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यह कहानी चीकू की परीक्षा (Chiku ki Pariksha) के बारे में है। यह केवल एक दौड़ की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे एक छोटा सा जीव अपनी सूझबूझ और धैर्य से उन बाधाओं को पार कर सकता है जिनसे बड़े-बड़े सूरमा घबरा जाते हैं।
जंगल की दुनिया में अक्सर 'ताकत' को ही सब कुछ माना जाता है। शेर की दहाड़ और हाथी की ताकत के सामने छोटे जानवरों को अक्सर कमजोर समझा जाता है। लेकिन आज की कहानी चीकू की परीक्षा इस धारणा को बदल देगी। यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर दिमाग का सही इस्तेमाल किया जाए, तो असंभव दिखने वाले काम भी संभव हो जाते हैं।
कहानी: चीकू और 'फिसलनी पहाड़ी' का रहस्य (The Story)
'नंदनवन' के राजा विक्रम सिंह (शेर) ने एक दिन जंगल में एक अनोखी घोषणा की। उन्होंने कहा, "जंगल में एक विशेष जड़ी-बूटी है जो केवल 'दर्पण पहाड़ी' की चोटी पर उगती है। जो भी जानवर उस पहाड़ी पर चढ़कर वह जड़ी-बूटी लाएगा, उसे जंगल का 'नन्हा रक्षक' घोषित किया जाएगा।"
पहाड़ी का नाम 'दर्पण' इसलिए था क्योंकि वह कांच की तरह चिकनी और सीधी थी। बड़े-बड़े जानवरों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी।
बड़े जानवरों की हार
सबसे पहले 'चीता' आगे आया। उसे अपनी फुर्ती पर गर्व था। वह तेजी से दौड़ा और पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन चिकनी सतह होने के कारण वह बार-बार नीचे फिसल जाता। उसके नुकीले नाखून भी उस पत्थर पर पकड़ नहीं बना पा रहे थे।
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उसके बाद 'नीलगाय' और 'लंगूर' ने कोशिश की। लंगूर ने सोचा कि वह छलांग लगाकर ऊपर पहुँच जाएगा, लेकिन पहाड़ी इतनी सीधी थी कि पकड़ने के लिए कोई झाड़ी या पत्थर ही नहीं था। सब हार मानकर बैठ गए।
चीकू का प्रवेश और तर्क (The Logic)
तभी भीड़ में से 'चीकू' नाम का एक छोटा खरगोश बाहर निकला। उसे देखकर सब हंसने लगे। "अरे चीकू! जब चीता और लंगूर नहीं चढ़ पाए, तो तुम अपनी नन्ही टांगों से क्या करोगे?"
चीकू कुछ नहीं बोला। उसने पहाड़ी को ध्यान से देखा। उसने देखा कि धूप की वजह से पहाड़ी का एक हिस्सा बहुत गर्म है और वहां से पत्थर पसीज (moisture) रहा है, जिससे वह और फिसलन भरा हो गया है। लेकिन पहाड़ी के पीछे का हिस्सा छाया में था और वहां रात की ओस की वजह से छोटी-छोटी काई (moss) जमी हुई थी।
तर्क (Logic): चीकू ने सोचा कि अगर वह सीधे चढ़ेगा तो गिरेगा, लेकिन अगर वह उस हिस्से से चढ़े जहां काई की हल्की पकड़ है और वह भी तिरछा (Zig-Zag) होकर, तो घर्षण (friction) के कारण वह फिसलने से बच सकता है।
असली परीक्षा (The Real Test)
चीकू ने चढ़ना शुरू किया। वह बाकी जानवरों की तरह तेज़ी से नहीं भाग रहा था। वह हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा था। उसने अपने पैरों पर थोड़ी गीली मिट्टी लगा ली थी ताकि पकड़ मजबूत रहे।
जब वह आधा रास्ता पार कर गया, तो हवा तेज़ चलने लगी। चीकू घबराया नहीं। वह पत्थर से चिपक कर बैठ गया और हवा के रुकने का इंतज़ार किया। उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे, तिरछे रास्ते से होते हुए, वह पहाड़ी की चोटी पर पहुँच गया।
पूरा जंगल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। चीकू ने वह जड़ी-बूटी तोड़ी और सुरक्षित नीचे उतर आया।
राजा का सम्मान
राजा शेर विक्रम सिंह ने चीकू को गले लगाया और कहा, "आज चीकू की परीक्षा ने यह साबित कर दिया कि ऊँचाई छूने के लिए लंबे पैरों की नहीं, बल्कि स्थिर दिमाग और सही तकनीक की ज़रूरत होती है।"
चीकू को सोने का पदक दिया गया और वह जंगल का सबसे सम्मानित छोटा जीव बन गया।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
"हड़बड़ी और शारीरिक बल से ज़्यादा, धैर्य और योजना (Planning) काम आती है। जो काम ताकत से नहीं हो सकता, वह बुद्धिमानी और सही तर्क से पूरा किया जा सकता है।"
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