निर्मलजीत सिंह सेखों, द रियल हीरो

Nirmaljit Singh Sekhon: सशस्त्र बलों को प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है परमवीर चक्र। भारत के स्वतंत्र होने से लेकर आज तक केवल इक्कीस वीरता पुरस्कार प्रदान की गई जिसमें से चौदह वीरों को मरणोपरांत परमवीर चक्र प्राप्त हुआ। लेकिन, भारतीय वायुसेना को अब तक सिर्फ एक परमवीर चक्र प्राप्त हुआ जो 1971 के युद्ध में फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों को उनके वीरगति प्राप्त होने के पश्चात दिया गया। निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1943 को लुधियाना पंजाब में हुआ था। माता जी का नाम हरबंस कौर और पिता का नाम तरलोक सिंह सेखों था जो एम डब्लयू ओ थे।

निर्मल जीत बचपन से ही देशभक्ति से ओतप्रोत थे। चौबीस वर्ष की आयु में, वे वायुसेना में शामिल हुए और चार जून 1967 में वे भारतीय वायुसेना में बतौर पायलट नियुक्त हुए। 1971 के युद्ध ऑपरेशन के दौरान निर्मल जीत, श्रीनगर के फोलैंड ग्नैट लड़ाकू विमान नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ स्क्वाड्रन के साथ तैनात थे। वे उस इलाके और कड़ाके की ठंड से अंजान थे। चौदह दिसंबर 1971 की एक सुबह पाकिस्तान की छह एयरफोर्स एफ – 86 जेट्स ने श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला बोल दिया। उस वक्त निर्मल जीत, 18 नेट स्क्वाड्रन के साथ सुरक्षा टीम के नेतृत्व संभालते हुए ड्यूटी पर थे।

उनके साथ फ्लाइंग लेफ्टिनेंट घुम्मन भी थे। दुश्मन अपने सेबर जेट विमानों F-86 के साथ आया था। ठंड की सुबह चारों और धुंध थी , तभी उन्हें अलर्ट मिली कि दुश्मन ने आक्रमण कर दिया है। निर्मलजीत सिंह ने अपने ऊपर के अफसरों को संकेत दिया कि वे दुश्मनों को खदेड़ने के लिए उड़ान भरना चाहते है। दस सेकंड तक निर्मल और घुम्मन दोनों ने उत्तर की प्रतीक्षा की, लेकिन उत्तर आने में देरी होने के कारण, दोनों ने बिना किसी ऑर्डर के, उड़ान भरी। पहले घुम्मन के हवाई जहाज ने रनवे छोड़ा फिर निर्मलजीत ने जैसे ही उड़ान भरी, तभी एक बम आकर रनवे पर गिरा। निर्मल जीत दुश्मनों के सेबर जेट का सामना करने लगे। बम गिरने की वजह से ऐअरफील्ड धुआं और धूल से भर गया था।
जिसके कारण ठीक से कुछ दिख नहीं रहा था और एयरफील्ड से, कॉम्बैट एयर पेट्रोल का संपर्क टूट गया।

निर्मलजीत कई दुश्मन एयर क्राफ्ट्स से घिरे थे लेकिन वे निडरता से लड़ते रहे और दुश्मन जहाजों को ध्वस्त कर दिया परन्तु, तभी निर्मल जीत का आखिरी संदेश सुनाई दिया कि उनका अपना एयर क्राफ्ट भी निशाने पर आ चुका है। श्रीनगर एयर फ़ील्ड की रक्षा करते करते वे वीरगति को प्राप्त हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया।

★सुलेना मजुमदार अरोरा