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अभिमान का अंत:- भारत के एक घने और हरे-भरे जंगल 'नंदनवन' में जानवरों की एक बड़ी आबादी रहती थी। इस जंगल में 'बादल' नाम का एक बारहसिंगा (Barasingha) रहता था। बादल दिखने में बेहद खूबसूरत था। उसकी त्वचा सुनहरी भूरी थी और उसके सिर पर उगने वाले सींग (Antlers) किसी मुकुट की तरह विशाल और शानदार थे।
बादल को अपनी सुंदरता पर बहुत अभिमान था। वह दिन भर नदी के किनारे खड़ा होकर अपनी परछाई निहारता रहता था। उसे लगता था कि पूरे जंगल में उसके जैसा सुंदर कोई नहीं है। जब भी वह जंगल से गुजरता, तो अपनी गर्दन अकड़ कर चलता, मानो वह जंगल का राजा हो।
अभिमान और शिकायत
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एक दिन बादल नदी पर पानी पीने गया। पानी एकदम साफ और कांच जैसा था। उसने पानी में अपनी परछाई देखी और खुश होकर बोला, "वाह! मेरे ये सींग कितने शानदार हैं। ये किसी राजा के ताज से कम नहीं लगते। भगवान ने मुझे फुर्सत में बनाया है।"
लेकिन तभी उसकी नज़र अपने पैरों पर पड़ी। उसके पैर बहुत ही पतले और सूखे-से थे। उसका चेहरा तुरंत उतर गया। उसने गुस्से में कहा, "छि! कितने बदसूरत हैं मेरे पैर। भगवान ने मेरे साथ नाइंसाफी की है। ऊपर इतना सुंदर मुकुट दिया और नीचे ये लकड़ी जैसी पतली टांगें। ये पैर मेरी सुंदरता पर धब्बा हैं। काश! मेरे पैर भी मेरे सींगों जैसे मोटे और रोबदार होते।"
पास ही एक कछुआ बैठा उसकी बातें सुन रहा था। उसने कहा, "बादल भाई, शरीर का हर अंग महत्वपूर्ण होता है। तुम्हें अपने पैरों का अनादर नहीं करना चाहिए। मुसीबत में सुंदरता नहीं, गुण काम आते हैं।" बादल ने अभिमान में भरकर कछुए को डांट दिया, "चुप रहो! तुम जैसे रेंगने वाले जीव को सुंदरता का क्या पता? अपनी सलाह अपने पास रखो।"
मुसीबत की दस्तक
गर्मियों के दिन थे। जंगल में सब कुछ शांत था। बादल एक घनी झाड़ी के पास हरी घास चर रहा था और अपने सींगों की तारीफ सोच रहा था। तभी अचानक, हवा का रुख बदला। बादल के कान खड़े हो गए। उसे सूखी पत्तियों के टूटने की आवाज़ सुनाई दी। उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसके होश उड़ गए।
वहां जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी, 'शेरू' शेर और उसकी टोली खड़ी थी। उनकी नज़र बादल पर थी और वे शिकार के लिए तैयार थे। शेर ने दहाड़ लगाई और बादल की तरफ झपटा।
बादल का अभिमान एक पल में डर में बदल गया। अब उसे अपनी जान बचाने के लिए भागना था। उसने छलांग लगाई और हवा से बातें करने लगा।
बदसूरत पैरों का कमाल
बादल ने दौड़ना शुरू किया। उसके वही 'पतले और बदसूरत' पैर उसे हवा की गति से दौड़ा रहे थे। उन पैरों में गजब की ताकत और फुर्ती थी। शेर पीछे-पीछे दौड़ रहा था, लेकिन बादल के पतले पैर उसे शेर की पकड़ से बहुत दूर ले जा रहे थे। बादल ने सोचा, "वाह! मेरे ये पैर तो कमाल के हैं। आज इन्हीं की वजह से मेरी जान बची है।"
वह खुले मैदान में सरपट दौड़ रहा था और शेर काफी पीछे छूट गया था। उसे लगा कि वह सुरक्षित है। उसने जंगल के घने हिस्से (जहां बहुत सारे पेड़ और लताएं थीं) में घुसने का फैसला किया ताकि वह छिप सके। यह उसकी साहस भरी दौड़ थी, लेकिन आगे एक गलती होने वाली थी।
सुंदर सींगों की सजा
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जैसे ही बादल घने जंगल में घुसा, एक बहुत बड़ी मुसीबत हो गई। वह जिन झाड़ियों के बीच से निकलने की कोशिश कर रहा था, वहां बहुत सारी जंगली लताएं (Vines) और टहनियां थीं। अचानक, उसके 'सुंदर और शानदार' सींग उन उलझी हुई लताओं में बुरी तरह फंस गए!
बादल ने अपना सिर हिलाया, झटका दिया, लेकिन उसके सींग जितने बड़े और घुमावदार थे, वे उतनी ही बुरी तरह फंसते चले गए। उसने रोते हुए कहा, "हे भगवान! ये मैं क्या कर बैठा?" उधर शेर के कदमों की आवाज़ नज़दीक आती जा रही थी। बादल ने पूरी ताकत लगाई। उसके पैर उसे वहां से निकालने के लिए ज़ोर लगा रहे थे, लेकिन उसके सींगों ने उसे जकड़ रखा था।
उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। जिन सींगों पर उसे इतना अभिमान था, आज वही उसकी मौत का कारण बन रहे थे। और जिन पैरों को उसने बदसूरत कहा था, वे अंत तक उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।
अंत और पछतावा
शेर अब बिल्कुल पास आ चुका था। बादल ने आखिरी बार कोशिश की। एक ज़ोरदार झटके के साथ उसने अपनी गर्दन घुमाई। दर्द तो बहुत हुआ, लेकिन सौभाग्य से एक सूखी डाल टूट गई और उसके सींग आज़ाद हो गए।
बिना एक पल गंवाए, बादल वहां से भागा और एक गहरी गुफा में जाकर छिप गया। शेर उसे ढूंढते-ढूंढते थक गया और वापस चला गया।
गुफा में बैठकर बादल ने चैन की सांस ली। उसकी आँखों से पछतावे के आँसू बह रहे थे। उसने मन ही मन कहा, "मुझे माफ कर दो मेरे प्यारे पैरों! मैंने तुम्हारा अपमान किया, जबकि तुम ही मेरे सच्चे साथी हो। और ये सींग, जो सिर्फ दिखावे के लिए हैं, आज मुझे मरवा ही देते।"
निष्कर्ष: नया नज़रिया
उस दिन के बाद से बादल पूरी तरह बदल गया। उसका अभिमान चकनाचूर हो चुका था। अब वह जंगल में अकड़ कर नहीं चलता था और न ही अपने सींगों की तारीफ करता था। वह अब अपने मजबूत पैरों का ख्याल रखता था और हर रोज़ दौड़ने का अभ्यास करता था।
उसने जंगल के बाकी जानवरों से भी माफी मांगी जिनका उसने मज़ाक उड़ाया था। अब वह एक समझदार और विनम्र बारहसिंगा बन गया था।
बच्चों, यह जंगल की कहानी (Jungle Story) हमें बताती है कि जो चीज़ देखने में सुंदर हो, ज़रूरी नहीं कि वह उपयोगी भी हो। और जो चीज़ साधारण दिखे, वह हमारे लिए सबसे कीमती हो सकती है।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
घमंड का सिर नीचा: हमें कभी भी अपने रूप-रंग या किसी खूबी पर घमंड नहीं करना चाहिए।
उपयोगिता ही सुंदरता है: असली सुंदरता काम आने में है, दिखावे में नहीं।
हर चीज़ का महत्व: भगवान ने हमें जो भी दिया है, उसका कोई न कोई उद्देश्य जरूर होता है।
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