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दादा भाई नौरोजी: बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

क्या तुमने कभी सोचा है कि हमारे देश को आजादी दिलाने में कौन-कौन से नायकों ने मेहनत की? आज हम बात करेंगे दादा भाई नौरोजी की, जिन्हें ‘भारत के दादाजी’ या ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रेरक कहानी है

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क्या तुमने कभी सोचा है कि हमारे देश को आजादी दिलाने में कौन-कौन से नायकों ने मेहनत की? आज हम बात करेंगे दादा भाई नौरोजी की, जिन्हें ‘भारत के दादाजी’ या ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रेरक कहानी है जो बच्चों को भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बताएगी। तो चलो, इस नायक की जिंदगी के रोमांचक सफर पर चलते हैं!

दादा भाई नौरोजी का जन्म और बचपन

दादा भाई नौरोजी का जन्म 4 सितंबर 1825 को मुंबई में एक साधारण पारसी परिवार में हुआ था। उनका परिवार बहुत अमीर नहीं था, लेकिन उनकी मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। छोटी उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया, लेकिन उनकी मां ने हिम्मत नहीं हारी और दादा भाई को अच्छी शिक्षा दिलाई। वे एलफिंस्टन कॉलेज में पढ़े और पढ़ाई में अव्वल रहे। क्या तुम जानते हो? वे पहले भारतीय थे जिन्हें अपने कॉलेज में प्रोफेसर बनने का मौका मिला!

देश के लिए उनका बड़ा योगदान

दादा भाई नौरोजी ने भारत को आजादी दिलाने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना में मदद की, जो आजादी की लड़ाई का एक बड़ा संगठन बना। वे तीन बार इस संगठन के अध्यक्ष भी बने। सबसे खास बात यह है कि वे पहले भारतीय थे जो ब्रिटिश संसद में सांसद बने। उन्होंने वहां जाकर बताया कि अंग्रेज भारत का धन लूट रहे हैं, जिसे ‘ड्रेन थ्योरी’ कहा जाता है। उनकी इस कोशिश से लोगों को पता चला कि हमें अपनी आजादी खुद हासिल करनी होगी।

मेहनत और सच्चाई की मिसाल

दादा भाई नौरोजी बहुत ईमानदार और मेहनती थे। वे सिर्फ पढ़ाई और राजनीति में ही नहीं, बल्कि समाज सुधार में भी आगे रहे। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया और सबके लिए बराबरी की बात की। उनकी एक मशहूर बात है, “हम सब अपनी मां भारती के बच्चे हैं, चाहे हम हिंदू हों, मुसलमान हों या पारसी, हम सबसे पहले भारतीय हैं!” यह बात बच्चों को सिखाती है कि हमें अपने देश से प्यार करना चाहिए और सबके साथ मिलकर रहना चाहिए।

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तथ्य

  • दादा भाई नौरोजी 91 साल तक जिए और 30 जून 1917 को मुंबई में उनका निधन हुआ।
  • उनकी याद में मुंबई में एक सड़क और दिल्ली में नौरोजी नगर का नाम उनके सम्मान में रखा गया है।
  • वे महात्मा गांधी के गुरु भी थे, जिन्होंने उनकी प्रेरणा से आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया।

बच्चों के लिए सीख

दादा भाई नौरोजी की कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत, ईमानदारी और देशभक्ति से हम बड़ी-बड़ी मुश्किलों को हरा सकते हैं। चाहे हालात कितने भी कठिन हों, पढ़ाई और सच्चाई से हम अपने सपनों को सच कर सकते हैं। तो बच्चों, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो और अपने देश के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लो!

दादा भाई नौरोजी एक ऐसे नायक हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी देश को समर्पित कर दी। उनकी प्रेरक कहानी बच्चों के लिए इतिहास और नैतिक शिक्षा का एक शानदार सबक है। उनकी मेहनत और सच्चाई को याद रखो और अपने जीवन में भी कुछ ऐसा करो जो देश को गर्व से भर दे!

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