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शिवम दुबे का धमाका: कैसे अपनी कमजोरी को बनाया सबसे बड़ी ताकत? - T20 वर्ल्ड कप

कभी शॉर्ट बॉल से डरने वाले शिवम दुबे आज T20 के सबसे खतरनाक हिटर कैसे बने? जानिए उनकी मेहनत, बदलाव और नीदरलैंड के खिलाफ तूफानी पारी की कहानी।

By Lotpot
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शिवम दुबे का धमाका : क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के तो बहुत लगते हैं, लेकिन कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो खिलाड़ी का कद बदल देती हैं। T20 वर्ल्ड कप 2026 में नीदरलैंड के खिलाफ भारत की जीत में शिवम दुबे (Shivam Dube) ने जो किया, वह सिर्फ रन बनाना नहीं था, बल्कि एक 'नए शिवम' का ऐलान था।

कुछ समय पहले तक जिस शिवम दुबे को तेज गेंदबाजी के सामने संघर्ष करते देखा जाता था, आज वही गेंदबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन गए हैं। आइए जानते हैं उनकी इस सफलता के पीछे की मेहनत और बदलाव की कहानी।

कमजोरी जो बन गई चुनौती

क्रिकेट फैंस को याद होगा कि एक वक्त था जब शिवम दुबे को 'शॉर्ट बॉल' (बाउंसर) खेलने में बहुत दिक्कत होती थी। तेज गेंदबाज उनके शरीर पर गेंद फेंकते थे और वे या तो डक (Duck) कर जाते थे या अजीब तरह से आउट हो जाते थे। यह उनकी 'मसल मेमोरी' (Muscle Memory) बन गई थी। आलोचक कहने लगे थे कि दुबे सिर्फ स्पिनर्स को मार सकते हैं, पेसर्स (तेज गेंदबाजों) को नहीं। लेकिन शिवम ने हार नहीं मानी। उन्होंने तय किया कि वे अपनी इस कमजोरी को जड़ से खत्म करेंगे।

'बेसिक' की ओर वापसी: 18 गज की तैयारी

शिवम दुबे ने अपनी बल्लेबाजी को सुधारने के लिए 'बैक टू बेसिक्स' (Back to Basics) का मंत्र अपनाया।

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  • कड़ी ट्रेनिंग: उन्होंने नेट्स में बाउंस वाली लाल मिट्टी की पिचों पर अभ्यास शुरू किया।

  • खास तरीका: उनके कोच 22 गज (सामान्य पिच की लंबाई) के बजाय सिर्फ 18 गज की दूरी से गेंद फेंकते थे। इससे शिवम को गेंद खेलने के लिए बहुत कम समय मिलता था। इस अभ्यास ने उनकी 'रिएक्शन टाइम' (Reaction Time) को बहुत तेज कर दिया।

इसका परिणाम सबसे पहले 2023 और 2024 में दिखा जब वे स्पिनर्स के खिलाफ दुनिया के बेहतरीन हिटर बने और फिर धीरे-धीरे तेज गेंदबाजों की भी धुनाई शुरू कर दी।

नीदरलैंड के खिलाफ: संयम से तूफान तक

अहमदाबाद में नीदरलैंड के खिलाफ मैच में शिवम दुबे ने अपनी क्लास दिखाई। शुरुआत आसान नहीं थी। पिच थोड़ी मुश्किल थी और स्पिनर्स गेंद को घुमा रहे थे।

  • शुरुआत: शिवम ने पहली 11 गेंदों में सिर्फ 6 रन बनाए थे। सूर्यकुमार यादव को बार-बार उनके पास जाकर उन्हें शांत करना पड़ा।

  • धमाका: लेकिन जैसे ही शिवम की आँखें जमीं, उन्होंने गियर बदल दिया। 11 गेंदों के बाद उन्होंने अगली 25 गेंदों में 50 रन ठोक दिए!

  • स्कोर: उन्होंने कुल 31 गेंदों में 66 रन बनाए। कॉलिन एकरमैन के एक ओवर में उन्होंने दो विशाल छक्के लगाकर मैच का रुख ही पलट दिया।

शिवम ने मैच के बाद कहा, "मुझे पता था कि आज मेरा दिन है। मुझे बस अंत तक टिके रहने और अपनी ताकत वापस पाने की जरूरत थी। और मैंने वही किया।"

आंकड़े बोलते हैं: पेस के खिलाफ वार

आंकड़े गवाह हैं कि शिवम दुबे बदल गए हैं। T20 वर्ल्ड कप 2024 तक तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 134 था, जो अब बढ़कर 172 हो गया है। अब वे क्रीज पर जमते नहीं हैं, बल्कि अपने लंबे कद (Long Levers) का फायदा उठाकर गेंद को स्टैंड्स में पहुंचा देते हैं। चाहे गेंद शॉर्ट हो या यॉर्कर, शिवम के पास अब हर गेंद का जवाब है।

मेहनत का फल

शिवम दुबे की कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम अपनी कमियों को स्वीकार करें और उन पर काम करें, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं है। उन्होंने अपनी कमजोरी से भागने के बजाय उसका सामना किया और आज वे भारतीय टीम के प्रमुख 'मैच विनर' हैं।

इस खबर से सीख (Key Takeaways):

  • आत्म-विश्वास (Self Belief): जब पूरी दुनिया शक करे, तब खुद पर भरोसा रखना ही जीत की चाबी है।

  • सुधार की गुंजाइश: कोई भी परफेक्ट नहीं होता, लेकिन लगातार अभ्यास (Practice) से हम बेहतर बन सकते हैं।

  • धैर्य: खराब शुरुआत (6 रन 11 गेंद में) के बाद भी घबराना नहीं चाहिए, अपना समय आने का इंतजार करना चाहिए। 

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