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जंगल की दुनिया बाहर से जितनी खूबसूरत लगती है, अंदर से उतनी ही चुनौतियों से भरी होती है। Jungle Story for Kids की इस कड़ी में आज हम बात करेंगे 'चिक्की' नाम की एक गौरैया (Sparrow) की। यह कहानी सिर्फ एक पक्षी की नहीं, बल्कि एक मां के अदम्य साहस और बुद्धिमानी की है।
अक्सर हम सोचते हैं कि ताकतवर ही जीतता है, लेकिन आज आप देखेंगे कि कैसे एक छोटी सी चिड़िया ने अपनी बुद्धि (Wit) और इच्छाशक्ति (Willpower) से जंगल के बड़े-बड़े शिकारियों को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
काले बादलों का कहर
सुंदरवन के घने जंगल में, एक पुराने बरगद के पेड़ पर चिक्की चिड़िया का छोटा सा घोंसला था। उसके दो नन्हे बच्चे थे—चिंकू और मिंकू। वे अभी उड़ना नहीं जानते थे।
एक शाम, जंगल का मौसम अचानक बदल गया। काले डरावने बादलों ने आसमान को घेर लिया और तेज हवाएं चलने लगीं। जंगल के जानवर अपने-अपने ठिकानों में छुपने लगे।
चिंकू ने डरते हुए कहा, "मां, मुझे बहुत डर लग रहा है। बाहर बहुत अंधेरा है।" चिक्की ने उन्हें पंखों में समेटते हुए कहा, "डरो मत बच्चों, यह सिर्फ बारिश है। जल्दी ही थम जाएगी।"
लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। मुसीबत यह थी कि घर में खाने का एक दाना भी नहीं था। बच्चे भूख से रोने लगे। एक मां के लिए तूफ़ान से ज्यादा डरावना बच्चों का भूखा रहना होता है। चिक्की ने फैसला किया कि वह इस तूफ़ान में भी बाहर जाएगी।
उसने बच्चों को समझाया, "खबरदार! घोंसले से सिर भी बाहर मत निकालना। मैं अभी आती हूँ।"
मौत से सामना
चिक्की भीगते हुए, हवा के थपेड़े खाते हुए उड़ी। उसे जमीन पर कुछ गेहूं के दाने मिले। उसने जल्दी से उन्हें चोंच में भरा और वापस लौटने लगी। लेकिन तभी उसका सामना जंगल के दो खूंखार गुंडों से हुआ—कालू कौवा और शमशेर चील।
दोनों ने चिक्की का रास्ता रोक लिया। शमशेर चील हंसा, "अरे वाह! आज तो बैठे-बिठाए दावत मिल गई। इस बारिश में शिकार ढूँढना मुश्किल था, पर तू खुद आ गई।" कालू कौवा बोला, "नहीं शमशेर! इसे मैंने पहले देखा है, तो इसे मैं खाऊंगा।"
चिक्की जानती थी कि वह ताकत में उनसे नहीं जीत सकती। उसे दिमाग (Logic) का इस्तेमाल करना था। वह कांपते हुए बोली, "मुझे कोई भी खा ले, मुझे गम नहीं। लेकिन मेरे मरने से पहले यह तो फैसला हो जाए कि तुम दोनों में से जंगल का असली राजा कौन है?"
उसने शमशेर की तरफ देखकर कहा, "चील भैया, सुना है आपकी पकड़ लोहे जैसी है?" फिर वह कौवे की तरफ मुड़ी, "और कालू भैया, लोग कहते हैं आपकी चोंच तलवार से तेज है। लेकिन असली ताकतवर कौन है, यह तो लड़कर ही पता चलेगा। जो जीतेगा, वही मुझे खाएगा।"
चिक्की की यह बात दोनों के अहंकार (Ego) पर लगी। शमशेर चिल्लाया, "मैं हूँ असली शिकारी!" और उसने कालू पर हमला कर दिया। दोनों आपस में बुरी तरह लड़ने लगे।
चिक्की को बस इसी मौके का इंतज़ार था। जैसे ही वे लड़ने में व्यस्त हुए, वह बिजली की रफ़्तार से वहाँ से उड़ गई और अपने घोंसले में सुरक्षित पहुँच गई।
बीमारी का हमला
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चिक्की ने बच्चों को खाना खिलाया, लेकिन मुसीबत अभी टली नहीं थी। पूरी रात बारिश का पानी घोंसले में टपकता रहा। ठंड के कारण अगली सुबह चिंकू और मिंकू का शरीर आग की तरह तप रहा था। उन्हें तेज बुखार (Viral Fever) हो गया था।
वे आंखें भी नहीं खोल पा रहे थे। चिक्की घबरा गई। वह तुरंत पड़ोस के डॉक्टर डैनी (एक समझदार चूहा) के पास गई।
डॉक्टर डैनी ने बच्चों की नब्ज देखी और चिंता से सिर हिलाया। "चिक्की, यह साधारण बुखार नहीं है। यह 'जंगली शीत-ज्वर' है। अगर सूरज ढलने से पहले इनका बुखार नहीं उतरा, तो इन्हें बचाना मुश्किल होगा।"
चिक्की रोने लगी, "डॉक्टर, कोई तो दवा होगी?" डॉक्टर डैनी ने कहा, "दवा है, लेकिन वह बहुत मुश्किल है। जंगल की सबसे ऊंची चोटी 'नीलगिरी शिखर' पर एक सुनहरी जड़ी-बूटी (Golden Herb) मिलती है। केवल वही इनका बुखार उतार सकती है। लेकिन वहां तक जाने का मतलब है तूफानी हवाओं से लड़ना। वहां जाने वाला अक्सर वापस नहीं आता।"
एक मां का संकल्प
चिक्की ने अपने बच्चों के तमतमाते चेहरे देखे। उसके मन का डर गायब हो गया। उसने कहा, "डॉक्टर, अगर मेरे बच्चों की जान उस चोटी पर है, तो मैं वहां जरूर जाऊंगी।"
चिक्की ने उड़ान भरी। बारिश अब भी रिमझिम हो रही थी। जैसे-जैसे वह ऊपर जा रही थी, हवा का दबाव बढ़ता जा रहा था। कई बार वह हवा के झोंकों से पीछे धकेल दी गई, कई बार डालियों से टकराई। उसके पंख दुख रहे थे, सांस फूल रही थी।
उसके मन में बस एक ही आवाज़ थी—मेरे बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे हैं।
पहाड़ की चोटी पर पहुँचकर उसने देखा कि पत्थरों के बीच एक चमकता हुआ नीला पौधा था। वही वह संजीवनी बूटी थी। चिक्की ने ईश्वर का धन्यवाद किया, बूटी को चोंच में दबाया और वापस नीचे की ओर गोता लगाया।
चिक्की समय पर लौटी। डॉक्टर डैनी ने वह बूटी बच्चों को दी। कुछ ही घंटों में चमत्कार हुआ। बच्चों का बुखार उतर गया और उन्होंने आंखें खोल दीं।
चिक्की ने उन्हें गले लगा लिया। उसने न केवल तूफ़ान को हराया था, बल्कि मौत के मुंह से अपने बच्चों को छीन लाई थी।
इस कहानी से हमें ये महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:
मुसीबत में घबराएं नहीं (Don't Panic): जब चिक्की को चील और कौवे ने घेरा, तो वह रोई नहीं। उसने दिमाग लगाया और उन्हें आपस में लड़वा दिया। शांत दिमाग हर समस्या का हल निकाल सकता है।
हिम्मत कभी न हारें (Never Give Up): डॉक्टर ने कहा था कि काम मुश्किल है, लेकिन चिक्की ने हार नहीं मानी। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
तर्क और उपाय (Logic over Magic): समस्या का हल सिर्फ रोने या जादू के इंतज़ार से नहीं निकलता, बल्कि सही दिशा में मेहनत (जैसे जड़ी-बूटी लाना) करने से निकलता है।
प्यारे बच्चों, जंगल की यह कहानी हमें सिखाती है कि हम शरीर से चाहे कितने भी छोटे क्यों न हों, अगर हमारे इरादे मजबूत हैं, तो हम बड़े से बड़े तूफ़ान का सामना कर सकते हैं। अगली बार जब भी आप किसी मुश्किल में फंसे, तो चिक्की की तरह ठंडे दिमाग से सोचें और पूरे साहस के साथ उसका सामना करें।
विकिपीडिया लिंक (Wikipedia Link)
गौरैया और उनके जीवन के बारे में अधिक रोचक जानकारी के लिए आप यहाँ पढ़ सकते हैं: House Sparrow - Wikipedia
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