चालाक राजा को शिक्षा देती ये बाल कहानी

Kids Story Hindi चालाक राजा: एक समय की बात है एक चालाक राजा था जिसका दिल और दिमाग दुनिया के बाकी देशों को हासिल करने, लोगों को डराने में लगा रहता था। उसने दूसरे देशों को आग और तलवार से नष्ट किया था और उसके सैनिकों ने खेतों में जाकर किसानों की झोपड़ियों को आग लगा दिया था।

आग इतनी तेज़ थीं कि डालियों पर लटके हरे पत्ते जलकर राख हो गए और पेड़ों पर लगे फल सड़कर काले हो गए। कई बेचारी औरतें अपने नंगे बच्चों को अपने हाथों में लेकर भागने की कोशिश कर रही थी और जले हुए घरों के पीछे छिपने की कोशिश कर रही थीं।

राजा यह राय रखता था कि सब सही हो रहा है और यह सब प्राकृतिक तरीका है चीज़ें हासिल करने का। उसकी ताकत दिन ब दिन बढ़ती गई और उसके नाम से सब डरने लगे। दूसरे देशों पर कब्जा करने पर वह बहुत सारी दौलत इक्ट्ठा करके लाने लगा। धीरे धीरे वह इतना अमीर हो गया कि उसके पास जितनी दौलत थी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। उसने कई सुंदर महल, गिरजा घर, और हाॅल बनवाए। जो कोई इन इमारतों को देखता था वह इनकी तारीफ किए बिना रह नहीं पाता था।

सब राजा की तारीफ में कहते थे, ‘कितना महान राजा है।’ लेकिन उन लोगों को इन इमारतों के लिए लाए गए पैसों की वजह नहीं पता थी। जो राजा ने दूसरे देशों में जाकर वहाँ के लोगों के साथ करके उनकी दौलत लूटी, उस बात का किसी को पता नहीं था।

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राजा अपने सोने और इमारतों को देखकर गर्व महसूस करता था और जब लोग उसकी तारीफ करते थे तो वह और भी ज़्यादा अभिमानी हो जाता था। तब राजा कहता था, ‘मेरे पास और भी बहुत कुछ है। धरती पर कोई ताकत मेरी ताकत का मुकाबला नहीं कर सकती।’

उसने अपने सभी पड़ोसी राज्यों के साथ युद्ध किया और उन्हें हरा दिया। जब राजा सड़कों पर निकलता था तो उसके द्वारा हासिल किए गए राज्यों के राजाओं को सोने की चेनों के साथ राजा की बग्गी के साथ बाँध दिया जाता था। इन बेचारे राजाओं को इस राजा और उसके मंत्रियो के पैरों में गिरना पड़ता था।

जब मंत्री और राजा खाना खाने बैठते थे, तो उनका बचा हुआ खाना इन राजाओं को दिया जाता था। आखिरकार राजा ने सड़क पर अपने खुद की मूरत बनवाई। वह अपनी मूर्तियों को गिरजाघर में भी लगवाना चाहता था लेकिन पादरी ने इस पर आपत्ति जताई थी। पादरी ने कहा, ‘राजा, बेशक तुम ताकतवर हो, लेकिन तुमसे से कई अधिक भगवान की शक्ति है। हम तुम्हारे आदेशों को नहीं मानेंगे।’

तब राजा ने कहा, ‘ठीक है, मैं भगवान को भी हासिल करके दिखाऊंगा।’ अपनी मूर्खता में राजा ने एक बड़ा जहाज बनाने का आदेश दिया। जिसमें बैठकर वह हवा में जा सके। इस जहाज को कई रंगों से सजाया गया जैसे इसमें मोर के पंख लगाए गए और इसे हज़ारों आँखों से ढका गया, हर आँख में बंदूक की नली थी। राजा जहाज के बीच में बैठा ताकि वह सिर्फ स्प्रिंग को हाथ लगा सके ताकि हज़ारों गोलियाँ अलग अलग दिशाओं में चल सके। हालांकि बंदूकों को दोबारा लोड किया गया।

करीब सौ चीलों को जहाज के साथ बांधा गया और चीलों के उड़ने पर वह जहाज सीधा सूरज की दिशा में उड़ गया। धरती अब बहुत पीछे रह गई थी। राजा ने ऊपर से पहाड़, लकड़ियाँ, खेती की जगह देखी जहाँ पर हलों ने खांचा खींचा हुआ था जिसने हरे घास के मैदान को अलग किया हुआ था। जल्द ही यह दृश्य बहुत छोटा दिखने लगा जैसे मैप में देखा जाता है और आखिर में बादलों के बीच में वह सब गायब हो गया। चीलें हवा में ऊपर उड़ती गई और फिर भगवान ने अपने देवदूतों को जहाज के पीछे भेजा।

चालाक राजा ने उन पर गोलियाँ चला दी पर वह अपने चमकते हुए पंखों से टकराकर पलटकर लौट आए और साधारण ओले की तरह गिर गए। फिर सफेद देवदूतों में से एक देवदूत के पंख से एक खून का कतरा बहा और जहाज पर गिरा और वह देवदूत उस जहाज में गिर पड़ा जिसमें राजा बैठा था और देवदूत के गिरते ही जहाज पर करीब हज़ार किलो का वजन पड़ गया और वह धरती की ओर जहाज को ढकेलता हुआ चला गया।

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चीलों के मजबूत पंखों ने भी जवाब दे दिया। तेज़ आंधी चली और राजा के सिर के पास बादल घूमने लग गए-शायद यह बादल जल रहे शहरों के धुएं की वजह से बने थे। इस धुएं में से अलग अलग आकार के जीव बनकर निकलने लगे जो राजा को अपने पंजे मारने लगे।

राजा अपने जहाज पर अधमरा अवस्था में गिर गया और आखिरकार जहाज पेड़ की शाखाओं से टकराकर गिर गया और राजा बाहर निकला।

राजा ने फिर कहा, ‘मैं भगवान को हासिल करके रहूँगा। मैं कसम खाता हूँ और मेरी यह इच्छा पूरी ज़रूर होगी।’

इसके बाद राजा ने हवा में दोबारा जाने के लिए सात सालों तक जहाज को तैयार करवाया। इस बार जहाज को मजबूत स्टील से बनाया गया ताकि वह स्वर्ग की दीवारों को तोड़ सके। उसने अलग अलग देशों से योद्धाओं को इक्ट्ठा किया। उसने इतने सारे सैनिक इक्ट्ठे किए कि अगर उन्हें एक एक करके खड़ा किया जाए तो उनकी संख्या कई मीलों दूर जाकर खत्म होती। वह सब जहाज में बैठे और राजा ने जहाज उड़ाने का आदेश दिया।

तभी भगवान ने अपने मच्छरों का झुंड भेजा। उन मच्छरों ने राजा के आसपास घूमना शुरू किया और उसके मुंह और हाथों पर काटने लगे। गुस्से में राजा ने अपनी तलवार निकाली और उन्हें मारना शुरू किया लेकिन उसकी तलवार सिर्फ हवा को छूती थी, उससे मच्छरों पर कोई वार नहीं हुआ। फिर उसने अपने नौकरों को ढकने के लिए जाली लाने के लिए कहा और खुद को उसमें कैद कर लिया ताकि मच्छर उस तक ना पहुँच सके।

नौकरों ने राजा के कहे अनुसार काम किया। लेकिन एक मच्छर उस जाली के अंदर रह गया और वह राजा के कान में घुसकर उसे तंग करने लगा। मच्छर का जहर उसके खून में घुस गया। दर्द से पागल होकर राजा अपने कपड़े फाड़ने लगा और अपने सैनिकों के सामने घंटों तक नाचने लगा। सब उसके सैनिक राजा को पागल समझकर हँसने लगे। यह वही राजा है जो भगवान से टक्कर लेने की बात कर रहा था लेकिन वह एक छोटे मच्छर से टक्कर नहीं ले सका।

उपदेश- दोस्तो, यह कहानी हमें शिक्षा देती है कि हमें अपनी ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए और भगवान को कभी चुनौती नहीं देनी चाहिए।

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