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घमंडी मगरमच्छ को सबक: भारत के घने जंगलों के बीच से होकर बहने वाली 'कावेरी नदी' का पानी गहरा और नीला था। इस नदी में मछलियां, मेंढक और कछुए शांति से रहते थे। लेकिन उनकी शांति छीनने वाला एक ही जानवर था - 'गगराज'। गगराज एक विशालकाय और बेहद मगरमच्छ (Crocodile) था। उसका शरीर चट्टान जैसा कठोर और जबड़े आरी जैसे तेज थे।
गगराज को अपनी ताकत पर बहुत घमंडी मगरमच्छ वाला अहंकार था। वह नदी के छोटे जीवों को डराता-धमकाता रहता था। "हटो मेरे रास्ते से! मैं इस नदी का राजा हूँ," वह अक्सर दहाड़ता था। उसकी भारी आवाज़ सुनकर नन्ही मछलियां पत्थरों के नीचे छिप जाती थीं।
उसी नदी के किनारे एक पुराना और समझदार कछुआ रहता था, जिसका नाम था 'टिटू'। टिटू शरीर से छोटा जरूर था, लेकिन उसका दिमाग बहुत तेज चलता था। वह अक्सर गगराज की हरकतों को देखकर मुस्कुरा देता और चुपचाप अपने काम में लग जाता।
गगराज की चुनौती
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एक दिन दोपहर के समय, गगराज नदी के किनारे धूप सेंक रहा था। उसका मुंह खुला था और वह बहुत डरावना लग रहा था। टिटू कछुआ धीरे-धीरे वहां से गुजर रहा था। गगराज ने टिटू को देखा और मज़ाक उड़ाते हुए बोला, "अरे ओ पत्थर के टुकड़े! इतनी धीरे कहाँ रेंग रहे हो? तुम्हारे जैसे सुस्त जानवर को तो भगवान ने गलती से बना दिया। तुम मेरे सामने कुछ नहीं हो।"
टिटू रुका और उसने विनम्रता से कहा, "गगराज भाई, हर जीव की अपनी खूबी होती है। आप ताकतवर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाकी सब बेकार हैं। कभी-कभी धीमा चलने वाला भी बाजी मार ले जाता है।"
यह सुनकर गगराज का पारा चढ़ गया। उसने अपनी पूंछ पानी में पटकी और कहा, "क्या? तुम मुझे ज्ञान दोगे? अगर तुम्हें अपनी काबिलियत पर इतना ही भरोसा है, तो चलो एक मुकाबला हो जाए। देखते हैं कौन ज्यादा श्रेष्ठ है - मेरी ताकत या तुम्हारी सुस्त चाल?"
टिटू जानता था कि पानी में या दौड़ने में वह मगरमच्छ से नहीं जीत सकता। उसने अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल किया। उसने सोचा, "ताकत को ताकत से नहीं, अकल से हराना होगा।"
टिटू ने कहा, "ठीक है गगराज भाई, मुझे चुनौती मंजूर है। लेकिन रेस का रास्ता मैं तय करूँगा।" गगराज ने हँसते हुए कहा, "जहाँ कहोगे, वहां हराऊंगा। बताओ, कहाँ जाना है?"
अनोखी दौड़: दलदल का चक्रव्यूह
टिटू ने नदी के दूसरी ओर स्थित 'मैंग्रोव के जंगल' (Mangrove Forest) की ओर इशारा किया। वहां की ज़मीन बहुत दलदली थी और वहां पेड़ों की जड़ें जाल की तरह फैली हुई थीं। टिटू ने कहा, "हमें उस पुराने 'सफेद बगुले के पेड़' तक पहुँचना है जो उस दलदल के बीच में है। जो वहां पहले पहुंचकर पेड़ की जड़ को छू लेगा, वही विजेता होगा।"
गगराज ने सोचा, "दलदल? मैं तो इतना ताकतवर हूँ कि कीचड़ को चीरता हुआ निकल जाऊंगा।" उसने तुरंत हामी भर दी। यह साहस नहीं, बल्कि उसका अति-आत्मविश्वास था।
जंगल के बाकी जानवर - बंदर, तोते और हिरण - इस अनोखी दौड़ को देखने के लिए पेड़ों पर जमा हो गए। रेस शुरू हुई!
ताकत बनाम तकनीक
गगराज ने अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ना शुरू किया। शुरुआत में गीली मिट्टी पर वह तेज़ भागा। लेकिन जैसे ही वे घने मैंग्रोव के इलाके में पहुँचे, गगराज की मुसीबतें शुरू हो गईं। गगराज का शरीर बहुत भारी और चौड़ा था। मैंग्रोव की उलझी हुई जड़ें (Roots) उसके लिए पिंजरे जैसी बन गईं। उसका भारी शरीर गीले दलदल में धंसने लगा। वह जितना ज़ोर लगाता, उतना ही अंदर धंसता जाता। उसके विशाल पैर जड़ों में अटकने लगे।
"उफ्फ! यह कीचड़ तो मुझे जकड़ रहा है!" गगराज चिल्लाया। वह गुस्से में अपनी पूंछ पटक रहा था, लेकिन इससे वह और फंसता चला गया।
दूसरी तरफ, टिटू कछुआ छोटा और हल्का था। वह दलदल में धंसने के बजाय उसके ऊपर तैरता हुआ चल रहा था। उसका छोटा आकार उसे उलझी हुई जड़ों के बीच से आसानी से निकलने में मदद कर रहा था। वह धीरे-धीरे, लेकिन बिना रुके अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। यह दृश्य किसी हिंदी कहानी के जादुई पल जैसा था।
घमंड का टूटना
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गगराज अब बुरी तरह थक चुका था। वह पसीने से तर-बतर था और हिल भी नहीं पा रहा था। उसने देखा कि वह 'पत्थर का टुकड़ा' (टिटू) उससे आगे निकल गया है। टिटू ने पीछे मुड़कर देखा कि गगराज फंसा हुआ है। टिटू अपनी चाल चलता रहा और आखिरकार 'सफेद बगुले के पेड़' के पास पहुँच गया। उसने पेड़ की जड़ को छू लिया।
जानवर खुशी से चिल्लाने लगे, "टिटू जीत गया! टिटू जीत गया!"
गगराज का सिर शर्म से झुक गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। टिटू ने अपनी जीत का जश्न मनाने के बजाय वापस गगराज के पास जाने का फैसला किया। टिटू ने देखा कि गगराज जड़ों में बुरी तरह फंसा है और खुद नहीं निकल पा रहा है।
टिटू ने अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ाया। उसने अपनी तीखी चोंच से उन जड़ों को कुतरना शुरू किया जिनमें गगराज फंसा था। उसने गगराज को बताया कि किस दिशा में पैर रखने से वह बाहर निकल सकता है। काफी मशक्कत के बाद गगराज आज़ाद हुआ।
असली राजा कौन?
गगराज नदी के किनारे वापस आया। वह थका हुआ और शर्मिंदा था। उसने टिटू से कहा, "टिटू, मैं हार गया। न केवल रेस में, बल्कि व्यवहार में भी। तुम छोटे हो, लेकिन तुम्हारा दिल और दिमाग मुझसे बहुत बड़ा है। आज तुमने मुझे बचाया, जबकि मैं तुम्हारा मज़ाक उड़ा रहा था।"
टिटू ने मुस्कुराते हुए कहा, "गगराज भाई, जंगल में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। हम सब एक-दूसरे के पूरक हैं। ताकत का सही उपयोग दूसरों की रक्षा करने में है, डराने में नहीं।"
उस दिन के बाद से घमंडी मगरमच्छ बदल गया। अब वह नदी का रक्षक बन गया था, तानाशाह नहीं। टिटू और गगराज पक्के दोस्त बन गए।
बच्चों, यह जंगल की कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी अपनी ताकत या रूप पर घमंड नहीं करना चाहिए। समय आने पर एक छोटा सा जीव भी बड़े से बड़े दिग्गज को मात दे सकता है।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
घमंड विनाश का कारण है: अपनी शक्ति पर अहंकार करने वाला अंत में मुंह की खाता है।
बुद्धि बल से बड़ी है: कठिन परिस्थितियों में शारीरिक ताकत से ज्यादा समझदारी काम आती है।
दयालुता: जीतने के बाद हारने वाले की मदद करना ही असली वीरता है।
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