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Jadui Tokri: ईमानदार माधव और जादुई टोकरी का रहस्य

बच्चों के लिए Jadui Tokri की एक प्रेरणादायक कहानी। जानिए कैसे गरीब लकड़हारे माधव ने अपनी ईमानदारी से एक जादुई टोकरी हासिल की और लालची सेठ को सबक सिखाया। Moral Story in Hindi.

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नमस्ते नन्हे दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपके पास कोई ऐसी चीज़ आ जाए जो एक चीज़ को सौ गुना कर दे, तो आप क्या करेंगे? आज की हमारी Jungle Ki Kahani हमें ले जाएगी 'चंदनपुर' के घने जंगलों और एक छोटे से गांव में, जहाँ एक गरीब लेकिन बेहद ईमानदार लकड़हारा रहता था। यह कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है, जबकि लालच इंसान को ले डूबता है। तो चलिए, शुरू करते हैं Jadui Tokri का यह जादुई सफर।

1. चंदनपुर का ईमानदार लकड़हारा

पुराने समय की बात है, विंध्याचल की पहाड़ियों के पास 'चंदनपुर' नाम का एक छोटा सा गांव था। वहां माधव नाम का एक लकड़हारा अपनी पत्नी राधा और दो बच्चों के साथ रहता था। माधव बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी कमाई बहुत कम थी।

वह गांव के सबसे बड़े और सबसे कंजूस जमींदार, सेठ करोड़ीमल के यहां लकड़ी काटने का काम करता था। सेठ करोड़ीमल इतना चालाक था कि वह हर महीने किसी न किसी बहाने से माधव की पगार काट लेता था। कभी कहता कि लकड़ियाँ गीली हैं, तो कभी कहता कि बाज़ार में मंदी है।

एक दिन राधा ने कहा, "अजी सुनते हो, बच्चों के स्कूल की फीस भरनी है और घर में राशन भी खत्म हो रहा है। सेठ जी से कहिए कि इस बार पगार थोड़ी बढ़ा दें।"

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माधव ने लंबी सांस ली और बोला, "कोशिश करूँगा राधा, पर तुम तो सेठ जी का स्वभाव जानती ही हो।"

सेठ की बेईमानी और माधव की निराशा

अगले दिन जब पगार का समय आया, तो सेठ करोड़ीमल ने माधव के हाथ पर केवल कुछ सिक्के रखे। "यह क्या सेठ जी? यह तो तय की गई रकम से भी आधा है!" माधव ने हैरानी से पूछा।

सेठ ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा, "देखो माधव, आजकल जंगल में लकड़ियाँ कम मिल रही हैं और बाज़ार में मांग भी नहीं है। काम करना है तो करो, वरना कहीं और रास्ता देखो।"

माधव और उसके साथी लकड़हारे बहुत दुखी हुए। वे जानते थे कि सेठ झूठ बोल रहा है, लेकिन उनके पास कोई और विकल्प नहीं था। माधव काम की तलाश में पास के एक अनजान जंगल की ओर निकल पड़ा, यह सोचकर कि शायद कहीं और कुछ काम मिल जाए।

रहस्यमयी गुफा और दिव्य जिन्न

काम ढूँढते-ढूँढते शाम हो गई। अचानक मौसम बदला और तेज़ हवाएं चलने लगीं। अपनी जान बचाने के लिए माधव एक गुफा के अंदर छिप गया। वहां उसे एक पुरानी, धूल से ढकी टोकरी दिखाई दी।

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जैसे ही माधव ने उसे साफ करने के लिए हाथ लगाया, गुफा में एक तेज़ रोशनी हुई और एक जिन्न प्रकट हुआ। "कौन हो तुम? और मेरे पूर्वजों की अमानत को क्यों छू रहे हो?" जिन्न ने गरजते हुए पूछा।

माधव डर गया और हाथ जोड़कर बोला, "क्षमा करें प्रभु! मैं तो बस एक गरीब लकड़हारा हूँ। तूफ़ान से बचने के लिए यहाँ आया था।"

जिन्न ने माधव की आँखों में देखा और शांत हो गया। "माधव, मैं तुम्हारे मन की पवित्रता देख सकता हूँ। तुम एक सच्चे और ईमानदार इंसान हो। आज से यह Jadui Tokri तुम्हारी हुई। तुम जो भी चीज़ इसमें डालोगे, वह सौ गुना होकर बाहर आएगी। लेकिन याद रखना, इसमें केवल वही चीज़ डालना जिसकी तुम्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत हो और कभी लालच मत करना।"

जादुई टोकरी का चमत्कार

माधव टोकरी लेकर घर पहुँचा। उसने राधा को पूरी बात बताई। दोनों ने बहुत सोचा कि इसमें क्या डाला जाए। अंत में माधव को याद आया कि उसके पास एक छोटा सा चंदन का टुकड़ा बचा है।

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जैसे ही उन्होंने चंदन का टुकड़ा टोकरी में डाला, पूरी टोकरी कीमती चंदन की लकड़ियों से भर गई! माधव ने उन लकड़ियों को बाज़ार में बेचा और उसे इतने पैसे मिले कि उसने न केवल बच्चों की फीस भरी, बल्कि अपने गरीब लकड़हारे साथियों की भी मदद की।

उसने सेठ करोड़ीमल के यहां काम छोड़ दिया और अपना खुद का लकड़ी का व्यापार शुरू किया। वह बहुत अमीर हो गया, लेकिन उसकी ईमानदारी और सादगी वैसी ही रही।

लालच का कड़वा फल

जब सेठ करोड़ीमल को इस जादुई टोकरी के बारे में पता चला, तो उसके मन में लालच आ गया। वह एक रात चुपके से माधव के घर पहुँचा और टोकरी चुरा ली।

सेठ ने सोचा, "माधव तो बेवकूफ है, उसने लकड़ी डाली। मैं इसमें अपने सोने के सिक्के डालूँगा और दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन जाऊँगा।"

सेठ ने अपने गले की भारी सोने की ज़ंजीर टोकरी में डाल दी। चमत्कार हुआ और टोकरी सोने की ज़ंजीरों से भर गई। सेठ और लालची हो गया। उसने अपनी सारी धन-दौलत उसमें डालनी शुरू की। लेकिन तभी उसे जिन्न की चेतावनी याद नहीं रही। उसने गलती से टोकरी में एक पत्थर डाल दिया।

अचानक टोकरी से आग की लपटें निकलने लगीं और सारी ज़ंजीरें पत्थर में बदल गईं। सेठ का घर जलकर राख हो गया और वह फिर से सड़क पर आ गया। माधव ने बाद में सेठ की मदद की, जिससे सेठ का हृदय परिवर्तन हो गया।

कहानी से सीख (Moral of the Story)

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है:

  1. ईमानदारी का पुरस्कार: माधव की ईमानदारी ने उसे वह जादुई टोकरी दिलाई जिसने उसकी जिंदगी बदल दी।

  2. लालच का अंत: सेठ के लालच ने उसे सब कुछ खोने पर मजबूर कर दिया।

  3. दूसरों की मदद: अमीर बनने के बाद भी माधव ने अपने गरीब साथियों को नहीं भुलाया, यही इंसानियत है।

क्या आप जानते हैं? जिन्न (Jinn) की कहानियां मध्य पूर्वी लोककथाओं (Middle Eastern Folklore) का हिस्सा हैं, जो 'अरेबियन नाइट्स' जैसी किताबों से मशहूर हुईं। भारतीय लोककथाओं में भी इसी तरह के जादुई पात्रों का वर्णन मिलता है जो नेक लोगों की मदद करते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप Wikipedia देख सकते हैं।

लेखक की कलम से: बच्चों, याद रखना कि मेहनत का फल थोड़ा देर से मिल सकता है, लेकिन वह हमेशा टिकाऊ और सुखद होता है।

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