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चालाक बगुला और समझदार मछली | Jungle Story in Hindi

क्या एक चालाक बगुला अपनी मीठी बातों से मासूम मछलियों को अपना शिकार बना पाएगा? पढ़िए एक समझदार मछली की यह कहानी, जिसने अपनी बुद्धि से पूरे तालाब की जान बचाई।

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चालाक बगुला और समझदार मछली : प्रकृति का नियम है कि यहाँ केवल ताकतवर ही नहीं, बल्कि समझदार भी जीवित रहता है। नीलगिरि के जंगलों के बीच एक बहुत ही सुंदर और शांत तालाब था, जिसे 'नील सरोवर' कहा जाता था। वहाँ ढेर सारी मछलियाँ और अन्य जलीय जीव सुख-शांति से रहते थे। लेकिन इस शांति के बीच एक खतरा मंडरा रहा था—'बग्गू' नाम का एक चालाक बगुला। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब कोई अचानक बहुत मीठा बोलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला है।


चालाक बगुला और मीनू मछली की चतुराई (मुख्य कहानी)

बग्गू बगुला अब बूढ़ा हो चला था। अब उसके पैरों में इतनी फुर्ती नहीं थी कि वह तेजी से मछलियों का शिकार कर सके। कई बार उसे पूरा दिन भूखा ही रहना पड़ता था। एक दिन उसने अपनी भूख मिटाने के लिए एक खतरनाक योजना बनाई।

उसने खुद को एक 'साधु' की तरह दिखाना शुरू किया। वह तालाब के किनारे एक पैर पर खड़ा हो गया और अपनी आँखें बंद कर लीं। वह ऐसे अभिनय कर रहा था जैसे वह बहुत बड़ा तपस्वी हो। मछलियाँ हैरान थीं कि जो बगुला कल तक उनका शिकार करता था, आज वह उन्हें देख भी नहीं रहा है।

बग्गू का मायाजाल और मछलियों का डर

कुछ समय बाद, 'मीनू' नाम की एक छोटी लेकिन बहुत ही चंचल और बुद्धिमान मछली ने बग्गू के पास जाकर पूछा, "बगुला जी, आज आप शिकार क्यों नहीं कर रहे? क्या आप बीमार हैं?"

बग्गू ने एक लंबी आह भरी और झूठे आँसू बहाते हुए कहा, "बेटी, अब मैंने शिकार करना छोड़ दिया है। मुझे कल रात एक सपना आया कि इस साल भीषण सूखा पड़ने वाला है। यह तालाब पूरी तरह सूख जाएगा और तुम सब बेमौत मारी जाओगी। मुझे तुम सबकी बहुत चिंता हो रही है।"

यह सुनते ही पूरे तालाब में खलबली मच गई। मछलियाँ डर के मारे इधर-उधर भागने लगीं। बग्गू ने मौके का फायदा उठाते हुए कहा, "घबराओ मत! पास ही पहाड़ी के पीछे एक बहुत बड़ी झील है, जो कभी नहीं सूखती। अगर तुम चाहो, तो मैं रोज एक-एक करके तुम सबको अपनी पीठ पर बिठाकर वहाँ ले जा सकता हूँ।"

विश्वास और धोखा

डरी हुई मछलियाँ बग्गू की बातों में आ गईं। रोज सुबह बग्गू एक मछली को चुनता और उसे लेकर उड़ जाता। लेकिन वह उसे झील नहीं ले जाता था, बल्कि पहाड़ी के पास एक बड़ी चट्टान पर ले जाकर उसे खा जाता था। कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। बग्गू अब मोटा और तंदुरुस्त हो गया था।

मछलियाँ खुश थीं कि उनके साथी सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं, लेकिन मीनू मछली को कुछ अजीब लग रहा था। उसने सोचा, "बगुला जी रोज एक मछली ले जाते हैं, लेकिन आज तक कोई वापस आकर यह क्यों नहीं बताया कि वह झील कैसी है? और बगुला जी अब पहले से ज्यादा खुश और मोटे क्यों दिखने लगे हैं?"

मीनू मछली का तार्किक निरीक्षण

अगले दिन मीनू ने खुद आगे बढ़कर कहा, "बगुला जी, आज मेरी बारी है। मुझे भी उस सुंदर झील में ले चलिए।" बग्गू तो बहुत खुश हुआ, उसने सोचा आज एक ताजी और बड़ी मछली का स्वाद मिलेगा।

जैसे ही बग्गू मीनू को अपनी पीठ पर बिठाकर पहाड़ी के ऊपर पहुँचा, मीनू ने नीचे देखा। वहाँ पानी की कोई झील नहीं थी, बल्कि चारों तरफ मछलियों की हड्डियाँ और कांटे बिखरे पड़े थे। मीनू को सारा सच समझ आ गया। उसने देखा कि बग्गू उसे उसी चट्टान की तरफ ले जा रहा है।

मीनू की समझदारी और बग्गू का अंत

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मीनू ने घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। उसने अपनी पूंछ से बग्गू की गर्दन को कसकर लपेट लिया और चिल्लाई, "धोखेबाज बगुले! तू हमें बचाने नहीं, बल्कि खाने के लिए यहाँ लाता था? देख, नीचे कोई झील नहीं है। अब तू मुझे खाएगा या मैं तेरी गर्दन दबा दूँ?"

बग्गू डर गया, उसका संतुलन बिगड़ने लगा। वह गिड़गिड़ाने लगा, "मुझे छोड़ दो मीनू, मुझसे गलती हो गई।" लेकिन मीनू जानती थी कि अगर उसने बग्गू को छोड़ दिया, तो वह पूरे तालाब को खत्म कर देगा। जैसे ही बग्गू उस चट्टान पर उतरने लगा, मीनू ने जोर से छटपटाकर बग्गू की आँख पर हमला किया। दर्द के मारे बग्गू का संतुलन बिगड़ा और वह पहाड़ी से नीचे गिर गया।

मीनू किसी तरह उड़ते हुए बगुले के पंखों के सहारे पास की एक छोटी जलधारा में गिरी, जो सीधे उसके पुराने तालाब की ओर जाती थी।

मीनू मछली ने तालाब में वापस आकर सबको सच्चाई बताई। सभी मछलियाँ अब समझ गई थीं कि चालाक बगुला किस तरह उनका फायदा उठा रहा था। उस दिन के बाद नील सरोवर की मछलियों ने तय किया कि वे कभी भी किसी अजनबी की बातों में नहीं आएंगी। यह कहानी हमें सिखाती है कि "सावधानी ही सुरक्षा है।"

कहानी से सीख (Moral of the Story)

"मुसीबत के समय घबराने के बजाय अपनी बुद्धि और तर्क का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही, अनजान व्यक्ति की मीठी बातों पर आँख बंद करके भरोसा करना मूर्खता है।"

तथ्य और संदर्भ

बगुले (Herons) वास्तव में बहुत ही धैर्यवान शिकारी होते हैं। वे पानी में घंटों तक स्थिर खड़े रहकर अपने शिकार का इंतजार करते हैं।

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