/lotpot/media/media_files/2026/01/20/bali-ka-bakra-moral-story-hindi-1-2026-01-20-17-09-16.jpg)
सुंदरपुर गाँव और उसके अनोखे जानवर
प्यारे बच्चों! आपने बड़ों के मुँह से अक्सर यह कहावत सुनी होगी—"अरे भाई! उसे तो बलि का बकरा बना दिया गया।" क्या आप जानते हैं इसका मतलब क्या होता है? इसका मतलब है—गलती कोई और करे और सजा किसी निर्दोष (Innocent) को मिले।
आज लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर हम आपके लिए इसी मुहावरे पर आधारित एक बहुत ही मजेदार कहानी लेकर आए हैं। यह कहानी है सुंदरपुर गाँव की, जहाँ जानवरों के बीच एक अजीब घटना घटी।
सुंदरपुर गाँव बहुत ही हरा-भरा और प्यारा था। वहाँ रामू काका का एक बड़ा सा खेत था। रामू काका के पास कई जानवर थे—एक वफादार कुत्ता 'शेरू', एक शरारती बंदर 'मोंटू' और एक सीधा-सादा बकरा जिसका नाम था—'भोलू'।
भोलू बकरा अपने नाम की तरह ही बहुत भोला था। वह दिन भर चुपचाप हरी-हरी घास चरता और किसी को परेशान नहीं करता था। लेकिन मोंटू बंदर? वह तो शैतानी की दुकान था!
मोंटू की शरारत और मक्खन की चोरी
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/01/20/bali-ka-bakra-moral-story-hindi-12-2026-01-20-17-09-16.jpg)
एक दिन की बात है। रामू काका की पत्नी, काकी ने सुबह-सुबह ताज़ा मक्खन निकाला और उसे एक मिट्टी की हांडी में रखकर रसोई की खिड़की के पास रख दिया। काकी किसी काम से बाहर चली गईं।
मोंटू बंदर पेड़ पर बैठा सब देख रहा था। मक्खन की खुशबू ने उसकी नाक में दम कर दिया। वह धीरे से नीचे उतरा और दबे पाँव रसोई की खिड़की तक पहुँचा। उसने देखा कि वहाँ कोई नहीं है।
मोंटू ने झटपट हांडी में हाथ डाला और मजे से मक्खन खाने लगा। चट! पट! "वाह! क्या स्वाद है!" मोंटू मन ही मन बोला।
खाते-खाते मोंटू से एक गलती हो गई। उसका हाथ हांडी से टकराया और हांडी ज़मीन पर गिरकर टूट गई। छपाक!
मक्खन ज़मीन पर फैल गया। मोंटू घबरा गया। उसे पता था कि अगर रामू काका ने उसे देख लिया, तो उसकी खैर नहीं। उसने इधर-उधर देखा। तभी उसकी नज़र आंगन में सो रहे भोलू बकरे पर पड़ी।
मोंटू के दिमाग में एक खुरापाती आईडिया आया। उसने सोचा, "क्यों न इस भोलू को बलि का बकरा बना दिया जाए?"
भोलू बना 'बलि का बकरा'
मोंटू ने अपनी उंगलियों में लगा थोड़ा सा मक्खन लिया और चुपके से जाकर सोए हुए भोलू के मुँह और दाढ़ी पर लगा दिया। भोलू गहरी नींद में था, उसे कुछ पता ही नहीं चला। इसके बाद मोंटू ने मक्खन से सने अपने हाथ भोलू के पास पड़ी घास पर पोंछ दिए और खुद पेड़ पर जाकर ऐसे बैठ गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
थोड़ी देर बाद रामू काका घर आए। उन्होंने देखा कि रसोई में हांडी टूटी पड़ी है और मक्खन फैला हुआ है। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। "यह किसने किया?" काका चिल्लाए।
वे डंडा लेकर बाहर आए। उनकी नज़र आंगन में खड़े भोलू बकरे पर पड़ी। भोलू अभी-अभी सोकर उठा था। उसके मुँह और दाढ़ी पर मक्खन लगा हुआ था।
रामू काका ने सोचा, "अच्छा! तो यह तू है! तूने मेरा सारा मक्खन खा लिया और हांडी भी तोड़ दी?" बेचारे भोलू को समझ ही नहीं आ रहा था कि काका क्यों नाराज हैं। वह तो अपनी ही धुन में "मैं... मैं..." कर रहा था।
काका ने कहा, "आज तुझे छोडूंगा नहीं! तूने मेरा नुकसान किया है, आज तुझे खूंटे से ऐसा बांधूँगा कि तू हिल भी नहीं पाएगा। आज तुझे बलि का बकरा बनना ही पड़ेगा।"
शेरू ने देखा सच
पेड़ पर बैठा मोंटू बंदर खी-खी करके हँस रहा था। वह खुश था कि उसकी बला टल गई। लेकिन वह यह भूल गया था कि कोई और भी है जो सब कुछ देख रहा था।
वह था—रामू काका का वफादार कुत्ता, शेरू।
शेरू अपनी कोठरी में लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आँखें खुली थीं। उसने मोंटू को मक्खन चुराते, हांडी तोड़ते और फिर भोलू के मुँह पर मक्खन लगाते हुए देख लिया था। शेरू को भोलू पर बहुत दया आई। वह जानता था कि भोलू निर्दोष है।
शेरू ने सोचा, "नहीं, मैं अपने दोस्त भोलू को सजा नहीं मिलने दूंगा। मुझे काका को सच बताना होगा।"
लेकिन शेरू बोल तो सकता नहीं था। तो वह सच कैसे बताता? शेरू ने अपना जासूसी दिमाग लगाया।
सच का पर्दाफाश
रामू काका भोलू को रस्सी से बांधने ही जा रहे थे कि तभी शेरू ने जोर-जोर से भौंकना शुरू कर दिया। "भौ-भौ! भौ-भौ!"
शेरू दौड़कर रामू काका की धोती पकड़कर खींचने लगा। काका ने उसे हटाने की कोशिश की, "अरे हट शेरू! मुझे इस चोर बकरे को सजा देने दे।" लेकिन शेरू नहीं माना। वह बार-बार काका को रसोई की खिड़की के बाहर ले जाने की कोशिश कर रहा था।
काका को लगा कि शायद कोई बात है। वे शेरू के पीछे-पीछे गए। शेरू उन्हें खिड़की के ठीक नीचे ले गया। वहाँ गीली मिट्टी थी। मिट्टी पर बंदर के पंजों के ताजे निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
काका ने गौर से देखा। "अरे! ये तो पंजों के निशान हैं। और ये निशान खिड़की से पेड़ की तरफ जा रहे हैं।" फिर काका ने भोलू की तरफ देखा। भोलू के खुर (Hooves) अलग होते हैं और पंजों के निशान अलग।
शेरू फिर पेड़ की तरफ दौड़कर गया और ऊपर देखकर भौंकने लगा। काका ने ऊपर देखा तो पाया कि मोंटू बंदर अभी भी मजे से अपने हाथ चाट रहा था और उसके होठों पर मक्खन लगा था।
काका को समझ आई चाल
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/01/20/bali-ka-bakra-moral-story-hindi-2-2026-01-20-17-09-16.jpg)
रामू काका अब माजरा समझ गए। उन्होंने अपना माथा ठोक लिया। "ओह! तो असली चोर यह मोंटू है! इसने मक्खन खाया और बेचारे भोलू के मुँह पर लगा दिया ताकि मैं उसे सजा दूँ। इसे कहते हैं किसी को बलि का बकरा बनाना।"
काका को भोलू पर बहुत प्यार आया। उन्होंने भोलू के मुँह से मक्खन पोंछा और उसे ताजी हरी घास खाने को दी। उन्होंने शेरू की पीठ थपथपाई, "शाबाश शेरू! अगर तुम न होते, तो आज मैं एक निर्दोष को सजा दे देता।"
फिर काका ने एक गुलेल उठाई और पेड़ की तरफ निशाना साधते हुए बोले, "मोंटू के बच्चे! नीचे आ, आज तुझे बताता हूँ!" मोंटू ने जैसे ही गुलेल देखी, वह डर के मारे जंगल की तरफ भाग गया और कई दिनों तक वापस नहीं आया।
कहानी की सीख
प्यारे बच्चों, इस कहानी से हमें जीवन की बहुत बड़ी सीख मिलती है:
बिना परखे निर्णय न लें: कभी भी आंखों देखी बात पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। जैसे रामू काका ने पहले भोलू को दोषी मान लिया था, लेकिन सच कुछ और था।
दूसरों पर इल्जाम न लगाएं: अपनी गलती छिपाने के लिए किसी निर्दोष को 'बलि का बकरा' बनाना बहुत बुरी बात है। मोंटू ने चालाकी की, लेकिन अंत में उसकी पोल खुल गई।
सच की हमेशा जीत होती है: चाहे झूठ कितना भी ताकतवर क्यों न हो, सच सामने आ ही जाता है, जैसे शेरू ने सच सामने ला दिया।
तो बच्चों, याद रखना—जीवन में कभी किसी को बलि का बकरा मत बनाना और हमेशा सच का साथ देना!
विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)
'बलि का बकरा' (Scapegoat) की अवधारणा और इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें:
लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम
Tags: Moral Stories, Idioms, Kids Story, Humor, Truth, Hindi Muhavare Ki Kahani, Moral Stories for Kids, Goat Story in Hindi, Animal Stories, Sach Ki Jeet, Kids Education, : Ant moral story in Hindi | bachon ki hindi moral story | bachon ki moral story | clever animal moral story | educational moral story | Hindi Moral Stories | hindi moral stories for kids | Hindi Moral Story | Hindi moral story for kids | hindi moral story for kids and adults | jungle children's story in Hindimoral story for kids in Hindi | Kids Hindi Moral Stories | kids hindi moral story | Kids Moral Stories | kids moral stories in hindi | Kids Moral Story | kids moral story in hindi | Lotpot Moral Stories | Moral Stories by Lotpot | Moral Stories for Kids in Hindi | Moral Story | moral story for children | moral story for kids | Moral Story Hindi | moral story in hindi
और पढ़ें :-
मोंटी का स्कूल: नीलगीरी जंगल की सबसे अनोखी और समझदार पाठशाला (Jungle Story)
प्रयास करना ना छोड़ें: चिकी गिलहरी और वो लाल रसीला फल (Motivational Story)
खरगोश की चालाकी: जब नन्हे बंटी ने खूंखार भेड़िये को सिखाया सबक
