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सूरज सिखलाता है हमको: जंगल की सीख भरी कहानी

सूरज, चाँद, तारे, पेड़ और नदियाँ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं हैं। वे हर दिन हमें बिना बोले बहुत कुछ सिखाते हैं। बच्चे अक्सर सवाल करते हैं कि समय पर उठना क्यों ज़रूरी है

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सूरज, चाँद, तारे, पेड़ और नदियाँ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं हैं। वे हर दिन हमें बिना बोले बहुत कुछ सिखाते हैं। बच्चे अक्सर सवाल करते हैं कि समय पर उठना क्यों ज़रूरी है, मेहनत क्यों करनी चाहिए और दूसरों की मदद करना क्यों अच्छा माना जाता है। इन सभी सवालों के जवाब हमें प्रकृति के पास ही मिल जाते हैं।

“सूरज सिखलाता है हमको” की भावना पर आधारित यह जंगल कहानी बच्चों को सरल भाषा में बताती है कि अनुशासन, मेहनत, धैर्य और भलाई का रास्ता ही सच्चा रास्ता होता है। यह कहानी कल्पना और तर्क (logic) दोनों का संतुलन रखती है, ताकि बच्चे सिर्फ भावनाओं से नहीं बल्कि समझ के साथ सीख सकें।

उजाले वाला जंगल

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बहुत दूर, पहाड़ियों के बीच बसा था सूरनवन जंगल। यह जंगल इसलिए खास था क्योंकि यहाँ का सूरज हर दिन सबसे पहले झांकता था। जंगल के जानवर कहते थे,
“हमारा सूरज हमें रोज़ कुछ नया सिखाने आता है।”

इसी जंगल में रहता था एक छोटा हिरन — नीरू। नीरू बहुत प्यारा था, लेकिन एक आदत उसकी माँ को परेशान करती थी। वह सुबह देर से उठता और अक्सर कहता,
“अभी समय है, बाद में भी चल सकता है।”

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सूरज की पहली सीख

एक दिन नीरू देर से उठा। जब वह खेलने निकला, तो देखा कि पक्षी उड़ चुके थे, नदी शांत हो चुकी थी और खेल का समय निकल गया था।

तभी ऊपर से सूरज की रोशनी पत्तों पर चमकी।
नीरू को लगा जैसे सूरज मुस्कुराकर कह रहा हो,
“जो समय पर उठता है, वही आगे बढ़ता है।”

नीरू को पहली बार समझ आया कि समय का भी एक नियम होता है।


चाँद और तारों की रात

उसी रात नीरू उदास बैठा था। तभी आकाश में चाँद निकला और तारे टिमटिमाने लगे।
पास बैठी उल्लू दादी बोलीं,
“चाँद खुद चमकता है, लेकिन अंधेरे में सबको रोशनी भी देता है।”

नीरू ने सोचा —
“अगर मैं कुछ अच्छा सीख लूँ, तो दूसरों को भी सिखा सकता हूँ।”


पेड़ की चुप सीख

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अगले दिन नीरू एक पुराने बरगद के पास बैठा।
उसके तने पर पुराने निशान थे, कुछ जगह छाल भी उखड़ी हुई थी।
नीरू ने पूछा,
“दादा पेड़, आपको दर्द नहीं होता?”

पेड़ हवा में हिलते हुए बोला,
“दर्द होता है बेटा, लेकिन मैं फल देना नहीं छोड़ता।”

नीरू समझ गया कि मेहनत और सहनशीलता जीवन की असली ताकत है।


नदी और झरने का तर्क

जंगल की नदी कलकलिया कभी नहीं रुकती थी।
नीरू ने पूछा,
“तुम थकती नहीं?”

नदी हँसी,
“जो रुक जाता है, वह गंदा हो जाता है। बहते रहना ही साफ़ रहना है।”

पास का झरना बोला,
“हर बूंद छोटा काम करती है, लेकिन मिलकर बड़ा काम बनता है।”

यह बात नीरू को बहुत गहरी लगी।


जंगल की परीक्षा

एक दिन तेज़ आँधी आई। कई छोटे जानवर डर गए। नीरू भी घबरा गया, लेकिन उसे सूरज, पेड़ और नदी की सीख याद आ गई।

उसने छोटे खरगोशों को सुरक्षित जगह पहुँचाया।
चिड़ियों के घोंसलों को नीचे गिरने से बचाया।
उस दिन नीरू सबसे आगे खड़ा था।


बदला हुआ नीरू

अब नीरू रोज़ सूरज के साथ उठता।
मेहनत करता।
दूसरों की मदद करता।

जंगल के जानवर कहने लगे,
“नीरू अब सिर्फ हिरन नहीं, सीख का दूत बन गया है।”

नीरू मुस्कुराया।
उसे पता था कि उसे यह सब किसी ने नहीं सिखाया —
प्रकृति ने सिखाया है।


कहानी की सीख (Moral)

  • समय का पालन जीवन को सफल बनाता है

  • मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

  • दुख में भी भलाई करना महानता है

  • लगातार आगे बढ़ना ही विकास है

  • प्रकृति सबसे बड़ी शिक्षक है

प्रकृति आधारित शिक्षा और पर्यावरण सीख पर सामान्य जानकारी:
https://en.wikipedia.org/wiki/Nature_education 

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