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पढ़िए Shararti Chiki की एक रोमांचक कहानी। कैसे एक नन्ही गिलहरी की शरारत उस पर भारी पड़ी और जंगल के दोस्तों ने उसे आसमान के शिकारी से बचाया। बच्चों के लिए बेहतरीन प्रेरणादायक कहानी।
नमस्ते नन्हे दोस्तों! क्या आपको कभी अपनी मम्मी ने किसी चीज़ के लिए मना किया है, लेकिन आपने वही काम किया हो? कभी-कभी हमें लगता है कि हमारे बड़े हमें टोकते हैं, लेकिन असल में वे हमें आने वाली मुसीबतों से बचा रहे होते हैं। आज की हमारी Shararti Chiki की कहानी हमें ले जाएगी 'नीलगिरी जंगल' में, जहाँ एक नन्ही गिलहरी की शरारत उसके लिए जानलेवा बन गई। चलिए, देखते हैं कि चिकी ने अपनी इस गलती से क्या सीखा।
नीलगिरी जंगल और नन्ही चिकी
भारत के खूबसूरत पहाड़ों के बीच एक घना जंगल था—नीलगिरी जंगल। यहाँ ऊंचे-ऊंचे ओक और देवदार के पेड़ थे। इसी जंगल में चिकी नाम की एक बहुत ही चंचल और शरारती गिलहरी अपनी माँ कोमल के साथ रहती थी।
चिकी दिखने में जितनी प्यारी थी, उतनी ही ज्यादा जिद्दी और शरारती थी। उसकी सबसे बुरी आदत यह थी कि वह कभी अपनी माँ की बात नहीं मानती थी। कभी वह किसी पक्षी के घोंसले से अंडे चुरा लेती, तो कभी सोते हुए जानवरों को परेशान करती। माँ कोमल उसे हमेशा समझाती, "चिकी बेटा, शरारत उतनी ही करो जिससे किसी का नुकसान न हो, वरना एक दिन तुम मुसीबत में फंस जाओगी।" लेकिन चिकी एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देती।
बंदर मामा की पूंछ और राजा की चेतावनी
एक सुनहरी दोपहर में, चिकी एक बड़े बरगद के पेड़ पर उछल-कूद कर रही थी। उसी पेड़ की एक मोटी टहनी पर जम्बो बंदर गहरी नींद में सो रहा था। जम्बो की लंबी पूंछ नीचे लटक रही थी।
चिकी के दिमाग में एक खुराफात सूझी। उसने पास पड़ी एक मज़बूत लता (जंगली बेल) ली और जम्बो की पूंछ को पेड़ की टहनी से कसकर बांध दिया। कुछ देर बाद जब जम्बो सोकर उठा और उसने दूसरी टहनी पर छलांग लगाने की कोशिश की, तो वह बीच हवा में ही झूल गया।
"बचाओ! बचाओ! मैं गिर रहा हूँ!" जम्बो ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज़ सुनकर जंगल का राजा केसरी सिंह (शेर) वहां पहुँच गया। केसरी ने जब चिकी की यह हरकत देखी, तो वह बहुत क्रोधित हुआ।
केसरी सिंह ने दहाड़ते हुए कहा, "चिकी! तुम्हारी शरारतों की वजह से पूरा जंगल परेशान है। आज तुमने जम्बो की जान खतरे में डाली। अगर तुमने अपनी ये हरकतें बंद नहीं कीं, तो मैं तुम्हें इस जंगल से निकाल दूँगा।" माँ कोमल ने हाथ जोड़कर राजा से माफ़ी मांगी और जम्बो की पूंछ खोली।
माँ का बाहर जाना और चिकी की नासमझी
कुछ दिनों बाद, माँ कोमल को किसी काम से जंगल के दूसरे छोर पर जाना पड़ा। जाने से पहले उसने चिकी को सख्त हिदायत दी, "चिकी, मैं एक-दो दिन में आ जाऊँगी। तब तक तुम अपने घर के आस-पास ही रहना और जंगल की सीमा पार मत करना। वहां आसमान में 'गरुड़' (शिकारी पक्षी) मंडराते रहते हैं।"
माँ ने अपने पड़ोसी कालू कौवे से भी चिकी का ख्याल रखने को कहा। माँ के जाते ही चिकी फिर से अपनी मनमानी करने लगी। वह कालू कौवे की बातों को अनसुना करके जंगल की सीमा की ओर निकल गई। वह देखना चाहती थी कि जंगल के बाहर की दुनिया कैसी है।
आसमान का शिकारी और मौत का साया
चिकी चलते-चलते एक खुले मैदान में पहुँच गई जहाँ कोई घना पेड़ नहीं था। वह फूलों के साथ खेल रही थी कि अचानक आसमान में एक साया मंडराने लगा। वह गरुड़ था, जो अपनी पैनी नज़रों से शिकार ढूँढ रहा था।
गरुड़ की नज़र नन्ही चिकी पर पड़ी। चिकी को जैसे ही खतरे का एहसास हुआ, वह जंगल की ओर भागने लगी। लेकिन वहां छिपने के लिए कोई झाड़ी नहीं थी। गरुड़ ने अपनी तेज़ रफ्तार से नीचे गोता लगाया और चिकी को अपने पंजों में दबोच लिया।
"बचाओ! माँ बचाओ!" चिकी डर के मारे चीखने लगी।
एकता की ताकत और चिकी की जान
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उधर, माँ कोमल वापस लौट आई थी और चिकी को न पाकर बदहवास हो गई थी। तभी कालू कौवे और मिट्ठू तोते ने गरुड़ को चिकी को ले जाते हुए देखा। उन्होंने तुरंत जंगल के बाकी जानवरों को खबर दी।
कालू कौवा और मिट्ठू तोता हवा में गरुड़ का पीछा करने लगे। उन्होंने अपनी चोंच से गरुड़ पर हमला करना शुरू किया। "छोड़ दो हमारी सहेली को!" वे चिल्ला रहे थे।
नीचे ज़मीन पर, जम्बो बंदर और बाकी जानवरों ने सूखी पत्तियों और नरम घास का एक बड़ा जाल तैयार किया। जैसे ही कालू के हमले से गरुड़ की पकड़ ढीली हुई, चिकी उसके पंजों से छूटकर नीचे गिरने लगी। वह सीधे जानवरों द्वारा बनाए गए उस नरम घास के ढेर पर गिरी।
चिकी की जान बच गई थी। वह कांप रही थी और उसकी आँखों में आंसू थे।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है:
बड़ों की आज्ञा का पालन: हमारे माता-पिता और बड़े हमें जो भी समझाते हैं, वह हमारी सुरक्षा के लिए होता है। उनकी बात न मानना मुसीबत को बुलावा देना है।
सच्ची दोस्ती: चिकी ने जम्बो बंदर को परेशान किया था, फिर भी मुसीबत के समय जम्बो ने ही उसकी जान बचाने में मदद की।
बुद्धि और एकता: कालू कौवे और मिट्ठू तोते ने अपनी सूझबूझ और एकता से एक शक्तिशाली शिकारी को हरा दिया।
क्या आप जानते हैं? गिलहरियों (Squirrels) की याददाश्त बहुत तेज़ होती है, लेकिन वे अक्सर यह भूल जाती हैं कि उन्होंने अपने खाने (अखरोट और बीज) को कहाँ छिपाया था। इस वजह से जंगल में अनजाने में ही बहुत सारे नए पेड़ उग आते हैं। गिलहरियों के बारे में और अधिक रोचक जानकारी आप Wikipedia पर पढ़ सकते हैं।
लेखक की कलम से: प्यारे बच्चों, शरारत करना बुरा नहीं है, लेकिन ऐसी शरारत कभी न करें जिससे किसी को चोट पहुँचे या आप खुद मुसीबत में पड़ जाएँ। हमेशा अपनों की बात सुनें!
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