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चालाक लोमड़ी और होशियार मुर्गा: भारत के घने जंगलों में से एक था 'सुंदरवन'। वहाँ तरह-तरह के जानवर मिल-जुल कर रहते थे। उसी जंगल में एक लोमड़ी (Fox) रहती थी, जिसका नाम था 'चंपा'। चंपा लोमड़ी अपनी बुद्धिमानी के लिए नहीं, बल्कि अपनी चालाकी और धूर्तता के लिए मशहूर थी। वह हमेशा इसी फिराक में रहती थी कि कैसे किसी भोले-भाले जानवर को अपनी मीठी बातों में फंसाकर उसका शिकार किया जाए।
जंगल के छोटे जानवर जैसे खरगोश, चूहे और पक्षी उससे बहुत डरते थे। चालाक लोमड़ी को लगता था कि उससे ज्यादा समझदार इस पूरे जंगल में कोई नहीं है। लेकिन कहते हैं न, 'शेर को सवा शेर मिल ही जाता है'।
भूख और शिकार की तलाश
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एक दिन की बात है, दोपहर का समय था और सूरज सिर पर चढ़ा हुआ था। चंपा लोमड़ी को जोरों की भूख लगी थी। वह सुबह से शिकार की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी, लेकिन उसे एक छोटा चूहा तक नहीं मिला था। उसका पेट भूख के मारे 'गुड़-गुड़' कर रहा था।
वह मन ही मन बड़बड़ाई, "आज लगता है भूखे ही सोना पड़ेगा। सारे जानवर पता नहीं कहाँ छिप गए हैं।" तभी उसकी नज़र एक पुराने बरगद के पेड़ पर पड़ी। उस पेड़ की एक ऊँची डाल पर एक मोटा-ताजा रंग-बिरंगा मुर्गा (Rooster) बैठा था। उस मुर्गे का नाम था 'कुकडू'। कुकडू बहुत ही सतर्क और समझदार पक्षी था।
चंपा के मुंह में पानी आ गया। उसने सोचा, "वाह! क्या शानदार दावत हो सकती है। अगर यह मुर्गा नीचे आ जाए, तो आज के खाने का इंतज़ाम हो जाएगा। लेकिन यह इतनी ऊँचाई पर है, मैं वहाँ चढ़ नहीं सकती। मुझे अपनी अकल का इस्तेमाल करना होगा।"
लोमड़ी की चाल: दोस्ती का नाटक
चंपा ने अपनी सबसे मीठी आवाज़ निकाली और पेड़ के नीचे जाकर बोली, "अरे ओ कुकडू भैया! नमस्ते! आप इतनी ऊँचाई पर क्यों बैठे हैं? नीचे आइए न, थोड़ा गपशप करते हैं।"
कुकडू ने ऊपर से ही नीचे देखा और समझ गया कि चालाक लोमड़ी के इरादे नेक नहीं हैं। उसने जवाब दिया, "नमस्ते चंपा मौसी! मैं यहाँ ऊपर ही ठीक हूँ। नीचे आने पर मुझे डर लगता है कि कहीं कोई जंगली जानवर मुझे खा न जाए।"
चंपा हँसी और बोली, "अरे कुकडू भैया! क्या आपको आज की सबसे बड़ी ताज़ा खबर नहीं मिली? जंगल के राजा शेर खान ने आज सुबह ही एक नया कानून बनाया है।"
कुकडू ने आश्चर्य से पूछा, "कैसा कानून मौसी?"
चंपा ने अपनी चाल चलते हुए कहा, "राजा ने ऐलान किया है कि आज से जंगल के सभी जानवर दोस्त हैं। अब कोई किसी का शिकार नहीं करेगा। शेर, चीता, लोमड़ी और मुर्गे - सब मिल-जुल कर रहेंगे। अब डरने की कोई बात नहीं है। यह 'शांति समझौता' हो गया है। इसलिए तुम बेझिझक नीचे आ जाओ, हम गले मिलेंगे और इस दोस्ती का जश्न मनाएंगे।"
कुकडू की होशियारी
कुकडू मुर्गा समझदार था। उसे पता था कि लोमड़ी जन्मजात शिकारी होती है और वह कभी अपनी फितरत नहीं बदल सकती। उसे हिंदी जंगल की कहानियां (Hindi Jungle Stories) की वे बातें याद थीं जो उसकी माँ ने उसे बचपन में सिखाई थीं - 'अंजन शत्रु पर कभी आँख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।'
कुकडू ने लोमड़ी की चाल को उसी की भाषा में जवाब देने की ठानी। उसने नाटक करते हुए कहा, "वाह मौसी! यह तो बहुत ही खुशी की खबर है। जंगल में शांति हो गई, इससे अच्छी बात क्या हो सकती है?"
इतना कहकर कुकडू ने अपनी गर्दन लंबी की और दूर क्षितिज (Horizon) की तरफ देखने लगा, जैसे उसे कुछ दिखाई दे रहा हो।
चंपा ने उत्सुकता से पूछा, "क्या हुआ कुकडू? तुम उधर इतनी गौर से क्या देख रहे हो?"
शिकारी कुत्तों का डर
कुकडू ने उत्साह से कहा, "अरे मौसी! उधर देखो! मुझे लगता है कि इस नए कानून की खबर सुनकर जंगल के दूसरे दोस्त भी जश्न मनाने आ रहे हैं। दूर से धूल उड़ रही है और मुझे चार-पाँच बड़े-बड़े शिकारी कुत्ते (Hounds) हमारी तरफ तेजी से दौड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।"
'शिकारी कुत्ते' का नाम सुनते ही चंपा लोमड़ी के होश उड़ गए। लोमड़ियों को शिकारी कुत्तों से बहुत डर लगता है क्योंकि वे लोमड़ियों के कट्टर दुश्मन होते हैं। चंपा घबराकर बोली, "क्या? शिकारी कुत्ते? इस तरफ आ रहे हैं?"
कुकडू ने मजे लेते हुए कहा, "हाँ मौसी! वे बहुत तेजी से आ रहे हैं। बस कुछ ही पल में यहाँ पहुँच जाएंगे। आप क्यों घबरा रही हैं? अब तो जंगल में दोस्ती का कानून है न? वे तो आपसे गले मिलने आ रहे होंगे।"
पोल खुली और लोमड़ी भागी
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चंपा ने न आव देखा न ताव, उसने अपनी पूंछ दबाई और जंगल की झाड़ियों की तरफ भागने के लिए तैयार हो गई। कुकडू ने हँसते हुए पुकारा, "अरे मौसी! रुकिए तो सही! आप भाग क्यों रही हैं? क्या आपको शेर राजा के कानून पर भरोसा नहीं है? शिकारी कुत्ते तो अब आपके दोस्त हैं!"
भागते-भागते चंपा ने चिल्लाकर जवाब दिया, "माफ करना कुकडू भाई! मुझे लगता है कि उन कुत्तों ने अभी तक राजा का नया कानून नहीं सुना होगा। मैं अपनी जान जोखिम में नहीं डाल सकती!"
और देखते ही देखते चालाक लोमड़ी हवा हो गई। कुकडू पेड़ की डाल पर बैठा जोर-जोर से हँसने लगा। उसने अपनी सूझबूझ से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि धूर्त लोमड़ी को भी सबक सिखा दिया।
बुद्धि ही बल है
चंपा लोमड़ी भूखे पेट अपनी जान बचाकर भागी और कुकडू मजे से अपने पेड़ पर बैठा रहा। जंगल के अन्य जानवरों ने जब यह किस्सा सुना, तो उन्होंने कुकडू की बहुत तारीफ की। उस दिन के बाद से चंपा ने कभी कुकडू की तरफ देखने की भी हिम्मत नहीं की।
बच्चों, यह कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबत के समय घबराना नहीं चाहिए। सामने वाला चाहे कितना भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, अगर हम ठंडे दिमाग से काम लें, तो हम उसे हरा सकते हैं।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
अंधविश्वास न करें: दुश्मन की मीठी बातों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।
सूझबूझ से काम लें: शारीरिक ताकत से ज्यादा बड़ी मानसिक ताकत (बुद्धि) होती है।
जैसी करनी वैसी भरनी: दूसरों को मूर्ख बनाने वाले अक्सर खुद मूर्ख बन जाते हैं।
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