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बेईमानी की सज़ा: लालची डॉक्टर मोंटू और राजा का इंसाफ

बेईमानी की सज़ा हमेशा भुगतनी पड़ती है। जानिए कैसे लालची डॉक्टर मोंटू बंदर को जंगल के राजा ने रंगे हाथों पकड़ा। बच्चों के लिए एक शिक्षाप्रद कहानी।

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बेईमानी की सज़ा: भारत के एक बहुत ही खूबसूरत और हरे-भरे जंगल का नाम 'मधुबन' था। मधुबन में सभी जानवर बहुत ही प्यार और शांति से रहा करते थे। इस जंगल के राजा 'भानु शेर' थे, जो अपनी प्रजा का एक पिता की तरह ख्याल रखते थे।

लेकिन एक बार, मधुबन पर एक बहुत बड़ी मुसीबत आ गई। अचानक पूरे जंगल में एक रहस्यमयी बुखार फैल गया। जो भी इस बीमारी की चपेट में आता, वह कई दिनों तक अपने बिस्तर से उठ नहीं पाता था। हाथियों से लेकर नन्ही चींटियों तक, हर कोई परेशान था। जंगल में चारों तरफ बस खांसने और कराहने की आवाज़ें आ रही थीं।

राजा भानु शेर बहुत चिंतित हो गए। उन्होंने तुरंत एक विशाल पत्थर (सिंहासन) पर बैठकर जंगल के सभी स्वस्थ जानवरों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। भानु शेर ने अपनी भारी आवाज़ में कहा, "मेरे प्यारे वनवासियों! यह बीमारी बहुत तेज़ी से फैल रही है। इससे बचने के लिए हमें जंगल में एक अस्पताल (Hospital) खोलना होगा, ताकि बीमारों का सही से इलाज हो सके।"

मोंटू बंदर की पहल और अस्पताल का निर्माण

अस्पताल का नाम सुनते ही एक बूढ़े हाथी ने पूछा, "महाराज! अस्पताल बनाने के लिए पैसे और दवाइयाँ कहाँ से आएंगी? और सबसे बड़ी बात, हमारे पास तो कोई डॉक्टर भी नहीं है।"

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तभी पेड़ की डाल पर बैठा 'मोंटू बंदर' नीचे कूदा। मोंटू पहले शहर में रह चुका था और थोड़ा बहुत डॉक्टरी का काम जानता था। मोंटू ने सीना तानकर कहा, "महाराज! आप चिंता न करें। पास के नगर में मेरे दो दोस्त हैं, जो बहुत अच्छे डॉक्टर हैं। मैं उन्हें यहाँ ले आऊँगा। रही बात पैसों की, तो हम सब मिलकर चंदा इकट्ठा करेंगे।"

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मोंटू की इस बात से सब खुश हो गए। 'सोनू सियार' और 'चिंकी बिल्ली' ने पूरे जंगल से फल, मेवे और सोने के सिक्के इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया। सभी की मेहनत रंग लाई और कुछ ही दिनों में मधुबन के बीचों-बीच 'संजीवनी अस्पताल' बनकर तैयार हो गया। मोंटू बंदर अब 'डॉक्टर मोंटू' बन गया था।

लालच का पिशाच और मोंटू की बेईमानी

शुरुआत के कुछ महीनों तक सब कुछ बहुत अच्छा चला। डॉक्टर मोंटू और उसके साथियों ने दिन-रात मेहनत की। मरीज़ ठीक होने लगे और वे मोंटू को दुआएं देते हुए जाते। मोंटू का पूरे जंगल में बहुत सम्मान होने लगा।

लेकिन कहते हैं न, प्रेरणादायक कहानी में असली मोड़ तब आता है जब इंसान के मन में लालच जन्म लेता है। धीरे-धीरे डॉक्टर मोंटू के मन में पैसों का लालच आ गया।

मधुबन के पास ही एक दूसरा जंगल था - 'कालवन'। कालवन के जानवर बहुत अमीर थे। मोंटू ने सोचा, "मैं यहाँ मधुबन में मुफ्त में दवाइयाँ बाँट रहा हूँ। अगर मैं इन सरकारी दवाइयों को छुपकर कालवन के अमीरों को बेच दूँ, तो मैं जंगल का सबसे अमीर जानवर बन जाऊँगा!"

मोंटू के एक ईमानदार दोस्त 'गोलू भालू' को जब इस बात का पता चला, तो उसने मोंटू को समझाया। "मोंटू, यह गलत है। राजा ने ये दवाइयाँ हमारे जंगल के गरीबों के लिए मंगवाई हैं। लालच मत करो।" लेकिन मोंटू के सिर पर तो लालच का भूत सवार था। उसने गोलू भालू की दोस्ती और सलाह को ठुकरा दिया।

अब मोंटू ने मधुबन के मरीजों को देखना कम कर दिया। वह अक्सर कहता, "दवाइयाँ खत्म हो गई हैं," जबकि वह रात के अंधेरे में वही दवाइयाँ महंगे दामों पर दूसरे जंगल में बेच आता।

चालाक लोमड़ी 'चंपा' की जासूसी

जंगल के जानवरों को जब दवाइयाँ नहीं मिलीं, तो वे शिकायत लेकर राजा भानु शेर के पास पहुँचे। राजा भानु शेर बहुत ही समझदार थे। उन्होंने कहा, "जब तक मैं अपनी आँखों से नहीं देख लेता, मैं किसी को सज़ा नहीं दे सकता।"

राजा ने इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए जंगल की सबसे होशियार जासूस 'चंपा लोमड़ी' को काम सौंपा। चंपा ने भेष बदलकर लगातार दो दिनों तक डॉक्टर मोंटू पर नज़र रखी। जब चंपा को पूरा यकीन हो गया कि मोंटू सच में दवाइयाँ चुरा रहा है, तो उसने राजा के साथ मिलकर उसे रंगे हाथों पकड़ने की एक शानदार योजना बनाई।

राजा का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी

अगले दिन, चंपा लोमड़ी एक अमीर सेठानी का भेष बनाकर डॉक्टर मोंटू के क्लीनिक में पहुँची। उसने अपनी आवाज़ बदलकर कहा, "डॉक्टर मोंटू जी! मैं पास वाले कालवन से आई हूँ। हमारे राजा बहुत बीमार हैं। अगर आप अपनी सारी जीवनरक्षक दवाइयाँ लेकर मेरे साथ अभी चलें और उन्हें ठीक कर दें, तो वे आपको सोने के सिक्कों से मालामाल कर देंगे!"

'मालामाल' शब्द सुनते ही मोंटू की आँखों में लालच की चमक आ गई। उसने बिना कुछ सोचे-समझे अस्पताल का सारा स्टॉक (दवाइयाँ) एक बड़े थैले में भरा और चंपा लोमड़ी के साथ कालवन की ओर निकल पड़ा।

यह पूरी बातचीत राजा भानु शेर छुपकर सुन रहे थे। मोंटू जैसे ही मधुबन की सीमा पार करके कालवन के रास्ते पर पहुँचा, अचानक झाड़ियों के पीछे से एक ज़ोरदार दहाड़ गूँजी! रहाऽऽड़!

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राजा भानु शेर अपने सिपाहियों के साथ वहाँ खड़े थे। शेर को देखकर मोंटू के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसके हाथों से दवाइयों का भारी थैला नीचे गिर पड़ा। चंपा लोमड़ी ने अपना भेष उतार दिया और हँसने लगी। मोंटू डर के मारे थर-थर कांपने लगा। उसकी चोरी और लालच का भेद खुल चुका था। वह राजा के पैरों में गिरकर रोने लगा, "महाराज! मुझे माफ़ कर दीजिए। लालच ने मेरी बुद्धि भ्रष्ट कर दी थी।"

इंसाफ और सीख

राजा भानु शेर की आँखों में गुस्सा था। उन्होंने कड़क आवाज़ में कहा, "मोंटू! तुमने सिर्फ दवाइयाँ नहीं चुराईं, तुमने अपने ही जंगल के जानवरों का विश्वास चुराया है। तुम्हें बेईमानी की सज़ा ज़रूर मिलेगी।"

राजा ने आदेश दिया कि मोंटू की सारी कमाई और सोने के सिक्के ज़ब्त करके अस्पताल के फंड में जमा कर दिए जाएं। इसके बाद, मोंटू को मधुबन जंगल से हमेशा के लिए बाहर निकाल दिया गया।

जंगल के सभी जानवरों ने देखा कि कैसे हिंदी कहानियां सच साबित होती हैं - बेईमानी और लालच का फल हमेशा कड़वा होता है। इसके बाद संजीवनी अस्पताल फिर से अच्छे से चलने लगा और जंगल में खुशहाली लौट आई।

इस जंगल की कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. लालच बुरी बला है: पैसे का लालच इंसान को अंधा कर देता है और उसे गलत रास्ते पर ले जाता है।

  2. ईमानदारी सबसे बड़ी नीति है: बेईमानी से कमाया गया धन कभी नहीं टिकता, अंत में सच्चाई की ही जीत होती है।

  3. विश्वासघात की सज़ा: जो लोग अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हैं, उनका अंत हमेशा अपमानजनक होता है। 

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