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बाज का अभिमान | जंगल की कहानी

क्या ताकत ही सब कुछ है? जानिए जंगल के सबसे तेज बाज 'वायु' की कहानी, जिसका अभिमान एक साधारण कौवे ने अपनी सूझबूझ से तोड़ दिया। Jungle Stories | Moral Stories

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बाज का अभिमान :- भारत के उत्तर में स्थित 'नीलगगन' नाम के एक विशाल जंगल में पक्षियों का राज था। वहां तरह-तरह के पक्षी रहते थे, लेकिन उन सबमें सबसे ताकतवर और तेज था - 'वायु' नाम का एक बाज (Hawk)। वायु के पंख बहुत विशाल थे और उसकी नज़र बहुत तेज थी।

बाज (Hawk) शिकार करने में माहिर होते हैं, और वायु को अपनी इस काबिलियत पर बहुत घमंड था। वह अक्सर आसमान में ऊंची उड़ान भरता और नीचे उड़ने वाले छोटे पक्षियों का मज़ाक उड़ाता। वह कहता, "देखो! मैं बादलों को छू सकता हूँ, और तुम सब ज़मीन के कीड़े हो। मेरे जैसी रफ़्तार और ताकत किसी के पास नहीं है।"

उसका यह बाज का अभिमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। जंगल के बाकी पक्षी उससे परेशान थे, लेकिन डर के मारे कोई कुछ नहीं कहता था।

कौवे से सामना और चुनौती

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एक दिन वायु बाज एक सूखे पेड़ की डाल पर बैठा अपनी चोंच पैनी कर रहा था। तभी वहां 'कालू' नाम का एक काला कौवा आ बैठा। कालू बहुत ही शांत और समझदार पक्षी था। वायु ने कालू को हिकारत (Disgust) से देखा और बोला, "अरे ओ काले कलूटे! मेरे पास क्यों बैठे हो? मेरी बराबरी करने की कोशिश मत करो। तुम तो बस दूसरों का छोड़ा हुआ खाना खाते हो।"

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कालू ने शांति से जवाब दिया, "वायु भाई, हम सब अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। रंग-रूप और ताकत से बड़ा 'समय' और 'बुद्धि' होती है।" यह सुनकर वायु को गुस्सा आ गया। उसने कहा, "अच्छा? तुम मुझे ज्ञान दे रहे हो? अगर तुम इतने ही समझदार हो, तो चलो एक मुकाबला हो जाए। हम दोनों उस सामने वाले 'काला पहाड़' की चोटी तक रेस लगाएंगे। जो पहले पहुँचेगा, वही विजेता होगा।"

कालू जानता था कि रफ़्तार में वह बाज से कभी नहीं जीत सकता। लेकिन उसने आसमान की तरफ देखा। काले बादल घिर रहे थे और हवा का रुख बदल रहा था। कालू ने अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल किया और चुनौती स्वीकार कर ली। उसने कहा, "ठीक है वायु भाई, लेकिन एक शर्त है। हम दोनों अपने मुंह में एक-एक सूखी टहनी (Twig) लेकर उड़ेंगे।"

दौड़ की शुरुआत और मौसम का मिजाज

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रेस शुरू हुई। वायु बाज ने बिजली की रफ़्तार से उड़ान भरी। वह सीधा बादलों को चीरते हुए ऊपर की तरफ गया। उसे लगा कि वह कुछ ही पलों में पहाड़ पर पहुँच जाएगा। उसने कालू की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। दूसरी तरफ, कालू कौवा बहुत धीरे और नीचे-नीचे उड़ रहा था। वह पेड़ों की आड़ लेकर आगे बढ़ रहा था।

थोड़ी ही देर में मौसम बिगड़ गया। जंगल में भयानक आंधी (Storm) आ गई। तेज हवाएं चलने लगीं। वायु बाज, जो खुले आसमान में बहुत ऊँचाई पर उड़ रहा था, उसे हवा के तेज़ थपेड़ों का सीधा सामना करना पड़ा। उसके मुंह में दबी टहनी उसे और परेशान कर रही थी। हवा इतनी तेज थी कि वायु को अपने पंख संभालने मुश्किल हो गए। उसका साहस अब डगमगाने लगा था।

अभिमान का टूटना

वायु ने अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन प्रकृति के आगे किसी की नहीं चलती। तेज हवा ने उसे एक दिशा में धकेल दिया। वह पहाड़ की चोटी तक पहुँचने की कोशिश में बुरी तरह थक गया। उसकी आँखों में धूल जा रही थी और पंख भारी हो गए थे। आखिरकार, थक-हारकर उसे एक चट्टान की आड़ में शरण लेनी पड़ी। उसका घमंड हवा में उड़ चुका था।

वहीं दूसरी ओर, कालू कौवा पेड़ों के नीचे-नीचे उड़ रहा था जहाँ हवा का जोर कम था। उसने अपनी सूझबूझ और जंगल की जानकारी का फायदा उठाया। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बिना रुके वह आगे बढ़ता रहा।

जब आंधी थोड़ी कम हुई, तो वायु ने देखा कि कालू कौवा पहले ही 'काला पहाड़' की चोटी पर बैठा है और अपनी टहनी वहां रख चुका है।

समझदारी की जीत

वायु बाज शर्मिंदा होकर पहाड़ की चोटी पर पहुँचा। उसने कालू से नजरें नहीं मिलाईं। कालू ने मुस्कुराते हुए कहा, "वायु भाई, ताकतवर होना अच्छी बात है, लेकिन मौसम और परिस्थिति को समझना उससे भी ज्यादा ज़रूरी है। आपने आंधी से लड़ने की कोशिश की, मैंने उसे समझा और रास्ता बनाया।"

वायु का सिर झुक गया। उसने कहा, "कालू, तुमने सही कहा था। मेरा बाज का अभिमान व्यर्थ था। आज तुमने मुझे हरा दिया, रफ़्तार से नहीं, बल्कि अपनी अकल से।"

उस दिन के बाद से वायु ने कभी किसी पक्षी का मज़ाक नहीं उड़ाया। दोनों अच्छे दोस्त बन गए।

बच्चों, यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी चींटी भी हाथी को परेशान कर सकती है और एक धीमा कौवा भी तेज बाज को हरा सकता है।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. घमंड का परिणाम बुरा होता है: अपनी शक्ति पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।

  2. बुद्धि बल से श्रेष्ठ है: कठिन परिस्थितियों में ताकत से ज्यादा समझदारी काम आती है।

  3. परिस्थिति को समझना: जो समय और माहौल के अनुसार काम करता है, वही जीतता है।

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