Category "Interesting Facts"

31Jan2023

दुनिया भर के बच्चे, बुजुर्ग और युवाओं की पहली पसंद, लोटपोट के प्यारे कार्टून कैरेक्टर मोटू के समोसा क्रेज के बारे में सबको पता है और मजे की बात यह है कि अब मोटू की देखा देखी दुनिया में बहुत लोगों के दिमाग की बत्ती तब तक नहीं जलती जब तक वे समोसा ना खा ले।  चलिए आज  उसी समोसा के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी लेते हैं। भारतीय स्नैक्स में समोसे की बड़ी डिमांड है, इसलिए सबको लगता है कि समोसा भारतीय डिश है, लेकिन असल में समोसे का इतिहास सेंट्रल एशिया से जुड़ा हुआ है जो दसवीं शताब्दी में हज़ारों मील की यात्रा करके भारत तक पंहुचा था।

इतिहासकारों का कहना है कि फारसी इतिहास में समोसे का जिक्र है। फारसी भाषा में समोसे को संबोसाग कहा जाता है। वैसे देश दुनिया में मोटू के पसंदीदा समोसे के अलग अलग नाम भी है जैसे सौमसा, समूजा, सिंगड़ा,  सिंहगाडा, समसा बोरेगी वगैरह। इतिहास में बताया गया है कि दसवीं सदी में, महमूद गज़नवी के शाही दरबार में जो  नमकीन, सूखे मेवे और कीमा से भरी पेस्ट्री परोसी जाती थी, वही आगे चलकर आलू, मटर, छोले वाले समोसे के रूप में भारतीय स्वाद में घुल मिल गया और इक्कीसवीं शताब्दी तक आते आते अपना रूप, आकार और स्वाद बदलते हुए वो लोटपोट के मोटू वाला समोसा बन गया और रेहड़ी, फुटपाथ के दुकानों से लेकर बड़े बड़े होटल्स में परोसा जाने लगा।

कहते हैं कि समोसा अरबी लोगों का सबसे फेवरेट स्नैक्स रहा है जिसे प्याज, गोश्त या पनीर भरकर बनाया जाता था। कहा यह भी जाता है कि पाकिस्तान के समोसे भी बहुत टेस्टी होते है।  दिलचस्प बात यह है कि हर सौ किलोमीटर पर समोसे के अंदर का मसाला और ऊपर की परत बदल जाती है जिससे टेस्ट भी अलग अलग हो जाता है। कहीं समोसे की ऊपरी परत पतली होती है तो कहीं मोटी होती है। कराची के समोसे की ऊपरी परत पतली होती है जिससे उसे काग़ज़ी समोसा कहा जाता है।

दसवीं शताब्दी में, मध्य पूर्व देशों के लोग जब कई कई दिनों तक यात्रा करते थे तो अपने साथ भोजन के रूप में इसी समोसे में गोश्त, प्याज भरकर आग में सेंक कर ले जाते थे। आज के समोसे मांसाहारी और शाकाहारी दोनों तरह से बनते है और धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी, पुदीने हरि मिर्च की चटनी, सौस, इमली की चटनी के साथ  खाया जाता है। अब तो समोसा को तलने के साथ साथ बेक करके भी बनाया जाता है। आज की तारीख में समोसे ने विदेशों में भी अपनी धाक जमा ली है।

जिस देश में सदियों तक चाय के साथ बिस्किट और   ग्रेनोला खाया जाता था, वहाँ आज युवाओं द्वारा चाय के साथ जमकर गर्मागरम समोसा, चटनी खाई जा रही है। लगता है दुनिया की फेवरेट कार्टून कैरेक्टर मोटू पतलू की जोड़ी ने समोसे की लत दुनिया को लगा दी है।

★सुलेना मजुमदार अरोरा★

24Jan2023

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस, भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जिसे बहुत धूमधाम से हर साल हमारे देश में मनाया जाता है। स्कूल हो या शिक्षा संस्थान, हाउसिंग सोसाइटी हो या सरकारी /प्राइवेट दफ्तर, हर जगह एक उत्सव का आयोजन होता है और पूरे आन बान और शान से तिरंगा फहराया जाता है तथा इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक राजपथ पर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना के विभिन्न रेजिडेंट हिस्सा लेते हुए भव्य परेड करते हैं। कई प्रकार के प्रोग्राम्स का प्रदर्शन होता है। वर्ष 1950 को, इसी दिन भारत सरकार अधिनियम ऐक्ट 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था।

क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था? लेकिन फिर छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में क्यों मनाया जाने लगा? दरअसल पंद्रह अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली थी और संविधान 26 नवंबर 1949 में पूरी तरह तैयार हो चुका था लेकिन इसे लागू किया गया  दो महीने के बाद, यानी 26 जनवरी 1950 को। संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी के दिन को ही इसलिए चुना गया था क्योंकि वर्ष 1930 में  26 जनवरी के दिन, देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संचालन में इंडियन नेशनल कौंग्रेस ने अँग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध ‘पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की थी। इसलिए छब्बीस जनवरी को भारत गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इतिहास के पन्ने पलटने से हमें मालूम पड़ता है कि 31 दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र में, पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में एक बैठक रखा गया था। इसी बैठक में शामिल सदस्यों ने 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने और देश का झंडा फहराने की शपथ ली ताकि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त कर सकें।
इस तरह अंग्रेज़ों की गुलामी से भले ही भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया था लेकिन जब दो साल, ग्यारह महिने और सत्रह/अट्ठारह दिनों में भारत का संविधान तैयार हुआ तब जाकर सही मायने में 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने उस दिन देश भर में गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की और पहली बार सेना की सलामी ली थी। यह भी जानना जरूरी है कि बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने बाइस समितियों के साथ, लगभग दो साल ग्यारह महीने और अठारह दिनों में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया था।

★सुलेना मजुमदार अरोरा★

16Jan2023

कहते है जहाँ चाह है वहां राह है। इसी चाह ने प्रफुल्ल बिल्लोरे को कामयाबी की मंजिल दिलाई। ‘एम बी ए चाय वाला’ के मालिक प्रफुल्ल बिल्लोरे ने बचपन से ही कुछ बनने का सपना देखा था और आखिर अपनी मेहनत, हिम्मत और बुद्धि से उन्होंने वो कर दिखाया

4Jan2023

अक्सर हम सड़क के किनारे, रेल्वे स्टेशन, पार्क, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च के आसपास गरीब लोगों और बच्चों को भीख मांगते देखते हैं। हम दान धर्म या दया भाव से उन्हें पैसे भी दे देते हैं। लेकिन क्या हमें बार बार इन गरीबों को पैसों की भीख देनी चाहिए। या पैसों के बदले उन्हें और उनके परिवार को कुछ खाने के लिए देना चाहिए? इस सवाल पर अलग अलग लोगों के अलग अलग विचार है। कुछ दानवीरों का कहना है कि गरीबों को पैसे की बहुत जरूरत होती है, दान में मिले पैसों से वे जरूरी सामान खरीद सकते है जैसे कपड़े, चादर, कंबल, दवा वगैरह।

2Jan2023

हर इंसान के जीवन में उनकी माँ उनकी सबसे प्रथम गुरु होती है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की माताजी, हीराबा भी मोदी जी की सर्वप्रथम गुरु रहीं । उन्होंने ही अपने बेटे श्री नरेंद्र मोदी जी को सादा जीवन जीने और कोई गलत काम ना करने की सीख दी थी। वे हमेशा एक ही मंत्र उनके कानों में डालती थी, , “काम करो बुद्धी से, जीवन जियो शुद्धि से।” प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपनी माता जी को प्रेरणा की मूर्ति बताते हुए कहा, ” मां से मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है।”

30Dec2022

ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार दुनिया भर में प्रथम जनवरी को नया वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है। लगभग सभी देश इसी कैलेंडर का अनुसरण करते हैं और क्रिसमस के बाद से ही न्यू ईयर की तैयारियां शुरू कर देते हैं। 31 दिसंबर को पूरी दुनिया के तमाम देशों के लोग जगह जगह ईयर एंडिंग पार्टी आयोजित करते हुए रात भर जश्न मनाते हैं

29Dec2022

जब हम हवाई जहाज की यात्रा करते हैं तो वहाँ हमारी सुविधा और मदद के लिए कई लोग तैनात रहते हैं जिन्हें हम फ्लाइट अटेंडेंट, केबिन क्रू या फिर एयर होस्ट अथवा एयर होस्टेस कहते हैं। इनका मुख्य कर्तव्य होता है यात्रियों की देखभाल करना, उन्हें जरूरी सामान और मदद देना और उनकी सुरक्षा तथा आराम का ख्याल रखते हुए उनकी जरुरतों को पूरा करना। इसके अलावा यात्रियों को हवाई जहाज के नियमों और सावधानियों के बारे में भी जानकारी देना उनकी ड्यूटी में शामिल है। आपने देखा होगा कि इन क्रू के सदस्यों के पास हर वक्त एक मध्यम आकार का बैग रहता है।

28Dec2022

भारत में एक से बढ़ कर एक वीरों ने जन्म लिया . हमारे देश भारत कुर्बानियों और शहादत के लिए भी जाना जाता है और यहां तक के हमारे देश के गुरुओं ने भी देश कौम के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी है. देश और धर्म के लिए अपनी शहादत देने के लिए सिख धर्म के गुरुओं ने ही नहीं बल्कि उनके बच्चों ने भी देश और कौम की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी. सिख के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादों की शहादत को कौन भुला सकता है. जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए शहादत दी.

23Dec2022

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान राम जी का अवतार माना जाता हैं। जब भी श्रीकृष्ण जी का चित्रण किया जाता है तो उनके सर पर एक सुन्दर सा मोर का पंख सजा हुआ दिखता है। क्यों होता है भगवान कृष्ण के सर पर मोर मुकुट? इस रहस्य के पीछे कई सारी कहानियां है। जब भगवान राम जी अपने चौदह वर्ष का वनवास काटने के लिए जंगल की तरफ बढ़ रहे थे तो साथ चल रही उनकी पत्नी माता सीता को प्यास लगी।

राम जी ने जंगल में पीने लायक जलाशय ढूँढा लेकिन उन्हें कोई जल कुंड नहीं मिला। तब उन्होंने वन देवता से प्रार्थना की कि उन्हें कोई राह दिखाए। वहीं पेड़ पर बैठे एक मोर ने राम जी की प्रार्थना सुन ली, वो राम जी के पास आकर बोला “प्रभु राम जी, मैं आपको एक जलाशय तक ले जाता हूँ, जंगल घना है, आप राह ना भटक जाएं इसलिए मैं उड़ते हुए अपना एक एक पंख रास्ते में गिराता जाऊँगा, आप गिरे हुए पंखों का अनुगमन करके जलाशय तक पहुंच जाएंगे।” राम जी ने वैसा ही किया और उन्हें जल कुंड मिल गया। लेकिन मोर के सारे पंख झड़ जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

मरने से पहले मोर ने द्रवित राम जी से कहा कि उसे मरने का कोई दुख नहीं है क्योंकि जो दुनिया का तारण हार है, उसकी प्यास बुझा कर वो धन्य हो गया।” यह सुनकर राम जी ने भी मोर से कहा,” तुमने जो मेरे लिए किया, उसका रिण चुकाने के लिए मैं अगले जन्म में हर समय अपने सर पर मोर पंख धारण करूंगा।” और अगले जन्म में जब राम जी ने श्रीकृष्ण अवतार लिया तो हमेशा मोर के पंख अपने मुकुट में सजाये रखा। एक और कहानी के अनुसार बचपन से ही श्रीकृष्ण लल्ला के सर पर माता यशोदा मोर का पंख सजाती थीं, और बड़े होने पर भी श्रीकृष्ण मोर का पंख सर पर धारण करते रहें।

एक और कथा के अनुसार, मोर के पंख में सभी रंग समाहित होती है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन भी हर रंग में रंगा रहा, सुख दुख के अलावा और भी बहुत भाव थे उनके जीवन में रहे इसलिए वे हर रंग का प्रतीक मोर के पंख माथे पर सजाते हैं। । एक अन्य कहानी के अनुसार मोर और मोरनी का प्रेम सबसे पवित्र माना जाता है, और श्रीकृष्ण भी प्रेम की पवित्रता पर विश्वास रखते हैं, इसलिए वे प्रेम के प्रतीक मोर पंख को अपने मुकुट में लगाते रहें । एक अन्य कहानी के अनुसार, एक बार श्री कृष्ण और राधा जी नृत्य कर रहे थे। उनके साथ एक मोर भी नाचने लगा, नृत्य करते हुए मोर का एक पंख गिर गया तो श्रीकृष्ण ने उसे राधा जी के प्रेम का प्रतीक मानकर उठा लिया और सर पर धारण कर लिया। **
★सुलेना मजुमदार अरोरा★

22Dec2022

चेन्नई के समुद्र किनारे अब्दुल नाम का एक युवक हमेशा घूमने आता था। वह विज्ञान का छात्र था, इसलिए उसने हर चीज को तार्किक, व्यावहारिक और प्रयोगात्मक रूप से लिया। काफी समय से उसने एक आदमी को धोती और शॉल पहने, समुद्र के किनारे बैठे भगवद गीता का पाठ करते देखा। एक दिन जिज्ञासावश अब्दुल उसके पास जाकर खड़ा हो गया।

जब उस सज्जन ने भागवत पाठ समाप्त किया, तो अब्दुल ने उनसे पूछा, “आप एक आधुनिक और शिक्षित व्यक्ति प्रतीत होते हैं, लेकिन आज के वैज्ञानिक युग में, आप अभी भी ऐसी किताबें पढ़ते हैं?” .सज्जन ने मुड़कर अब्दुल की तरफ देखा, लेकिन अब्दुल ने अपनी बात जारी रखी और कहा, “देखिए , हम चाँद पर पहुँच गए हैं, विज्ञान ने कितनी प्रगति की है और आप अभी भी गीता, रामायण में अटके है? “

यह सुनकर सज्जन ने बड़ी गंभीरता से अब्दुल से पूछा, “तुम गीता के बारे में कितना जानते हो?” इस सवाल को इग्नोर करते हुए अब्दुल ने आगे कहा, “इन किताबों को पढ़कर क्या मिलेगा? मैं यह सब इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं एक विज्ञान स्नातक हूँ और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र नामक विश्व प्रसिद्ध विज्ञान संस्थान में कैरियर बनाने आया हूँ।”

यह सुनकर सज्जन धीरे से हँसे लेकिन कुछ नहीं बोले। इसी बीच उनकी कार आ गई, जिसमें से कई कमांडो उतरे और सज्जन को सैल्यूट कर के कार का दरवाजा खोलकर एक तरफ खड़े हो गए। सज्जन कार में बैठे  मुस्कुरा रहे थे। जैसे ही कार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी, अब्दुल को सज्जन की मुस्कान में छुपा हुआ कुछ रहस्य महसूस हुआ।

वह हैरान था कि वह आदमी कौन है और इतने कमांडो उन्हें लेने रोज क्यों आते हैं। अब्दुल अपने को रोक नहीं पाया, वह तेजी से दौड़ा और कार की खिड़की के पास पंहुच के सज्जन से पूछा, “सर, क्या मैं जान सकता हूं, आप कौन हैं?” उस व्यक्ति ने शांत स्वर में उत्तर दिया, “मैं विक्रम साराभाई, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र का अध्यक्ष हूँ।” अब्दुल अवाक खड़ा रह गया और कार चली गई।

क्या आप जानते हैं वह युवा लड़का अब्दुल कौन था? वह बाद में भारत के 11वें राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम बने। उस घटना के बाद अब्दुल कलाम ने भगवत गीता, रामायण, महाभारत और कई अन्य पुस्तकें पढ़ीं। गीता पढ़कर उन्होंने मांस-मछली खाना छोड़ दिया और शाकाहारी बन गए। बाद में उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा, “गीता एक विज्ञान है..गीता, महाभारत, रामायण, भारत की अपनी सांस्कृतिक विरासत की गौरवशाली खोज हैं।”

सुलेना मजुमदार अरोड़ा