/lotpot/media/media_files/2026/02/11/char-mitra-aur-ekta-ki-takat-hindi-story-2026-02-11-12-13-39.jpg)
भारत के घने जंगलों में से एक 'सुंदरवन' (Sundarvan) अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता था। वहां एक शांत झील के किनारे चार पक्के दोस्त रहते थे। ये चारों अलग-अलग प्रजाति के थे, लेकिन उनकी दोस्ती की मिसाल पूरा जंगल देता था।
ये चार मित्र थे - गौरी (एक सुनहरी हिरण), कालू (एक समझदार कौवा), मुषक (एक नन्हा चूहा), और मंथरा (एक धीमा लेकिन बुद्धिमान कछुआ)। मित्रता (Friendship) का असली मतलब इन चारों ने ही जंगल को सिखाया था। वे रोज शाम को झील के किनारे मिलते, खाना बांटकर खाते और दिन भर की बातें करते।
मुसीबत की दस्तक
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/02/11/char-mitra-aur-ekta-ki-takat-hindi-story-1-2026-02-11-12-15-05.jpg)
एक सुहावनी सुबह, चारों दोस्त झील के किनारे जमा हुए। कालू कौवा, मुषक चूहा और मंथरा कछुआ तो समय पर आ गए, लेकिन गौरी हिरण नहीं आई। कालू ने चिंतित होकर कहा, "दोस्तों, गौरी कभी देर नहीं करती। जरूर वह किसी मुसीबत में है।" सबने तय किया कि कालू उड़कर पता लगाएगा।
कालू ने आसमान में ऊंची उड़ान भरी। कुछ दूर जाने पर उसने देखा कि गौरी एक शिकारी के मजबूत जाल में फंसी हुई है और उसकी आँखों में आंसू हैं। शिकारी अभी वहां नहीं था, लेकिन कभी भी आ सकता था। कालू तुरंत वापस आया और दोस्तों को सारी बात बताई।
मंथरा कछुए ने कहा, "घबराओ मत! हमारे पास मुषक है। उसके पैने दांत किसी भी जाल को काट सकते हैं।" कालू ने तुरंत मुषक को अपनी पीठ पर बैठाया और गौरी के पास ले गया। मुषक ने अपने तेज दांतों से फटाफट जाल काट दिया। गौरी आज़ाद हो गई!
कछुए की मुसीबत और शिकारी का आना
अभी वे खुश हो ही रहे थे कि मंथरा कछुआ भी धीरे-धीरे वहां पहुंच गया। उसे अपने दोस्तों की चिंता हो रही थी। तभी अचानक, वह शिकारी वहां आ धमका! शिकारी को देखते ही गौरी हिरण बिजली की तेजी से भाग गई। कालू कौवा उड़कर पेड़ पर बैठ गया। और मुषक चूहा एक बिल में घुस गया।
लेकिन बेचारा मंथरा! वह अपनी धीमी चाल के कारण भाग नहीं सका। शिकारी ने देखा कि जाल कटा हुआ है और हिरण गायब है। वह गुस्से से लाल हो गया। तभी उसकी नज़र मंथरा पर पड़ी। उसने सोचा, "चलो, हिरण न सही, आज कछुए से ही काम चलाऊंगा।" शिकारी ने मंथरा को पकड़ा और अपने थैले में डालकर बांध दिया।
दोस्तों की अद्भुत योजना
दोस्तों ने जब देखा कि उनका मित्र मंथरा पकड़ा गया है, तो वे बहुत दुखी हुए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने तुरंत एक चतुर योजना बनाई।
योजना के अनुसार, गौरी हिरण शिकारी के रास्ते में जाकर ऐसे लेट गई जैसे वह मर गई हो। कालू कौवा गौरी के ऊपर बैठ गया और नाटक करने लगा जैसे वह उसे चोंच मार रहा हो (ताकि शिकारी को लगे कि हिरण सचमुच मर चुका है)।
शिकारी अपने घर जा रहा था कि तभी उसने रास्ते में एक 'मरी हुई' हिरण को देखा। उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने सोचा, "वाह! आज तो किस्मत खुल गई। कछुआ तो है ही, अब यह हिरण भी मिल गई।" लालच में आकर उसने कछुए वाला थैला ज़मीन पर रखा और हिरण को उठाने के लिए दौड़ा।
एकता की जीत
/filters:format(webp)/lotpot/media/media_files/2026/02/11/char-mitra-aur-ekta-ki-takat-hindi-story-3-2026-02-11-12-15-20.jpg)
जैसे ही शिकारी हिरण के पास पहुँचा, कालू ने 'कांव-कांव' का इशारा किया। इशारा मिलते ही गौरी हिरण फुर्ती से उठ खड़ी हुई और हवा की गति से जंगल में भाग गई। शिकारी हक्का-बक्का रह गया। वह हिरण के पीछे भागा, लेकिन हिरण तो उसकी पकड़ से बहुत दूर जा चुकी थी।
निराश होकर शिकारी वापस अपने थैले के पास आया। लेकिन यह क्या? जब वह हिरण के पीछे भागा था, उसी समय मुषक चूहे ने थैले को काट दिया था और मंथरा कछुआ वहां से निकलकर झील के पानी में सुरक्षित पहुँच गया था।
शिकारी ने अपना सिर पकड़ लिया। न हिरण मिली, न कछुआ, और थैला भी फट गया। चारों दोस्त - गौरी, कालू, मुषक और मंथरा - झील के दूसरे किनारे पर मिले और अपनी एकता और सूझबूझ पर बहुत खुश हुए।
बच्चों, यह प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story) हमें सिखाती है कि अगर हम मिल-जुल कर रहें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी हरा सकते हैं।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
संगठन में शक्ति है: अकेले हम कमजोर हो सकते हैं, लेकिन साथ मिलकर हम अजेय हैं।
सच्चा मित्र वही जो मुसीबत में काम आए: चारों दोस्तों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक-दूसरे को बचाया।
बुद्धि बल से बड़ी है: दोस्तों ने ताकत से नहीं, बल्कि अपनी अकलमंदी से क्रूर शिकारी को हराया।
और पढ़ें:-
ब्राह्मण और सर्प की कहानी: लालच और अटूट भरोसे का सबक
बलि का बकरा: जब निर्दोष भोलू पर आया इल्जाम
ईमानदार लकड़हारा: सच्चाई की जीत | Moral Story in Hindi for Kids
Tags: Friendship Stories, Panchatantra Tales, Unity is Strength, Hindi Moral Stories, Lotpot Kids
