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खुरापाती तेंदुआ: जब टिंकू की शरारत उस पर ही भारी पड़ी

पढ़ें 'खुरापाती तेंदुआ' की रोमांचक कहानी। जानें कैसे टिंकू की शरारतों ने उसे ही मुसीबत में डाल दिया। बच्चों के लिए सीख देने वाली सर्वश्रेष्ठ हिंदी कहानी।

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चंपकवन और उसका नटखट निवासी

प्यारे बच्चों! क्या आपकी क्लास में या दोस्तों में कोई ऐसा बच्चा है जो बहुत शरारते करता है? जो दूसरों को डराकर या परेशान करके खुश होता है? अगर हाँ, तो आज की कहानी आपको उसकी याद दिला देगी। और अगर आप खुद शरारती हैं, तो यह कहानी आपको एक बहुत बड़ी सीख देने वाली है।

लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर आज हम आपको ले चलते हैं 'चंपकवन' के घने और खूबसूरत जंगल में। यह जंगल बहुत ही हरा-भरा था। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, कल-कल बहती नदियां और तरह-तरह के फल-फूल इस जंगल की शान थे। यहाँ हाथी, शेर, हिरण, बंदर और खरगोश सब मिलजुल कर रहते थे।

लेकिन, इस शांतिपूर्ण जंगल में एक जानवर ऐसा था जिसने सबकी नाक में दम कर रखा था। वह था—खुरापाती तेंदुआ (The Mischievous Leopard)। उसका नाम था 'टिंकू'।

टिंकू तेंदुआ: जंगल का सबसे बड़ा शैतान

टिंकू अभी जवान था। उसके शरीर पर सुनहरे फर और काले धब्बे (Spots) बहुत सुंदर लगते थे। उसकी चाल इतनी तेज़ थी कि हवा भी उसे छू नहीं पाती थी। लेकिन टिंकू अपनी ताकत और फुर्ती का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को परेशान करने के लिए करता था।

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उसे दूसरों को डराने में बहुत मज़ा आता था। वह दबे पाँव चलता और अचानक किसी भी जानवर के पीछे जाकर ज़ोर से—"गुर्र्र्र्र्र!"—दहाड़ देता।

बेचारे छोटे जानवर डर के मारे उछल पड़ते और टिंकू अपनी हँसी नहीं रोक पाता। वह जंगल में खुरापाती तेंदुआ के नाम से मशहूर हो गया था। कोई भी उसके पास नहीं जाना चाहता था।

शरारतों का सिलसिला

1. भोलू खरगोश और गाजर

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एक दिन की बात है, भोलू खरगोश बड़े मजे से अपनी गाजर खा रहा था। वह अपनी दुनिया में मग्न था। टिंकू ने उसे दूर से देख लिया। उसके दिमाग में एक खुरापात सूझी।

वह रेंगता हुआ झाड़ियों के पीछे पहुँचा। जैसे ही भोलू ने गाजर का एक बड़ा टुकड़ा मुंह में डाला, टिंकू ने झाड़ियों से कूदकर भयानक आवाज़ निकाली। "हुआआआ!"

भोलू इतना डर गया कि गाजर उसके गले में अटकते-अटकते बची। वह सिर पर पैर रखकर भागा। टिंकू पेट पकड़कर हँसने लगा, "हा हा हा! देखो कैसे दुम दबाकर भागा डरपोक कहीं का!"

2. मीकू बंदर की नींद

दोपहर के समय मीकू बंदर पेड़ की डाल पर लटककर सो रहा था। उसकी पूंछ नीचे झूल रही थी। टिंकू ने चुपके से आकर उसकी पूंछ खींची और पेड़ के तने के पीछे छिप गया।

मीकू हड़बड़ा कर जागा और नीचे गिरते-गिरते बचा। उसने इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। जैसे ही वह फिर सोने लगा, टिंकू ने पेड़ को ज़ जोर से हिला दिया। मीकू धड़ाम से नीचे आ गिरा। टिंकू फिर हँसा, "मज़ा आ गया! बंदर की नींद हराम कर दी!"

जंगल की सभा: टिंकू की शिकायत

जंगल के सभी जानवर टिंकू की इन हरकतों से परेशान हो चुके थे। किसी का खाना गिर जाता, तो किसी की नींद खराब हो जाती। तंग आकर सबने जंगल के राजा 'शेर खान' और समझदार 'गजराज हाथी' के पास जाने का फैसला किया।

एक पुरानी गुफा के पास सभा बुलाई गई। भोलू खरगोश ने रोते हुए कहा, "महाराज! उस खुरापाती तेंदुआ ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है। मैं तो अब घर से निकलने में भी डरता हूँ।" मीकू बंदर ने अपनी कमर सहलाते हुए कहा, "गजराज दादा, उसने मुझे पेड़ से गिरा दिया। अगर मेरी हड्डी टूट जाती तो?"

गजराज हाथी ने अपनी सूंड हिलाते हुए गंभीरता से कहा, "यह सच में चिंता की बात है। मज़ाक वहां तक ठीक है जहां तक किसी को चोट न पहुंचे। टिंकू अपनी हदों को पार कर रहा है। उसे सबक सिखाना ही होगा।"

शेर खान ने पूछा, "तो क्या उसे सजा दी जाए?"

लोमड़ी मौसी, जो बहुत चालाक थी, आगे आई और बोली, "नहीं महाराज, सजा से वह और जिद्दी हो जाएगा। हमें उसे ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि उसे खुद अपनी गलती का अहसास हो। मेरे पास एक योजना है..."

लोमड़ी मौसी ने धीरे-धीरे सबके कान में अपनी योजना बताई। सुनते ही सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

टिंकू का सबसे बड़ा प्रैंक (जो उल्टा पड़ गया)

अगले दिन, टिंकू फिर किसी शिकार की तलाश में घूम रहा था। उसने देखा कि जंगल के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा और अजीब सा 'प्राणी' खड़ा है। वह प्राणी पत्तों और लताओं से ढका हुआ था और अजीब-अजीब आवाज़ें निकाल रहा था।

टिंकू ने सोचा, "अरे वाह! यह कौन है? आज तो इसे डराने में बहुत मज़ा आएगा। मैं इसे ऐसा डराऊँगा कि यह जंगल छोड़कर भाग जाएगा।"

टिंकू, जो खुद को खुरापाती तेंदुआ मानता था, दबे पाँव उस अजीब प्राणी की ओर बढ़ा। उसे नहीं पता था कि यह जानवरों की मिली-जुली चाल है।

जैसे ही टिंकू उस प्राणी के एकदम करीब पहुँचा और दहाड़ने के लिए मुँह खोला, तभी एक चमत्कार हुआ!

डर का असली चेहरा

वह अजीब प्राणी अचानक से हिला और उसमें से एक साथ कई डरावनी आवाज़ें आईं। कहीं से ढम-ढम (हाथी के पैर पटकने की आवाज़), कहीं से चीं-चीं और कहीं से शेर की दहाड़

टिंकू हक्का-बक्का रह गया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, ऊपर पेड़ पर बैठे बंदरों ने उस पर पके हुए बेल और सड़े हुए टमाटरों की बारिश शुरू कर दी। धप! धप! पिचक!

टिंकू की आँखों और नाक पर टमाटर लग गए। उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वह घबरा गया। उसे लगा कि जंगल के भूत ने उस पर हमला कर दिया है। वह अपनी जान बचाने के लिए अंधाधुंध भागा।

"बचाओ! बचाओ! कोई मुझे बचाओ!" टिंकू चिल्ला रहा था। जो तेंदुआ दूसरों को डराता था, आज उसकी आवाज़ में खौफ था।

भागते-भागते उसे दिखाई नहीं दिया और वह सामने एक गहरे, कीचड़ भरे गड्ढे में जा गिरा। छपाक!

सबक और माफी

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टिंकू कीचड़ में पूरी तरह सन गया था। वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गड्ढा गहरा था। वह थक कर वहीं बैठ गया और रोने लगा।

तभी झाड़ियों के पीछे से जंगल के सारे जानवर बाहर निकल आए। गजराज हाथी, भोलू खरगोश, मीकू बंदर और लोमड़ी मौसी—सब वहाँ खड़े थे।

गजराज ने अपनी सूंड से पानी भरकर टिंकू के ऊपर फुआरा छोड़ा और उसका चेहरा साफ किया। टिंकू ने शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया। उसे समझ आ गया था कि वह अजीब प्राणी कोई और नहीं, बल्कि उसके दोस्त ही थे।

गजराज ने पूछा, "क्यों टिंकू, कैसा लगा डर?"

टिंकू ने धीमी आवाज़ में कहा, "बहुत बुरा। मुझे माफ़ कर दो। मुझे नहीं पता था कि जब कोई अचानक डराता है या परेशान करता है, तो कितना बुरा लगता है। आज मैं खुद मुसीबत में फँसा, तो मुझे तुम्हारी तकलीफ समझ आई।"

भोलू खरगोश ने कहा, "हम तुम्हें चोट नहीं पहुँचाना चाहते थे, बस तुम्हें यह महसूस कराना चाहते थे कि हँसी-मज़ाक का मतलब दूसरों को रुलाना नहीं होता।"

खुरापाती तेंदुआ बना समझदार दोस्त

उस दिन के बाद से टिंकू बदल गया। उसने कसम खाई कि वह अब कभी किसी को नहीं सताएगा। अब वह अपनी तेज़ रफ़्तार का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करने लगा।

अगर किसी बूढ़े जानवर को पानी चाहिए होता, तो टिंकू दौड़कर लाता। अगर कोई बच्चा रास्ता भटक जाता, तो टिंकू उसे घर छोड़ आता।

अब जंगल के जानवर उसे खुरापाती तेंदुआ नहीं, बल्कि मददगार टिंकू कहने लगे थे। चंपकवन फिर से खुशहाल हो गया था।

निष्कर्ष: कहानी की सीख

प्यारे बच्चों, इस कहानी से हमें बहुत महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:

  1. मज़ाक की हद (Limit of Fun): मज़ाक वही अच्छा होता है जिसमें दोनों पक्ष हँसें। अगर आपके मज़ाक से किसी को दुख हो रहा है या डर लग रहा है, तो वह मज़ाक नहीं, शरारत है।

  2. जैसा करोगे, वैसा भरोगे: टिंकू ने दूसरों को डराया, अंत में वह खुद डरा। हमारे कर्म लौटकर हमारे पास ही आते हैं।

  3. माफी और सुधार: गलती करना बुरी बात नहीं है, लेकिन गलती मानकर उसे सुधार लेना ही असली वीरता है।

तो अगली बार जब आप किसी दोस्त के साथ प्रैंक (Prank) करने की सोचें, तो एक बार टिंकू तेंदुए को जरूर याद कर लें!

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

तेंदुए के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें:

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Tags: Jungle Story in Hindi, Leopard Story for Kids, Hindi Kahaniya, Moral Stories for Children, Funny Animal Story, Sher Aur Tendua Ki Kahani Tags: Jungle Stories, Kids Story, Humor, Life Lessons, Animals

लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम

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