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धीमा ज़हर: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कैसे शरीर को चुपचाप नुकसान पहुँचाता है

क्या आपको लगता है कि गरमागरम फ्रेंच फ्राइज़, क्रंची चिप्स या ठंडी कोल्ड ड्रिंक का कभी-कभार सेवन नुकसान नहीं करता? अगर ऐसा है, तो एक बार फिर सोचने की ज़रूरत है। आज के दौर में तेजी से बढ़ता 

By Lotpot
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क्या आपको लगता है कि गरमागरम फ्रेंच फ्राइज़, क्रंची चिप्स या ठंडी कोल्ड ड्रिंक का कभी-कभार सेवन नुकसान नहीं करता? अगर ऐसा है, तो एक बार फिर सोचने की ज़रूरत है। आज के दौर में तेजी से बढ़ता अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (Ultra-Processed Food) हमारी थाली में स्वाद के साथ-साथ एक ऐसा धीमा ज़हर भी परोस रहा है, जो शरीर को बिना किसी तत्काल चेतावनी के भीतर ही भीतर नुकसान पहुँचाता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड क्या होते हैं

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड वे औद्योगिक उत्पाद होते हैं जिनमें पाँच या उससे अधिक सामग्री शामिल होती हैं। इनमें आमतौर पर कृत्रिम रंग, स्वाद बढ़ाने वाले तत्व, अत्यधिक शर्करा (added sugar), अस्वस्थ वसा (unhealthy fats) और बहुत ज़्यादा नमक होता है। इनका मुख्य उद्देश्य खाने को आकर्षक, अत्यधिक स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रखना होता है, न कि पोषण देना।

वैज्ञानिक चेतावनी. सिर्फ मोटापा ही नहीं

प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल The Lancet और अन्य अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह साफ़ सामने आया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज़्यादा सेवन केवल मोटापा (Obesity) या मधुमेह (Diabetes) तक सीमित खतरा नहीं है। ये खाद्य पदार्थ शरीर के कई ज़रूरी अंगों पर धीरे-धीरे असर डालते हैं।

👉 The Lancet की रिपोर्ट पढ़ें
https://www.thelancet.com

हृदय और रक्तचाप पर सीधा असर

इन खाद्य पदार्थों में मौजूद अत्यधिक नमक और ट्रांस फैट्स ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को तेज़ी से बढ़ाते हैं। इससे हृदय रोग (Heart Disease) और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड धमनियों को सख्त और संकरा कर देते हैं, जिससे हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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आंतों और इम्युनिटी पर अदृश्य चोट

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में फाइबर की भारी कमी होती है, जबकि रासायनिक एडिटिव्स की भरमार रहती है। इसका सीधा असर गट हेल्थ (Gut Health) पर पड़ता है। आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (Good Bacteria) असंतुलित हो जाते हैं, जिससे पाचन समस्याएँ, सूजन और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जन्म ले सकती है।

👉 ICMR और NIN की पोषण संबंधी सलाह
https://www.icmr.gov.in
https://www.nin.res.in

यह सिर्फ व्यक्तिगत आदत नहीं, जन-स्वास्थ्य संकट है

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन अब केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं रह गया है। यह एक जन-स्वास्थ्य संकट (Public Health Crisis) बन चुका है। इसी कारण भारत सरकार और FSSAI जैसे नियामक संस्थान फूड लेबलिंग को सख्त बनाने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

👉 FSSAI की आधिकारिक जानकारी
https://www.fssai.gov.in

समाधान क्या है

समाधान किसी चमत्कारिक डाइट में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे फैसलों में छिपा है। ताज़ा फल-सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दालें और घर का बना खाना ही शरीर को वास्तविक पोषण देता है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को कम करना और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य का रास्ता है।

अंतिम विचार

अगली बार जब आप फ्राइज़, चिप्स या कोल्ड ड्रिंक की ओर हाथ बढ़ाएँ, तो यह ज़रूर सोचें कि आप केवल स्वाद नहीं ले रहे, बल्कि अपने शरीर को एक ऐसा नुकसान पहुँचा रहे हैं जो तुरंत दिखाई नहीं देता। स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ज़रूरी है कि हम सुविधा और स्वाद की इस झूठी चमक से बाहर निकलें और सोच-समझकर भोजन चुनें।

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