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चतुर नेवला और कोबरा: जंगल की रोमांचक कहानी

पढ़ें चतुर नेवला और कोबरा की हिंदी कहानी। जानें कैसे एक निडर नेवले ने जंगल के पक्षियों को जहरीले सांप से बचाया। बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ जंगल स्टोरी।

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चतुर नेवला और कोबरा: जंगल की रोमांचक कहानी

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प्रस्तावना: सुंदरवन का घना जंगल

प्यारे बच्चों! शहरों और गाँवों से बहुत दूर, एक घना जंगल था जिसका नाम था—सुंदरवन। यह जंगल इतना घना था कि सूरज की किरणें भी मुश्किल से ज़मीन तक पहुँच पाती थीं। यहाँ तरह-तरह के जानवर मिलजुल कर रहते थे। ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर रंग-बिरंगी चिड़िया चहचहाती थीं और झाड़ियों में छोटे-छोटे खरगोश और गिलहरियां खेला करते थे।

लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर आज की कहानी इसी जंगल की एक अद्भुत घटना पर आधारित है। यह कहानी है एक चतुर नेवले और एक खतरनाक कोबरा की। यह कहानी हमें सिखाती है कि दूसरों की मदद करने वाला ही असली हीरो होता है।

तो चलिए, चलते हैं सुंदरवन की गहराइयों में!

बरगद के पेड़ के नीचे की दुनिया

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जंगल के बीचों-बीच एक बहुत पुराना और विशाल बरगद का पेड़ था। उस पेड़ की जड़ें ज़मीन में गहरी फैली हुई थीं। उन्हीं जड़ों के बीच एक सुरक्षित बिल में रहता था हमारा हीरो—मोंटू नेवला

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मोंटू बहुत ही फुर्तीला और समझदार था। उसके भूरे रंग के रोएंदार बाल और चमकती हुई आँखें उसे बहुत आकर्षक बनाती थीं। मोंटू अपने इलाके का रक्षक था। वह अपनी तेज़ सूँघने की शक्ति से खतरे को पहले ही भाँप लेता था। बरगद के पेड़ पर एक बुलबुल का घोंसला भी था, जिसमें उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे रहते थे। बुलबुल और मोंटू अच्छे पड़ोसी थे। अक्सर मोंटू पेड़ के नीचे आराम करता और बुलबुल के बच्चे उसे ऊपर से देखकर चहकते।

जंगल में काला साया

सुंदरवन में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जंगल के दूसरे छोर पर एक अंधेरी गुफा थी। उस गुफा में रहता था जंगल का सबसे डरावना दुश्मन—कालिया कोबरा

कालिया कोबरा बहुत विशाल और काला था। उसका फन बहुत चौड़ा था और उसकी आँखों में हमेशा गुस्सा रहता था। जंगल के छोटे जानवर—मेंढक, चूहे और खरगोश—उसका नाम सुनते ही छिप जाते थे। कालिया को अपनी ताकत और ज़हर पर बहुत घमंड था। उसे लगता था कि पूरा जंगल उससे डरता है और वह जो चाहे कर सकता है।

एक दिन, कालिया शिकार की तलाश में रेंगता हुआ उस पुराने बरगद के पेड़ की तरफ आ निकला। उसकी नज़र पेड़ की नीची डाल पर बने बुलबुल के घोंसले पर पड़ी।

खतरे की घंटी

दोपहर का समय था। बुलबुल दाना चुगने के लिए कहीं दूर गई हुई थी। घोंसले में सिर्फ नन्हे बच्चे थे, जो अपनी माँ का इंतज़ार कर रहे थे। कालिया कोबरा ने अपनी जीभ बाहर निकाली और फुफकारा, "आहा! आज तो दावत होगी। तीन-तीन नरम शिकार!"

वह धीरे-धीरे पेड़ के तने पर लिपटने लगा और ऊपर चढ़ने लगा। बच्चों ने जब उस काले साए को अपनी ओर आते देखा, तो वे डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से चीं-चीं करने लगे। उनकी आवाज़ सुनकर पास की झाड़ियों में लेटा मोंटू एकदम से चौकन्ना हो गया।

मोंटू ने ऊपर देखा—कालिया कोबरा घोंसले के बिल्कुल करीब पहुँच चुका था। मोंटू समझ गया कि अगर उसने जल्दी कुछ नहीं किया, तो बुलबुल के बच्चे नहीं बचेंगे।

नेवले की ललकार

मोंटू ने बिना एक पल गँवाए पेड़ की जड़ों पर छलांग लगाई और ज़ोरदार आवाज़ में चिल्लाया (अपनी भाषा में), "रुक जा कालिया! उन मासूम बच्चों को छोड़ दे!"

कालिया ने पीछे मुड़कर देखा। एक छोटा सा नेवला उसे चुनौती दे रहा था। कालिया हँसा और बोला, "तू? एक छोटा सा नेवला मुझे रोकेगा? भाग जा यहाँ से, वरना तुझे भी खा जाऊँगा!"

लेकिन मोंटू डरा नहीं। वह बिजली की तेज़ी से पेड़ के तने पर चढ़ा और कोबरा का रास्ता रोककर खड़ा हो गया। मोंटू ने अपनी पूंछ के बाल फुला लिए ताकि वह बड़ा और खतरनाक दिखे। उसने अपनी लाल आँखों से कोबरा को घूरा।

महामुकाबला: हवा से तेज़ रफ़्तार

अब चतुर नेवला और कोबरा आमने-सामने थे। कोबरा ने पूरी ताकत से अपना फन फैलाया और मोंटू पर डंसने के लिए झपट्टा मारा। उसका वार इतना तेज़ था कि पत्तियां हिल गईं। लेकिन मोंटू तो हवा से भी तेज़ था! उसने पलक झपकते ही अपनी जगह बदल ली और कोबरा का वार खाली गया।

कालिया गुस्से से पागल हो गया। उसने दोबारा हमला किया, फिर तिबारा। लेकिन हर बार मोंटू अपनी गजब की फुर्ती (Agility) से बच निकलता। मोंटू सिर्फ बच नहीं रहा था, वह मौका मिलते ही कोबरा पर जवाबी हमला भी कर रहा था।

जब कोबरा थककर अपना फन नीचे करता, मोंटू बिजली की गति से आता और कोबरा की पूंछ या गर्दन पर काट लेता। कोबरा दर्द से बिलबिला उठता। यह लड़ाई पूरे जंगल के जानवर दूर से देख रहे थे। गिलहरियां, बंदर और पक्षी सांस रोककर मोंटू की हिम्मत देख रहे थे।

घमंड का अंत

काफी देर तक लड़ाई चलती रही। कालिया अब बुरी तरह थक चुका था। उसके शरीर पर कई जगह घाव हो गए थे। उसका घमंड अब टूट रहा था। उसे समझ आ गया था कि मोंटू से जीतना नामुमकिन है।

आखिरी बार, कालिया ने पूरी ताकत बटोरकर हमला किया, लेकिन मोंटू ने सही मौके का फायदा उठाया। उसने हवा में ऊंची छलांग लगाई और सीधे कोबरा की गर्दन को अपने मज़बूत जबड़ों में जकड़ लिया। कोबरा ने छूटने की बहुत कोशिश की, पेड़ की डालियों पर पछाड़े खाए, लेकिन मोंटू की पकड़ लोहे जैसी थी।

थोड़ी ही देर में, जंगल के उस खूंखार दुश्मन का अंत हो गया। मोंटू ने कोबरा को पेड़ से नीचे गिरा दिया।

जंगल में खुशी की लहर

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तभी बुलबुल भी वापस आ गई। उसने देखा कि मोंटू हाँफ रहा है और ज़मीन पर कालिया कोबरा मरा पड़ा है। उसके बच्चे सुरक्षित घोंसले में चहक रहे थे। बुलबुल की आँखों में आंसू आ गए। उसने मोंटू का धन्यवाद किया।

जंगल के बाकी जानवर भी बाहर निकल आए। बंदरों ने ताली बजाई और गिलहरियों ने खुशी से शोर मचाया। उस दिन सबको समझ आ गया कि ताकत शरीर में नहीं, बल्कि हिम्मत और इरादों में होती है। मोंटू ने साबित कर दिया था कि एक छोटा सा जानवर भी अगर ठान ले, तो बड़े से बड़े दुश्मन को हरा सकता है।

ज्ञान की बात: क्या आप जानते हैं? (Science Facts for Kids)

बच्चों, आइए जानें कि नेवला कोबरा से कैसे जीत जाता है:

  1. कमाल की फुर्ती (Agility): नेवले की सबसे बड़ी ताकत उसकी रफ़्तार है। वह सांप के हमले को देखकर तुरंत अपनी दिशा बदल लेता है।

  2. सुरक्षा कवच (Thick Fur): नेवले के बाल बहुत घने होते हैं। जब वह गुस्से में होता है, तो अपने बाल फुला लेता है। इससे सांप के दांत उसकी त्वचा तक नहीं पहुँच पाते।

  3. ज़हर से बचाव (Venom Resistance): नेवले के शरीर में 'एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर्स' (Acetylcholine receptors) थोड़े अलग होते हैं, जिससे सांप का ज़हर उन पर वैसा असर नहीं करता जैसा बाकी जानवरों पर करता है।

कहानी की सीख

चतुर नेवला और कोबरा की यह कहानी हमें सिखाती है:

  1. निडरता: दुश्मन चाहे कितना भी ताकतवर हो, हमें डरना नहीं चाहिए।

  2. परोपकार: अपनी ताकत का इस्तेमाल हमेशा कमज़ोरों की रक्षा के लिए करना चाहिए, जैसे मोंटू ने बुलबुल के बच्चों के लिए किया।

  3. बुद्धि ही बल है: मोंटू ने अपनी फुर्ती और समझदारी से कोबरा को हराया, न कि सिर्फ ताकत से।

विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)

नेवले के जीवन के बारे में और जानने के लिए यहाँ क्लिक करें:

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Tags : Hindi Jungle Stories

लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम

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