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Guru Gobind Singh Jayanti: 27 दिसंबर, प्रकाश पर्व का महत्व

27 दिसंबर को मनाई जा रही Guru Gobind Singh Jayanti के बारे में सब कुछ। जानिए प्रकाश पर्व का महत्व, गुरु जी का जीवन और उनके महान बलिदान की गाथा।

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Guru Gobind Singh Jayanti केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के संकल्प का दिन है। इस साल 27 दिसंबर को पूरी दुनिया में गुरु गोबिंद सिंह जी का 359वां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता की भलाई और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। 

सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं
-तबै- गोबिंद सिंह नाम कहाऊं...

का उद्घोष करने वाले गुरु जी ने सिखों को एक वीर कौम के रूप में पहचान दी।

उन्होंने अपने चारों बेटों (साहिबजादों) को धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया, लेकिन कभी घुटने नहीं टेके। उनका 'ज़फ़रनामा' (विजय पत्र), जो उन्होंने मुगल शासक औरंगज़ेब को लिखा था, आज भी नैतिकता और वीरता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है।


गुरु ग्रंथ साहिब: शाश्वत गुरु

अपने देह त्याग से पहले, गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने घोषणा की कि उनके बाद कोई जीवित व्यक्ति गुरु नहीं होगा। उन्होंने 'गुरु ग्रंथ साहिब' को सिखों के शाश्वत गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने सिखों से कहा कि वे पवित्र ग्रंथ की शिक्षाओं का पालन करें और इसे ही अपना मार्गदर्शन मानें।

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27 दिसंबर: आस्था और भक्ति का संगम

सिख कैलेंडर और तिथि के अनुसार, इस साल 27 दिसंबर का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन श्रद्धालु गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं, अरदास करते हैं और गुरु जी की शिक्षाओं को याद करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक सच्चा इंसान वही है जो समाज के कमजोर वर्ग की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहे।


खालसा पंथ और मानवता का संदेश

गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी। उन्होंने 'पंच प्यारों' को चुनकर जाति-पाति के भेदभाव को जड़ से खत्म कर दिया। उन्होंने संदेश दिया कि:

""मानस की जात सबै एकै पहचानबो"" (अर्थात, पूरी मानव जाति को एक ही पहचानना चाहिए।)

उन्होंने 'सिंह' और 'कौर' के उपनाम देकर महिलाओं और पुरुषों को समानता का अधिकार दिया। उनके द्वारा दिए गए पांच ककार (केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कछैरा) आज भी हर सिख के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।


साहिबजादों का बलिदान और महान त्याग

Guru Gobind Singh Jayanti पर उनकी वीरता के साथ-साथ उनके परिवार के बलिदान को भी याद किया जाता है। गुरु जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपने चारों पुत्रों—साहिबजादे अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह—को कुर्बान कर दिया। उनके जैसा त्याग इतिहास में विरला ही मिलता है, जिन्होंने हंसते-हंसते अपना पूरा वंश देश और धर्म के लिए वार दिया।


गुरु ग्रंथ साहिब: अनंत गुरु

गुरु जी ने अपने देह त्याग से पहले सिखों को आदेश दिया कि उनके बाद अब कोई और देहधारी गुरु नहीं होगा। उन्होंने पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' को ही गुरु का दर्जा दिया। आज भी सिख समुदाय गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करता है।


जयंती पर होने वाले आयोजन

27 दिसंबर के दिन देशभर के गुरुद्वारों में विशेष रौनक रहती है:

  • नगर कीर्तन: पंच प्यारों की अगुवाई में भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

  • अमृत संचार: इस पावन दिन कई लोग अमृत छककर खालसा पंथ में शामिल होते हैं।

  • लंगर सेवा: गुरुद्वारों में बिना किसी भेदभाव के हज़ारों लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

  • शबद कीर्तन: गुरुवाणी के मधुर गायन से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।


सीख (Moral/Seekh)

गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए कभी डरना नहीं चाहिए। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें अपने नैतिक मूल्यों और धर्म से पीछे नहीं हटना चाहिए।


विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन और उनके द्वारा लड़े गए युद्धों के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ पढ़ें: Guru Gobind Singh Wikipedia

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