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जीवन में कई बार हमारे सामने ऐसी मुसीबतें आती हैं जब हमें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया। हमारा बना-बनाया 'घर', चाहे वह सपनों का हो या ईंट-पत्थर का, बिखर जाता है। ऐसे समय में दो ही रास्ते होते हैं—या तो रोते रहो, या फिर उठो और एक Naya Basera बनाओ, जो पहले से भी ज्यादा मजबूत हो। यह कहानी 'चंदनवन' की एक नन्ही गिलहरीचिंकी की है, जिसने एक भयानक तूफान में सब कुछ खो दिया, लेकिन अपनी हिम्मत से एक ऐसा घर बनाया जिसे देखकर पूरा जंगल दंग रह गया।
कहानी: हिम्मत की एक नई शुरुआत
चंदनवन का वो पुराना पेड़
चंदनवन जंगल के बीचों-बीच एक बहुत पुराना और विशाल आम का पेड़ था। उस पेड़ के एक खोखले तने (Hollow Trunk) में चिंकी गिलहरी अपने परिवार के साथ रहती थी। चिंकी बहुत मेहनती थी। उसने अपने घर को बहुत प्यार से सजाया था—सूखी घास का बिछौना, अखरोट के छिलकों की कटोरियाँ और सर्दियों के लिए जमा किए गए ढेर सारे बीज।
चिंकी को लगता था कि उसका यह घर दुनिया का सबसे सुरक्षित कोना है। वह अक्सर अपनी पड़ोसन, मीठू तोते, से कहती, "देखो मीठू भाई, मेरा घर कितना मज़बूत है। यहाँ न बारिश का डर है, न धूप का।"
लेकिन कुदरत का नियम है—बदलाव। और कभी-कभी बदलाव बहुत दर्दनाक होता है।
विनाश की वो काली रात
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एक शाम, जंगल में भयानक आंधी आई। काले बादलों ने आसमान को घेर लिया और बिजली कड़कने लगी। हवा इतनी तेज़ थी कि बड़े-बड़े पेड़ भी कांप रहे थे। चिंकी अपने बच्चों को लेकर घर के कोने में दुबक गई।
तभी एक ज़ोरदार आवाज़ आई—कड़-कड़-धड़ाम! जिस आम के पेड़ पर चिंकी का घर था, उसकी एक विशाल डाल टूटकर नीचे गिर गई। जिस हिस्से में चिंकी का घर था, वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चिंकी और उसके बच्चे किसी तरह जान बचाकर बाहर निकले, लेकिन उनकी आँखों के सामने उनका प्यारा घर, उनकी मेहनत और उनका जमा किया हुआ सारा खाना मलबे में दब गया।
बारिश में भीगती हुई चिंकी एक चट्टान के नीचे कांप रही थी। उसके बच्चे भूख से रो रहे थे। मीठू तोता, जिसका घर सुरक्षित था, उसने ऊपर से कहा, "बड़ी दुखद बात है चिंकी। अब तुम क्या करोगी? इतनी सर्दी में नया घर कैसे मिलेगा?"
शोक नहीं, नवनिर्माण
अगली सुबह जब सूरज निकला, तो नज़ारा दिल तोड़ने वाला था। पुराना पेड़ अब रहने लायक नहीं बचा था। जंगल के कई जानवर चिंकी के पास आए और सहानुभूति दिखाने लगे।
"बेचारी चिंकी, अब कहाँ जाएगी?" एक खरगोश ने कहा। "किस्मत ही ख़राब है," एक हिरण ने आह भरी।
चिंकी की आँखों में आंसू थे, लेकिन उसने उन्हें पोंछ लिया। उसने सोचा, "रोने से मेरे बच्चों का पेट नहीं भरेगा और न ही उन्हें छत मिलेगी। जो चला गया, वो वापस नहीं आएगा। मुझे नया बसेरा ढूंढना ही होगा।"
चिंकी ने जंगल का मुआयना (Survey) किया। उसने देखा कि नदी के किनारे एक बरगद का पेड़ है, जो आम के पेड़ से भी ज्यादा पुराना और मज़बूत है। उसकी जड़ें ज़मीन में गहरी थीं और शाखाएं बहुत घनी थीं।
चिंकी ने ठान लिया—"मैं अपना नया घर यहीं बनाऊंगी। और इस बार ऐसा घर बनाऊंगी जो आंधी क्या, तूफ़ान से भी न हिले।"
चिंकी की अटूट मेहनत
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चिंकी ने काम शुरू किया। वह थकती थी, गिरती थी, लेकिन रुकती नहीं थी। उसने पहले से ज्यादा सावधानी बरती। इस बार उसने घर बनाने के लिए सिर्फ सूखी घास नहीं, बल्कि लचीली टहनियों और मजबूत लताओं (Vines) का इस्तेमाल किया।
जंगल के कुछ जानवर उस पर हँसे भी। एक शरारती बंदर, बंटी, ने चिढ़ाया, "अरे चिंकी, क्यों इतनी मेहनत कर रही हो? फिर कोई तूफ़ान आएगा और सब उड़ा ले जाएगा।"
चिंकी ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "बंटी भाई, तूफ़ान का काम है आना और मेरा काम है बसना। अगर मैं डरकर बैठ गई, तो तूफ़ान जीत जाएगा। पर अगर मैं बार-बार घर बनाती रही, तो जीत मेरी होगी।"
चिंकी की यह बात सुनकर बंदर चुप हो गया। दिन-रात की मेहनत के बाद, एक हफ्ते के अंदर चिंकी का नया बसेरा तैयार हो गया। यह घर पहले वाले से कहीं ज्यादा बड़ा, हवादार और सुरक्षित था। उसने उसे नदी के सुंदर पत्थरों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया भी।
नया घर, नई खुशियाँ
जब घर बनकर तैयार हुआ, तो जंगल के सभी जानवर उसे देखने आए। वे हैरान थे। पुराना घर तो बस एक कोना था, लेकिन यह नया घर किसी महल से कम नहीं लग रहा था।
मीठू तोता आया और बोला, "चिंकी, मान गए तुम्हारी हिम्मत को। अगर वो तूफ़ान न आता, तो शायद तुम कभी इतना सुंदर घर नहीं बना पातीं।"
चिंकी ने अपने बच्चों को गले लगाया और कहा, "सही कहा। मुसीबत ने मेरा घर ज़रूर तोड़ा, लेकिन उसने मुझे यह भी सिखाया कि मेरे अंदर उससे बेहतर बनाने की ताकत है। यह सिर्फ एक नया घर नहीं, यह मेरी नई उम्मीद है।"
अब चिंकी और उसका परिवार बरगद के पेड़ पर मज़े से रहते हैं। जब भी जंगल में कोई जानवर मुसीबत में होता है, वे उसे चिंकी की कहानी सुनाते हैं कि कैसे उसने विनाश को निर्माण में बदल दिया।
निष्कर्ष: अंत ही शुरुआत है
चिंकी की कहानी हमें बताती है कि बुरा वक़्त एक पड़ाव है, अंत नहीं। जब पुराना छूटता है, तभी कुछ नया और बेहतर मिलने की जगह बनती है। ज़रुरत है तो बस एक सकारात्मक सोच और कभी न टूटने वाले हौसले की।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है:
परिवर्तन को स्वीकार करें: जो खो गया उस पर रोने के बजाय, जो बनाया जा सकता है उस पर ध्यान दें।
हिम्मत और मेहनत: कोई भी आपदा आपकी मेहनत और इच्छाशक्ति से बड़ी नहीं होती। "नया बसेरा" सिर्फ ईंटों का नहीं, हौसलों का बनता है।
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