बाल कहानी : चित्रकार की बेटियाँ

Hindi Kids Story  चित्रकार की बेटियाँ – एक चित्रकार था जिसकी दो बेटियाँ थीं। उसकी एक बेटी बहुत सुंदर और दूसरी बेटी बदसूरत थी। चित्रकार को अपनी सुंदर बेटी को देखकर बहुत खुशी होती थी और वह उसी को देखकर अपनी चित्रकारी करता था।

वहीं बदसूरत लड़की को कोई प्यार नहीं मिलता था और वह अकेले कमरे में रोती रहती थी।

जब उस चित्रकार की पत्नी अपने पति द्वारा बनाई गई चित्रकारी को देखने आई तो उसे अपनी बदसूरत बेटी के लिए बहुत दुख हुआ। वह कमरे के अंदर गई और उसने अपनी बेटी को धीरज दिया और उसके गाल से एक आँसू उठाकर बाहर बगीचे में रख दिया। समय के साथ साथ सुंदर दिखने वाली लड़की अहंकारी होती गई और वह बस अपनी सुंदरता को ही निहारती रहती थी और उसे कुछ नहीं दिखता था।

अब उसके पिता द्वारा बनाई गई चित्रकारी, जो एक समय पर उसके पिता की ज़रूरत के हिसाब से सुंदर याद होती थी, अब वह अधूरी लगने लगी थी और दूसरी बेटी की असली सुंदरता के आगे मज़ाक लगने लगी थी। उसी दौरान वह एक आँसू जो बगीचे की खाद पर गिरा था, वहां पर एक सुंदर फूल खिल गया था। वह फूल बहुत सुंदर और खुशबू वाला था, वह मुलायम और कोमल था और उसे देखकर बदसूरत बेटी की आत्मा को खुशी मिलती थी।

Hindi Kids Story painter's daughters

इस फूल के रंग इतने सुंदर थे कि चित्रकार ने अपनी चित्रकारी में अपनी सुंदर बेटी की धुन को छोड़ते हुए उस फूल को पेंट करने का मन बनाया। जब सुंदर बेटी ने यह देखा कि चित्रकार ने उसे नकारकर फूल को पेंट करने का मन बनाया है तो वह रोने लगी। उसे दुख हुआ लेकिन साथ ही साथ उसे जलन और गुस्सा आया।

आपको बता दे कि बेशक उसे अपनी सुंदरता के आगे किसी और की सुंदरता नहीं दिखाई देती थी लेकिन वह भी उस फूल की सुंदरता को नकार नहीं सकती थी। एक रात जब सब गहरी नींद में सो रहे थे तो सुंदर दिखने वाली बेटी बगीचे में गई और उसने फूल की पंखुड़ी तोड़ दी और अब बगीचे में सिर्फ एक पतली डंडी खड़ी थी।

उसने सभी पंखुड़ियों को इक्ट्ठा किया और उन्हें जला दिया। अगली सुबह जब बदसूरत दिखने वाली बेटी बाहर बगीचे में फूल को प्यार करने गई तो वहां पर फूल नहीं था। वह फूल को ना पाकर अपने कमरे की ओर भागी और रोने लगी। इस बार उसका रोना और गहरा और पहले से ज़्यादा दुखी था।

सुंदर लड़की कमरे के अंदर गई और अपनी बहन के पास बैठकर बोली, ‘तुम क्यों रो रही हो? वह फूल बेशक चला गया हो लेकिन उसकी सुंदरता तुम्हारी नहीं थी।’ बदसूरत बेटी रोती रही।

 ‘क्या तुमने सोचा था कि एक दिन तुम उस सुंदर फूल को पहनोगी और मेरी तरह सुंदर दिखोगी? मूर्ख बहन, फूल लगाने से तुम्हारी शक्ल में कोई बदलाव नहीं आता। इसलिए तुम्हारा रोना फिजूल है।’

आखिरकार उस बदसूरत लड़की ने रोना बंद किया और अपनी बहन से कहा, ‘प्यारी बहन, मैं अपने लिए नहीं बल्कि तुम्हारे लिए रो रही थी। मैंने हमेशा तुम्हारी सुंदरता की तारीफ की है। बल्कि मैंने अपने पिता से ज़्यादा तुम्हारी सुंदरता को सराहा है और जब मैंने वह फूल देखा जो मेरे आंसू से बड़ा हुआ तो मुझे पता था कि यह तोहफा अनमोल और सुंदर है और इसका इस्तेमाल हो सकता है।

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मैंने इस कोमल फूल को रोज़ पानी दिया ताकि मेरी बहन यानि की तुम्हारी शादी पर वह एक बड़ा फूल बन जाए और जो तुम अपने गाउन पर लगा सको ताकि तुम्हारी सुंदरता और निखरकर सबके सामने आती।

लेकिन एक घमंडी चोर ने मेरी बहन को देने वाला मेरी तरफ से परफेक्ट तोहफा चुरा लिया। अब तुम्हें पता चला कि मैं क्यों रो रही थी। सुंदर दिखने वाली बहन अपनी बहन के इस प्यार को देखकर हैरान हो गई और उसने कसम खाई कि वह तब तक अपने सुंदर चेहरे को कपड़े से ढककर रखेगी जब तक उसके अंदर उसकी बहन जैसी निस्वार्थ भावना ना आ जाए।

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