गहरी और समझ-बूझ से भरी होती हैं। अगर आप कभी इनकी आंखों में देखें, तो आपको अहसास होगा कि ये कितने संवेदनशील (sensitive) जीव हैं।

माउंटेन गोरिल्ला पर संकट और संरक्षण (Conservation)

एक समय था जब माउंटेन गोरिल्ला विलुप्त (extinct) होने की कगार पर थे। इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी। इनके सामने कई बड़े खतरे हैं:

  • शिकार (Poaching): कुछ लोग गलत तरीके से इनका शिकार करते हैं।

  • निवास स्थान की कमी: खेतों और बस्तियों के लिए जंगल काटे जा रहे हैं, जिससे इनका घर छोटा होता जा रहा है।

  • बीमारियां: इनका शरीर इंसानी बीमारियों (जैसे फ्लू या कोल्ड) के प्रति बहुत कमज़ोर होता है।

लेकिन खुशी की बात यह है कि पिछले कुछ सालों में विश्व-स्तर पर किए गए प्रयासों से इनकी संख्या में इजाफा हुआ है। अब दुनिया में लगभग 1,000 से ज्यादा माउंटेन गोरिल्ला बचे हैं। 'डियन फॉसी' जैसे लोगों ने अपनी पूरी ज़िंदगी इनकी रक्षा में लगा दी।

आप माउंटेन गोरिल्ला के बारे में और अधिक जानकारी के लिए माउंटेन गोरिल्ला विकिपीडिया देख सकते हैं।

हम क्या सीख सकते हैं?

माउंटेन गोरिल्ला हमें परिवार के प्रति समर्पण और प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहने का पाठ पढ़ाते हैं। ये दिखाते हैं कि ताकतवर होने का मतलब हमेशा लड़ना नहीं होता, बल्कि अपने से कमज़ोरों की रक्षा करना होता है। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इन मासूम विशालकाय जीवों के घर (जंगलों) को बचाएं और पर्यावरण का ध्यान रखें।

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